कर्नाटक का नाटक: इस्तीफे की घोषणा करते समय भावुक हुए येदियुरप्पा, सुनाई संघर्ष की कहानियां

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरू Published by: प्रियंका तिवारी Updated Mon, 26 Jul 2021 01:52 PM IST

सार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। माना जा रहा है कि उम्र ढलने के कारण पार्टी हाईकमान ने येदियुरप्पा का इस्तीफा लिया है। इस्तीफे का एलान करते समय येदियुरप्पा भावुक हो गए।
बीएस येदियुरप्पा
बीएस येदियुरप्पा - फोटो : ANI
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विस्तार

कर्नाटक में कई महीने से चल रही अटकलों को विराम देते हुए मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस कदम का एलान राज्य में भाजपा सरकार के दो साल पूरे होनेे के अवसर पर विधानसभा में एक विशेष कार्यक्रम में किया। हालांकि, अपने संबोधन के दौरान वह रो पड़े और कहा, मैं हमेशा अग्निपरीक्षा से गुजरा हूं। इसके बाद 78 वर्षीय येदियुरप्पा राजभवन पहुंचे और राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। गहलोत ने इस्तीफा मंजूर करते हुए येदियुरप्पा की मंत्रिपरिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया और उनसे अगले सीएम की ताजपोशी होने तक सत्ता संभालने को कहा। सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक भाजपा प्रभारी अरुण सिंह और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नया सीएम चुनने के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाए जाने की उम्मीद है।
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राज्य विधानसभा के 2023 तक बाकी बचे कार्यकाल के लिए नए सीएम की दौड़ में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, भाजपा महासचिव सीटी रवि, संगठन महासचिव बीएल संतोष और राज्य विधानसभा स्पीकर विश्वेश्वर हेगडे़ कागेरी का नाम आगे चल रहा है। वहीं, राज्य के गृहमंत्री बासवराज बोम्मई का नाम भी चर्चा में है। इसके अलावा, अगर पार्टी हाईकमान गौड़ा समुदाय को प्राथमिकता देता है तो पूर्व केंद्रीय मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा और भाजपा महासचिव सीटी रवि भी इस पद के दावेदार हो सकते हैं। इस समुदाय के राज्य के राजस्व मंत्री आर अशोक और उप मुख्यमंत्री सीएन अश्वथ नारायण के नाम भी चर्चा में हैं। इस बीच भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राज्य के प्रभारी अरुण सिंह से हालात पर चर्चा की है। अरुण सिंह ने नए सीएम पर कहा, भाजपा संसदीय बोर्ड और विधायक दल ही तय करेंगे कि अगला सीएम कौन होगा। हालांकि, यह बैठक कब होगी, इस बारे में उन्होंने जानकारी नहीं दी।


पंचमसाली लिंगायत समुदाय के तीन नेताओं पर भी चर्चाएं तेज
येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद ही नए सीएम पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पंचामसाली लिंगायत समुदाय कई महीने से सीएम पद की मांग कर रहा है। इस समुदाय से आने वाले भाजपा नेता बंसगौड़ा रामनगौड़ा पाटिल यतनाल, अरविंद बेलाड और मुरुगेश निरानी के नाम सीएम पद के लिए चर्चा में हैं।

 मुझ पर नहीं था कोई दबाव, मौका देने के लिए पीएम-गृहमंत्री का आभार: येदियुरप्पा
कर्नाटक के चार बार सीएम रह चुके येदियुरप्पा ने अपने 20 मिनट के संबोधन में कहा, मैंने दो महीने पहले ही हमारी सरकार के दो साल पूरे होने के अवसर पर इस्तीफा देने का फैसला किया था। किसी ने भी मुझे इस्तीफा देने का दबाव नहीं डाला था। मैंने खुद यह फैसला किया है, ताकि सरकार के दो साल पूरे होने के बाद कोई और बतौर सीएम सत्ता संभाल ले। मैंने किसी का नाम नहीं सुझाया है। मैं 2023 में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा की सत्ता में वापसी के लिए काम करता रहूंगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि उनके समर्थक नए सीएम को अपना सौ फीसदी योगदान देंगे। इसमें असंतुष्ट होने का अनुमान लगाने की कोई जरूरत नहीं है। मैं कर्नाटक की दो साल तक सेवा का मौका देने के लिए पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का आभार जताता हूं। मैं कर्नाटक के लोगों और अपने विधानसभा क्षेत्र का भी शुक्रिया जताना चाहता हूं।

