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अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगा ओमिक्रॉन का असर: नए ऑर्डर मिलने हुए बंद, पैसा फंसाने से बचने लगे व्यापारी

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 05 Jan 2022 07:17 PM IST

सार

एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन, नोएडा के अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने अमर उजाला को बताया कि ओमिक्रॉन के असर को लेकर व्यापारियों में अभी से आशंका पैदा हो गई है। व्यापारियों को डर है कि ओमिक्रॉन के गंभीर होने पर सरकार बाजार को बंद करने का निर्णय भी ले सकती है। रात्रिकालीन-सप्ताहांत कर्फ्यू की शुरुआत हो चुकी है और होटलों-शादियों पर सरकारी प्रतिबंध अभी से लगाये जाने लगे हैं...
मार्केट
मार्केट - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

ओमिक्रॉन ने अर्थव्यवस्था पर अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। देश में ओमिक्रॉन अभी अपने शुरुआती चरण में है, लेकिन अभी से इसके असर को लेकर व्यापारी आशंकित होने लगे हैं। नोएडा-गाजियाबाद-फरीदाबाद में स्थित फैक्ट्रियों को नए ऑर्डर मिलने में कमी आ गई है, तो पुराने ऑर्डर को भी कैंसल किया जाने लगा है। आने वाले समय में कोरोना के असर को देखते हुए व्यापारी माल खरीदकर पैसा फंसाने से बचने लगे हैं। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि 15 दिनों में अर्थव्यवस्था पर ओमिक्रॉन का बड़ा असर देखने को मिल सकता है।

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एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन, नोएडा के अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने अमर उजाला को बताया कि ओमिक्रॉन के असर को लेकर व्यापारियों में अभी से आशंका पैदा हो गई है। व्यापारियों को डर है कि ओमिक्रॉन के गंभीर होने पर सरकार बाजार को बंद करने का निर्णय भी ले सकती है। रात्रिकालीन-सप्ताहांत कर्फ्यू की शुरुआत हो चुकी है और होटलों-शादियों पर सरकारी प्रतिबंध अभी से लगाये जाने लगे हैं। इससे बाजार में माल की खपत पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि व्यापारी माल खरीदकर अपना पैसा फंसाने से बचना चाहते हैं।


लगभग दस हजार फैक्ट्रियों के संगठन नाहटा के मुताबिक अनेक फैक्ट्रियों को नए ऑर्डर मिलने में कमी आ गई है, तो अनेक फैक्ट्रियों को मिले पुराने ऑर्डर को भी टाल दिया गया है। नोएडा-गाजियाबाद-फरीदाबाद की फैक्ट्रियों में काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारी दिल्ली के आसपास के इलाकों में ही रहते हैं। सप्ताहांत और रात्रिकालीन कर्फ्यू लगने से कर्मचारियों की आवाजाही में परेशानी पैदा होगी और इससे अनेक क्षेत्रों की कंपनियों का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।

कैट के पदाधिकारी सुमित अग्रवाल ने कहा कि ओमिक्रॉन का सबसे पहला असर दिहाड़ी श्रमिकों और ऑटो चालकों जैसे रोज कमाने-खाने वाले लोगों पर दिखना शुरू हो गया है। सप्ताहांत कर्फ्यू से भी श्रमिकों को नुकसान होना तय है। ऐसे में बाजार और व्यापारियों पर दबाव बढ़ गया है। लेकिन वे रात्रिकालीन कर्फ्यू और सप्ताहांत कर्फ्यू पर सरकार के साथ हैं क्योंकि जान से बढ़कर कोई दूसरी चीज नहीं है। कैट ने 11-12 जनवरी को कानपुर में होने वाली अपनी नेशनल काउंसिल की मीटिंग को टाल दिया है।         

तेजी से पटरी पर आ रही थी अर्थव्यवस्था

कोरोना के दूसरे चरण का अर्थव्यवस्था पर काफी गंभीर असर पड़ा था। बेरोजगारी दर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन कोरोना के कमजोर पड़ने के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटी और रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले छह महीने से प्रति माह एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का जीएसटी कलेक्शन किया जा रहा था, तो कृषि और अन्य वस्तुओं के उत्पाद में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही थी। खाद्यान्न उत्पादन में देश रिकॉर्ड बना रहा था, तो कारों के निर्यात में भी देश एतिहासिक प्रदर्शन कर रहा था। हालांकि, इसके बाद भी कुछ क्षेत्र अभी भी कोरोना की दूसरी लहर से निकलने की कोशिश कर रहे थे। ऐसी स्थिति में यदि ओमिक्रॉन की स्थिति गंभीर होती है, तो अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

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