श्रमिक स्पेशल ट्रेन को लेकर केंद्र और महाराष्ट्र के बीच छिड़ा नया विवाद

अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: मुकेश कुमार झा Updated Mon, 25 May 2020 09:34 PM IST

सार

  • राउत ने कहा- यह न भूलें, महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं गोयल
श्रमिक स्पेशल ट्रेन
श्रमिक स्पेशल ट्रेन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कोरोना संकट में प्रवासी श्रमिकों को गांव भेजने के लिए चलाई गई श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को लेकर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के बीच नया विवाद शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपने फेसबुक लाईव में कहा कि प्रवासियों के लिए प्रतिदिन 80 ट्रेन चाहते हैं लेकिन 40 ही मिल रही है। इसके बाद रेलमंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर महाराष्ट्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। इस पर संजय राउत ने तंज कसा कि रेलमंत्री पीयूष गोयल यह न भूले कि वे महाराष्ट्र का ही प्रतिनिधित्व करते हैं।
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गोयल ने उद्धव ठाकरे को संबोधित करते हुए रविवार रात में ट्वीट किया था कि प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए 125 ट्रेन देने के लिए तैयार है। आपके पास श्रमिको की सूची तैयार है। इसलिए आपसे अनुरोध है कि सभी निर्धारित जानकारी जैसे, कहां से ट्रेन चलेगी, यात्रियों की ट्रेनों के हिसाब से सूची, उनका मेडिकल सर्टिफिकेट और कहां ट्रेन जानी है। यह जानकारी एक घंटे में मध्य रेलवे के महाप्रबंधक को पहुंचाने की कृपा करें।


संजय राउत ने किया पलटवार
रेलमंत्री के ट्वीट के बाद शिवसेना सांसद संजय राउत ने ट्वीट कर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने रेलवे को श्रमिकों की सूची सौंप दी है। लेकिन मैं रेलमंत्री से निवेदन करता हूं कि मजदूरों को ले जा रही ट्रेन अपनी मंजिल पर ही पहुंचे न कि गोरखपुर जाने वाली ट्रेन उड़ीसा पहुंच जाए। सोमवार को संजय राउत ने फिर हमला बोला। उन्होंने कहा कि 14 मई को नागपुर से उधमपुर जाने के लिए निकली ट्रेन के लिए कौन सी सूची मांगी गई थी। कृपया यह भी बताएं कि पहले ट्रेन आई और उसके बाद यात्रियों को जमा किया गया। तो अब सूची क्यों मांग रहे हो।


बालासाहेब थोरात, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष
दूसरे राज्यों के मजदूरों को गांव भेजने के लिए रेल मंत्रालय पर्याप्त ट्रेनें नहीं भेज रहा है। यह सचाई स्वीकार करने की बजाए रेलमंत्री ट्वीटर पर अतिवाद कर रहे हैं। यह दुखद है। 

देवेन्द्र फडणवीस, नेता प्रतिपक्ष विधानसभा
रेल मंत्रालय ने महाराष्ट्र को अब 525 ट्रेने उपलब्ध कराई है। जिससे करीब 7.30 लाख श्रमिक अपने गांव जा चुके हैं। महाराष्ट्र सरकार अपनी असफलता छुपाने के लिए बार-बार केंद्र सरकार को निशाना बना रहा है जो गलत है।
  

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