केन्द्र सरकार की नाक के बाल हैं नए सीएजी राजीव महर्षि

शशिधर पाठक/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 31 Aug 2017 10:03 PM IST
new CAG Rajiv Mehrishi is very close to Modi Government
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केन्द्रीय गृहसचिव पद से रिटायर हुए राजीव महर्षि केन्द्र सरकार की नाक के बाल हैं। केन्द्र सरकार ने राजीव महर्षि को देश का अगला भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) बनाया है।
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महर्षि के साथ ही सुनील अरोड़ा को भी चुनाव आयुक्त बनाने का निर्णय लिया गया। महर्षि इससे पहले वित्त मंत्रालय में सचिव रह चुके हैं। व्यवहार से सौम्य और कामकाज के मामले में चुश्त रहने वाले राजीव के बारे में आम है कि वह प्रशासनिक मामलों में योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ते हैं।


अपनी इसी मेधा के बल पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और वित्तमंत्री अरुण जेटली का भरोसा हासिल किया है।

मई 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र के नेतृत्व में केन्द्र में नई सरकार के गठन के समय राजीव महर्षि राजस्थान सरकार में सचिव के पद पर थे। महर्षि १९७८ बैच के राजस्थान कॉडर के अधिकारी हैं।

उस समय अरविंद मायाराम केन्द्रीय वित्त सचिव थे। महर्षि ने पहले अरविंद मायाराम की जगह ली। जब महर्षि वित्त सचिव के पद से रिटायर हुए तो दिल्ली में कॉमन वेल्थ गेम्स सोसायटी में रहने की तैयारी में जुट गए, लेकिन ऐन वक्त पर सरकार ने उन्हें सेवा विस्तार देते हुए केन्द्रीय गृह सचिव नियुक्त कर दिया।

महर्षि ने केन्द्रीय गृहसचिव के दो साल के कार्यकाल सफलता पूर्वक पूरा किया। 31 अगस्त को वह गृहसचिव पद से रिटायर हुए और अब  उन्हें अगला देश सीएजी बनाने का निर्णय हुआ है।

क्यों है सीएजी पद खास

सीएजी केन्द्र सरकार के कामकाज का लेखा जोखा रखता है। सरकार के विभागों द्वारा खरीद-फरोख्त या फिर कामकाज में लेखा मामलों की जांच करता है। इसकी रिपोर्ट काफी अहम होती है और संसद के पटल पर रखी जाती है।

सीएजी की रिपोर्ट का संसद की लोकलेखा समिति संज्ञान लेती है। ऐसे में केन्द्र सरकार के बड़े घोटाले के सामने आने की संभावना बनी रहती है। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में देश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक रहे वीके शुंगलू के समय की रिपोर्ट ने अच्छा खासा राजनीतिक तूफान खड़ा किया था। तब सीएजी ने कारगिल संघर्ष के दौरान खरीदे गए ताबूत में घोटाले का पर्दाफाश किया था। 

इसी तरह से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय में तत्कालीन सीएजी विनोद राय के निर्देशन में हुए लेखा परीक्षण ने कई घोटाले उजागर किए थे। टू-जी लाइसेंस एवं स्पेक्ट्रम आवंटन, कोयला तथा कॉमनवेल्थ गेम घोटाला इसी समय सामने आया था।   
 
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