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कुरुक्षेत्र: बंगाल जीत के बाद भारत की 'बेटी' बनने की राह पर ममता बनर्जी, भाजपा विरोधी चेहरा बनने से पहले बना रहीं स्वीकार्यता

Vinod Agnihotri विनोद अग्निहोत्री
Updated Fri, 30 Jul 2021 12:36 PM IST

सार

ममता का कहना है कि अगर गुजरात से निकल कर नरेंद्र मोदी देश में स्वीकार्य हो सकते हैं तो बंगाल से निकलकर वह या कोई और स्वीकार क्यों नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यह एकाधिकार सिर्फ गुजरात का ही नहीं है बल्कि देश के हर राज्य का है कि वहां से निकलने वाले लोग भारत के पुत्र या पुत्री के रूप में अपनी पहचान बनाएं...
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सोनिया गांधी और ममता बनर्जी
सोनिया गांधी और ममता बनर्जी - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार

बंगाल की बेटी अब भारत की बेटी बनने की राह पर है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने नारा दिया था बंगाल को चाहिए बंगाल की बेटी और इस नारे ने मोदी, शाह, नड्डा और योगी के तूफानी हमलों के खिलाफ ममता बनर्जी को न सिर्फ रक्षा कवच दिया बल्कि उन्हें विजय की माला भी पहनाई। अब इसी नारे को विस्तार देकर बंगाल की बेटी ममता बनर्जी भारत की बेटी बनकर 2024 में नरेंद्र मोदी की अगुआई वाले भाजपा गठबंधन को टक्कर देने की व्यूह रचना में जुट गई हैं। अपनी रणनीति के पहले चरण में ममता ने पश्चिम बंगाल के बाहर अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बनाने की कवायद शुरु कर दी है।
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ममता बनर्जी का दिल्ली दौरा इस लिहाज से बेहद कामयाब माना जा सकता है कि एक तरफ उन्होंने बतौर मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल के मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात करके अपने सरकारी दायित्व का निर्वाह किया। साथ ही, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कमलनाथ, आनंद शर्मा, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई विपक्षी नेताओं से मुलाकात करके देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ममता ने मीडिया के साथ संवाद करके उन तमाम मुद्दों पर अपनी बात रखी, जो उनकी भावी भूमिका को लेकर लगातार उठते रहे हैं।


इस बातचीत में उन्होंने बार-बार यह बात दोहराई कि वह खुद को नरेंद्र मोदी के मुकाबले संयुक्त विपक्ष के नेता के रूप में पेश नहीं कर रही हैं, बल्कि वह एक सामान्य राजनीतिक कार्यकर्ता की भूमिका में पूरे विपक्ष को सरकार के खिलाफ लड़ाई के लिए एकजुट करना चाहती हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में नेता के सवाल पर उन्होंने साफ किया कि इसका फैसला सारे राजनीतिक दल उचित समय पर करेंगे और यह भी मुमकिन है कि चुनाव के बाद इसका फैसला हो। उन्होंने यह भी कहा कि वह भाजपा विरोधी सभी दलों के नेताओं से तो मिल ही रही हैं, साथ ही वह गैर-भाजपा दलों के उन नेताओं और मुख्यमंत्रियों से भी मिलेंगी जो तटस्थ हैं और समय-समय पर संसद में भाजपा की मदद भी करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें नवीन पटनायक, जगन रेड्डी, चंद्रशेखर राव जैसे नेताओं से भी मिलने में उन्हें कोई गुरेज नहीं है।
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