विश्लेषण: केंद्र सरकार में घुस आई पूर्व प्रधानमंत्री की 'आत्मा', पलट चुका है लोकतंत्र का यह खास नियम!

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 13 Sep 2021 04:56 PM IST

सार

राजनीतिक विशेषज्ञ और जेएनयू में समाजशास्त्र के पूर्व प्रोफेसर डॉ. आनंद कुमार कहते हैं, केंद्र में 'भरोसा' घट रहा है। यहां बैठे लोग हर चीज को अपने हाथ में लेना चाहते हैं। इससे लोकतंत्र में आत्मविश्वास हिल गया है। एक पार्टी पहले बंगाल हारती है, उसके बाद मर्जी से बाहर का व्यक्ति असम के सीएम की कुर्सी पर बैठाना पड़ता है। ये सब मनमर्जी का खेल ही तो है...
विजय रूपाणी, तीरथ सिंह रावत और बीएस येदियुरप्पा
विजय रूपाणी, तीरथ सिंह रावत और बीएस येदियुरप्पा - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी एक झटके में हटा दिए गए। इससे पहले उत्तराखंड और कर्नाटक में भी यही दोहराया गया था। देश का लोकतंत्र कैसी करवट ले रहा है। जो पावर नीचे से ऊपर जानी चाहिए, वह ऊपर से नीचे आ रही है। मुख्यमंत्री का बनना और हटना, सब 'ऊपर' वाले यानी हाईकमान या केंद्रीय नेतृत्व की मर्जी है। राजनीतिक विशेषज्ञ और जेएनयू में समाजशास्त्र के पूर्व प्रोफेसर डॉ. आनंद कुमार कहते हैं, मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम को देखने पर लगता है कि कहीं केंद्र सरकार में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की आत्मा तो प्रवेश नहीं कर गई है। वैसे पीएम नरेंद्र मोदी और इंदिरा गांधी के बीच कुछ समानताएं तो हैं। बाकी सब कठपुतली, दम तो 'दो' में ही है, यह बात इंदिरा के अलावा मोदी राज में भी देखने को मिल रही है। सीएम का 'फेल और पास' होना, यह तो केंद्रीय नेतृत्व के हाथ में है।  
विज्ञापन


बतौर डॉ. आनंद कुमार, स्वस्थ लोकतंत्र में जितनी भी इकाइयां होती हैं, उनका अपना एक दायरा होता है। किसी पार्टी का संगठन, केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर रहता है। अगर कोई एक इकाई कमजोर पड़ती है तो लोकतंत्र मजबूत नहीं रह पाएगा। कांग्रेस का उदाहरण देश के सामने है। 70 के दशक से जब कांग्रेस में हाईकमान कल्चर आया तो पार्टी, लोकतंत्र से दूर होती चली गई। इंदिरा गांधी की शहादत पर राजीव गांधी पीएम बन गए। अब सोनिया गांधी की आंखों के सामने विरोधी पार्टी भारी बहुमत से सत्ता में आ जाती है। नरेंद्र मोदी को गुजरात का सीएम बनाते वक्त अटल बिहारी वाजपेयी को झुकना पड़ा था। अगर मीडिया रिपोर्ट्स पर गौर करें तो उत्तर प्रदेश का सीएम भी बदला जाना था, लेकिन नहीं बदल सके।

केंद्र में 'भरोसा' घट रहा है। यहां बैठे लोग हर चीज को अपने हाथ में लेना चाहते हैं। इससे लोकतंत्र में आत्मविश्वास हिल गया है। एक पार्टी पहले बंगाल हारती है, उसके बाद मर्जी से बाहर का व्यक्ति असम के सीएम की कुर्सी पर बैठाना पड़ता है। ये सब मनमर्जी का खेल ही तो है। 1975 में यूपी के सीएम हेमवती नंदन बहुगुणा को इंदिरा गांधी के साथ तीन-पांच होने की वजह से पद छोड़ना पड़ा। उसी साल प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अब्दुल गफूर खान को बिहार के सीएम पद से हटाकर जगन्नाथ मिश्रा को मुख्यमंत्री बना दिया था। लोकतंत्र में ताकत नीचे से ऊपर जाने का नियम है, मगर उस वक्त वह पावर ऊपर से नीचे आना शुरू हो गई। मौजूदा समय में तो कहा जा रहा है कि पावर 'दो' के आसपास ही घूमती है। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व भले ही इस ताकत से खुश है, लेकिन इससे पार्टी का अंदरूनी स्वास्थ्य खराब हो रहा है। इसके दूरगामी खराब परिणाम देखने को मिलेंगे।

इस सवाल के जवाब में कि ऐसे में जनता की सोच क्या रहती है, डॉ. कुमार ने कहा, जनता को इससे ज्यादा मतलब नहीं होता। उसे मूलभूत सुविधाएं, जॉब और कानून व्यवस्था पटरी पर रहे, चाहिए होती हैं। आम लोग जानते हैं कि राजनीतिक जमात में बड़ी घटना होती रहती हैं। जब तक हाईकमान खुश है, कुर्सी बनी रहेगी। नीचे की परिस्थितियां चाहे जो भी रहें। नेता को कुर्सी चाहिए तो पीएम की कठपुतली बनना स्वीकार कर लेते हैं। हर बात पीएम के नाम पर होती है। जिले में अपराध बढ़ा है तो कहते हैं फलां पीएम के राज में ये सब हो रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर कुछ भी बोलते रहें, लेकिन किसान आंदोलन वाले यही कहते हैं कि मोदी नहीं चाहते उनकी मांग पूरी हो। कृषि मंत्री की कोई सुनता ही नहीं। वाजपेयी मॉडल से सरकार दूर जा रही है। इंदिरा और मोदी में समानताएं नजर आ रही हैं। सीएम, भले ही कितना अच्छा काम करता हो, लेकिन वह आपको पसंद नहीं है तो उसे जाना होगा। ये स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। सारे फैसले एक या दो व्यक्ति लेंगे तो लोकतंत्र के बचने की गुंजाइश कम ही बचेगी।
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00