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विदेश मंत्रालय की प्रेस वार्ता: गैरकानूनी कब्जे वाली जगहों पर पुल बना रहा चीन, श्रीलंका में कैद भारतीय मछुआरों की रिहाई के प्रयास जारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 06 Jan 2022 06:02 PM IST

सार

विदेश मंत्रालय की ओर से गुरुवार को एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। यहां मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने श्रीलंका में फंसे भारतीय मछुआरों और पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ विवाद पर जानकारियां साझा कीं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची - फोटो : एएनआई
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विस्तार

श्रीलंका की नौसेना ने दिसंबर में 60 से अधिक भारतीय मछुआरों को अवैध रूप से मछलियों का शिकार करने के आरोप में गिरफ्तार किया था और उनकी कई नाव भी अपने कब्जे में ले ली थीं। इसे लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को कहा कि कोलंबो में भारतीय उच्चायोग ने इन भारतीय मछुआरों की शीघ्र रिहाई का मुद्दा उठाया, जिसके चलते 12 मछुआरों को रिहा किया जा चुका है।

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अरिंदम बागची ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि भारतीय उच्चायोग बाकी मछुआरों की जल्द रिहाई के लिए प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका प्रशासन की ओर से 18 से 20 दिसंबर के बीच तमिलनाडु के 68 मछुआरों और 10 नौकाओं को हिरासत में लेने के मामले के संबंध में भारत सरकार ने श्रीलंका की सरकार से बात की है। इन मछुआरों को जरूरत की सभी सामग्रियां उपब्ध कराई जा रही हैं।


गलवां में चीनी सैनिकों की मौजूदगी को लेकर कही ये बात
उधर, गलवां घाटी में चीनी सैनिकों के वीडियो को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस विषय पर मीडिया में आईं रिपोर्ट तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। भारत में मीडिया संस्थानों ने दावे का विरोध करने वाली तस्वीरें जारी की हैं। वहीं, सार्क शिखर सम्मेलन के आयोजन को लेकर विदेश मंत्रालय ने बताया है कि अभी तक सार्क शिखर सम्मेलन के आयोजन की अनुमति देने के लिए कोई आम सहमति नहीं बन पाई है।

गैरकानूी कब्जे वाले स्थानों पर पुल का निर्माण कर रहा चीन
पैंगोंग त्सो झील पर चीन की ओर से पुल बनाए जाने की खबरों पर बागची ने कहा कि भारत सरकार ऐसी स्थानों पर करीबी से नजर बनाए हुए है। इस पुल का निर्माण ऐसे इलाकों में किया जा रहा है जिन पर चीन का करीब 60 साल से गैरकानूनी कब्जा रहा है। सरकार हमारे सुरक्षा हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में कई बिंदुओं पर गतिरोध हुआ है और हिंसक झड़पें भी हुई हैं।

वहीं, चीनी दूतावास की ओर से सांसदों को लिखे गए पत्र को लेकर मंत्रालय ने कहा कि यह पूरी तरह से अनुचित है। चीनी पक्ष को यह ध्यान रखना चाहिए कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है और जनता के प्रतिनिधि के रूप में भारतीय सांसद अपनी मान्यताओं के साथ गतिविधियों को अंजाम देते हैं।हमें उम्मीद है कि चीनी पक्ष भारतीय सांसदों की सामान्य गतिविधियों पर विवाद फैलाने से और हमारे द्विपक्षीय संबंधों में और तनाव लाने की स्थिति से बचेगा।

विवाद में फंसने के स्थान पर मिल कर काम करे चीन: भारत
मंत्रालय ने कहा कि हमने ऐसी रिपोर्ट देखी हैं जिनमें चीनी पक्ष ने पिछले सप्ताह अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों का नाम अपने हिसाब से बदला था। हमने अस्थिर क्षेत्रीय दावों का समर्थन करने के लिए इस तरह की हास्यास्पद कवायद पर अपने विचार भी व्यक्त किए थे। भारत ने इसे लेकर कहा था कि मनगढ़ंत नाम रख देने से तथ्य और असलियत नहीं बदल जाती है। मंत्रालय ने कहा कि हमें उम्मीद है कि अन्य विवादों में फंसने के स्थान पर चीन हमारे साथ काम करेगा और दोनों देशों की सीमा पर संघर्ष के बिंदुओं पर स्थिति को सामान्य करने की दिशा में काम करेगा।

अफगानिस्तान को जल्द उपलब्ध करवाएंगे मानवीय मदद
अफगानिस्तान को भारत की ओर से मदद को लेकर बागची ने कहा कि हमने इस युद्ध ग्रस्त देश को मानवीय सहायता के रूप में 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं के साथ जीवन रक्षक दवाइयों की आपूर्ति करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। इस संबंध में हम गेहूं को अफगानिस्तान पहुंचाने के लिए पाकिस्तान के अधिकारियों के साथ सही तौर-तरीकों पर बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही यह मानवीय मदद अफगानिस्तान के लोगों तक पहुंचा दी जाएगी।

विदेश मंत्री की बांग्लादेश, नेपाल के समकक्षों के साथ बातचीत इस बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बांग्लादेश, नेपाल, सिंगापुर और नाइजीरिया के समकक्षों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर फोन पर अलग-अलग बातचीत की। एक दिन पहले ही जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मालदीव और भूटान के विदेश मंत्रियों के साथ ऐसी वार्ता की थी। बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मेमन को जयशंकर ने भारत में होने वाली संयुक्त सलाहकार आयोग की बैठक का न्यौता दिया।

जयशंकर ने एक ट्वीट में बताया कि उन्होंने बांग्लादेशी क्रिकेट टीम की न्यूजीलैंड के खिलाफ ऐतिहासिक जीत पर बधाई भी दी। नेपाली विदेश मंत्री नारायण खड़का के साथ वार्ता में उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग के विस्तार पर विचार किया। सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बाला के साथ वार्ता में जयशंकर ने क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों और द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की। नाइजीरिया के विदेश मंत्री जेफ्री ओनीमा के साथ उन्होंने दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों की समीक्षा की।

भारत के इनकार से फिर टली सार्क बैठक भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान में प्रस्तावित दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की बैठक में भाग लेने से इनकार कर दिया है। मंत्रालय के मुताबिक, बैठक कुछ कारणों से नहीं हो पा रही है। क्षेत्र के हालात में अब भी कोई परिवर्तन नहीं आया है। इसके साथ ही पाकिस्तान में प्रस्तावित सार्क की बैठक फिर टल गई है।
मीडिया के साथ बातचीत में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि हमने पाकिस्तान के विदेश मंत्री का सार्क बैठक के संबंध में वक्तव्य देखा है। आप जानते हैं कि 2014 के बाद से सार्क की बैठक क्यों नहीं बुलाई गई है। सार्क का नियम है कि कोई भी सदस्य देश भाग लेने से इनकार कर देता है तो बैठक रद्द हो जाती है।

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