फिर बचाव में उतरे पवार: 5 से 15 फरवरी तक अस्पताल में भर्ती थे देशमुख, वाजे से मुलाकात की बात गलत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Tanuja Yadav Updated Mon, 22 Mar 2021 02:29 PM IST
एनसीपी प्रमुख शरद पवार
एनसीपी प्रमुख शरद पवार - फोटो : PTI
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मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह के पत्र के बाद से महाराष्ट्र सरकार में उथल पुथल मची हुई है। पूरा विपक्ष राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। इस बीच एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार ने दिल्ली में आयोजित एक प्रेसवार्ता में महाराष्ट्र के गृहमंत्री का बचाव किया है।
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उन्होंने कहा कि देशमुख पांच से 15 फरवरी तक कोरोना संक्रमित होने की वजह से अस्पताल में भर्ती थे। इस वजह से वाजे से उनकी बातचीत का सवाल ही नहीं उठता है। बकौल पवार फरवरी में अनिल देशमुख और वाजे की बात होने का तथ्य पूरी तरह से गलत है।


उन्होंने कहा कि परमबीर सिंह जांच की दिशा को भटकाने के लिए इस तरह के गलत आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चिट्ठी में उल्लेखित समय के दौरान वाजे और देशमुख बातचीत होने का कोई सबूत नहीं है।
 

दूसरी ओर एनसीपी के नेता और महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने कहा है कि जांच के बाद ही सच सामने आएगा और तब तक देशमुख के इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता है। मलिक ने कहा कि सबसे पहले तो यह पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर परमबीर सिंह ने अपने ट्रांसफर के बाद यह चिट्ठी क्यों लिखी। उन्होंने भी चिट्ठी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस समय पैसे मांगे जाने का उल्लेख है, उस समय देशमुख अस्पताल में थे। तो बात कैसे और कब हुई, इस बारे में परमबीर ने कुछ नहीं बताया है।

भाजपा आईटी सेल प्रभारी ने जारी किया 15 मार्च की प्रेसवार्ता का वीडियो

शरद पवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही भाजपा आईटी सेल प्रभारी अमित मालवीय ने अनिल देशमुख का 15 फरवरी का एक ट्वीट शेयर किया। बकौल अमित मालवीय शरद पवार ने दावा किया है कि अनिल देशमुख 5-15 फरवरी अस्पताल में भर्ती थे और 16-27 फरवरी क्वांरटीन थे लेकिन 15 फरवरी को उन्होंने प्रेसवार्ता की।

 


ये है पूरा मामला
उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर जिलेटिन की छड़ों से भरी स्कॉर्पियो मिलने के मामले में हटाए गए मुंबई पुलिस के आयुक्त परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर गृह मंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ की वसूली कराने का आरोप लगाया था। उनके आरोपों के बाद से महाराष्ट्र की राजनीति में बवाल मच गया है। अनिल देशमुख ने पहले इन दावों को गलत बताया और परमबीर सिंह पर मानहानि का दावा करने की बात कही। बाद में भाजपा ने जब आरोपों की बौछार शुरू कर दी, तब एनसीपी प्रमुख शरद पवार देशमुख के बचाव में उतरे। 
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