इन वजहों से गई कुर्सी...
परिवारवाद का आरोप: येदियुरप्पा का परिवार के प्रशासन में दखल देने के आरोप लगते रहे हैं। भाजपा के भीतर और राजनीतिक हलकों में येदियुरप्पा के छोटे भाई बीवाई विजयेंद्र को सुपर सीएम कहा जाता था।
भ्रष्टाचार: कर्नाटक हाईकोर्ट ने येदियुरप्पा के खिलाफ आठ साल पुराने भ्रष्टाचार मामले को दोबारा शुरू करने की इजाजत दी थी। इसे लेकर विपक्षी कांग्रेस हमलावर है।
पार्टी में विरोध के सुर: येदियुरप्पा के खिलाफ पार्टी में ही विरोध के सुर थे। राज्य के ग्रामीण विकास और पंचायतराज मंत्री केएस ईश्वरप्पा ने सीएम के तानाशाही हस्तक्षेप को लेकर राज्यपाल को  चिट्ठी लिखी थी। वहीं, येदियुरप्पा के कट्टर विरोधी बसंगौड़ा रमनगौड़ा पाटिल ने कहा था कि भाजपा 2023 में सत्ता फिर पाना चाहती है तो येदियुरप्पा को हटाना पडे़गा।  भाजपा नेताओं का एक आरोप ये था कि कांग्रेस-जेडीएस की सरकार गिराने के लिए जो लोग भाजपा में आए आए थे, उनपर येदियुरप्पा का ज्यादा ही स्नेह था।
2023 तक 80 साल के हो जाते: येदियुरप्पा की उम्र भी एक बड़ा मुद्दा थी। अगले विधानसभा चुनाव तक वह 80 से ज्यादा की उम्र के हो जाते और भाजपा के मानकों के हिसाब से येदियुरप्पा को पहले ही हटना था।

78 साल के येदियुरप्पा भाजपा की मजबूरी और मजबूती क्यों बने
दरअसल, कर्नाटक में लिंगायत समुदाय 17 फीसदी के आसपास है। राज्य की 224 विधानसभा सीटों में से तकरीबन 100 सीटों पर लिंगायत समुदाय का प्रभाव माना जाता है। राज्य की करीब आधी आबादी पर लिंगायत समुदाय का प्रभाव है। कर्नाटक में येदियुरप्पा के जनाधार चलते ही मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री पद के लिए अपना अभियान शुरू करते हुए उन्हें पार्टी में वापस बुला लिया था। हाल ही में लिंगायत समूह और लिंगायत मठ के स्वामी ने येदियुरप्पा के यहां संदेश भिजवाया है कि लिंगायत समुदाय पूरी तरह से येदियुरप्पा के साथ है। इन वजहों से भाजपा येदियुरप्पा को नजरअंदाज नहीं कर सकती थी।

जबरन सेवानिवृत्ति क्लब के सदस्य बने येदियुरप्पा: कांग्रेस
महज चेहरा बदलने से भाजपा का भ्रष्ट चरित्र नहीं बदलने वाला है। हम जानते हैं कि अब भाजपा के विधायक नहीं, बल्कि दिल्ली की तानाशाही मुख्यमंत्री का फैसला करती है। इस्तीफा देने के लिए आदेश देकर मोदी ने येदियुरप्पा को अपमानित किया है। वह मोदी के नवीनतम शिकार हैं और ‘जबरन सेवानिवृत्ति क्लब’ के सदस्य बने हैं।-रणदीप सिंह सुरजेवाला, कांग्रेस

संघर्ष के दिनों को किया याद
येदियुरप्पा ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा, 'शिमोगा के शिकारीपुरा में कुछ ही भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मैंने पार्टी को खड़ा किया था। मैंने अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा ही अग्निपरीक्षा दी है।' आपको बता दें कि दक्षिण भारत में पहली बार कमल खिलाने का श्रेय बीएस येदियुरप्पा को ही जाता है। उन्होंने इस्तीफे के बाद कहा,'मेरा यह सपना था कि भाजपा एक बार फिर से पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की लीडरशिप में सत्ता में आए, जो पूरा हो गया है।
 


राज्य में पार्टी की राजनीति में रहेंगे सक्रिय
बीएस येदियुरप्पा ने भावुक होते हुए आगे कहा, 'जब अटल बिहारी बाजपेयी प्रधानमंत्री थे तब उन्होंने मुझे केंद्र में मंत्री बनने को कहा था, लेकिन मैंने कर्नाटक में रहना ही पसंद किया।' माना जा रहा है कि उम्र ज्यादा होने की वजह से पार्टी हाईकमान ने येदियुरप्पा सरकार के दो साल पूरे होने के बाद इस्तीफा लिया है। हालांकि, नए मुख्यमंत्री के चुनाव और राज्य में पार्टी की राजनीति में येदियुरप्पा की भूमिका बनी रहेगी।

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