Hindi News ›   India News ›   Nitish Kumar in talks with Opposition parties over common nominee for President election

'राष्ट्रपति की कुर्सी पर न बैठे कोई संघी', अभी से शुरू हुई मोर्चेबंदी

टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 13 Feb 2017 02:01 PM IST
Nitish Kumar in talks with Opposition parties over common nominee for President election
- फोटो : getty
विज्ञापन
ख़बर सुनें

कभी एनडीए गठबंधन का हिस्सा रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब एनडीए को ही पटखनी देने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते। इसी साल जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए नीतीश कुमार ने अभी से कमर कसना शुरू कर दिया है।

विज्ञापन


राष्ट्रपति चुनाव नजदीक हैं ऐसे में नीतीश कुमार ने विपक्ष को साधने का जिम्मा उठा रखा है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक हाल ही में नीतीश कुमार राजधानी दिल्ली में थे जहां उन्होंने प्रमुख विपक्षी दल NCP, CPM, CPI और INLD के नेताओं के साथ अपनी चिंता का विषय साझा किया।


खबर के मुताबिक नीतीश कुमार राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्ष की एकजुटता चाहते हैं। नीतीश चाहते हैं कि राष्ट्रपति की कुर्सी पर कोई भी 'संघ प्रष्ठभूमि' का व्यक्ति न बैठ पाए इसके लिए पूरे विपक्ष को एकजुट होना चाहिए। 

विपक्षी पार्टियों के संपर्क में नीतीश

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक नीतीश कुमार चाहते हैं कि पूरा विपक्ष मिलकर राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार मैदान में उतारे। गौरतलब है कि 2012 के राष्ट्रपति चुनाव के समय नीतीश कुमार एनडीए का हिस्सा थे इसके बावजूद भी उन्होंने यूपीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया था।

खबर के मुताबिक हाल ही में नीतीश कुमार ने एक के बाद एक विपक्षी पार्टियों के नेताओं से मुलाकात की। अगर सूत्रों की मानें तो नीतीश की इन मुलाकातों का मकसद 'राष्ट्रपति पद' के लिए एक उम्मीदवार तय करना है।

खबर के मुताबिक नीतीश कुमार कांग्रेस के संपर्क में भी हैं और जल्द ही इस संबंध में कांग्रेस के बड़े नेताओं से मुतलाकात कर सकते हैं। 

2012 में नीतीश ने दिया था यूपीए को समर्थन

जेडीयू से जुड़े सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, "राष्ट्रपति चुनाव हमारे लिए अहम मुद्दा है। यह एक संवैधानिक पद है और हम चाहते हैं कि इस पद पर कोई ऐसा व्यक्ति न बैठे जो आरएसएस की पृष्ठभूमि से हो या पक्षपात करे।

हमने पिछले चुनाव में प्रणब मुखर्जी को सपोर्ट किया था क्योंकि हम चाहते थे कि इस पद पर कोई ऐसा व्यक्ति बैठे जो संवैधानिक प्रक्रियाओं को समझता हो।" गौरतलब है कि 2012 के राष्ट्रपति के चुनाव में यूपीए समर्थित प्रनब मुखर्जी ने एनडीए समर्थित पीए संगमा को 40 फीसदी वोटों के अतंराल से हराया था।

जेडीयू ने एनडीए के साथ गठबंधन में होते हुए भी यूपीए समर्थित प्रनब मुखर्जी को सपोर्ट किया था। 
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads
    News Stand

Follow Us

  • Facebook Page
  • Twitter Page
  • Youtube Page
  • Instagram Page
  • Telegram
एप में पढ़ें

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00