गुजरात: बार-बार क्यों चूक जाते हैं नितिन पटेल? मोदी ने बनाई नए नेताओं की खेप तैयार करने की रणनीति

Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Mon, 13 Sep 2021 05:50 PM IST

सार

गुजरात भाजपा के एक पूर्व वरिष्ठ नेता कहते हैं कि आप समय से पहले और भाग्य से ज्यादा कुछ नहीं पा सकते। वहीं गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में उनके साथ काम कर चुके सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री जनसेवक हैं। उन्हें पता होता है कि दूसरे जन सेवक और जन नेता के साथ कैसा व्यवहार जरूरी है। वह हमेशा नए दृष्टिकोण वाले नेताओं और लोगों को प्रोत्साहित करते हैं...
भूपेंद्र पटेल से मिले नितिन पटेल
भूपेंद्र पटेल से मिले नितिन पटेल - फोटो : ANI
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विस्तार

गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद इस पद के सबसे प्रबल दावेदार उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल थे। लेकिन ताज सजा केंद्रीय गृहमंत्री और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की खास पसंद विजय रूपाणी के सिर। पांच साल गुजर गए। विजय रूपाणी ने अचानक इस्तीफा दिया। भाजपा मुख्यालय के सूत्र बताते हैं कि रूपाणी को इस्तीफा देने के लिए प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने कहा। रूपाणी ने बात मान ली और इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। एक बार फिर नितिन पटेल के पास संभावना आई थी, लेकिन इस बार फिसलकर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के करीबी और पहली बार के विधायक भूपेन्द्र पटेल के पास चली गई।
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नितिन पटेल के हिस्से में एक बार फिर भाजपा के सिपाही की तरह पार्टी की सेवा और जिम्मेदारियों के निर्वहन का विकल्प बचा है। गुजरात भाजपा के एक पूर्व वरिष्ठ नेता कहते हैं कि आप समय से पहले और भाग्य से ज्यादा कुछ नहीं पा सकते। वहीं गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में उनके साथ काम कर चुके सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री जनसेवक हैं। उन्हें पता होता है कि दूसरे जन सेवक और जन नेता के साथ कैसा व्यवहार जरूरी है। वह हमेशा नए दृष्टिकोण वाले नेताओं और लोगों को प्रोत्साहित करते हैं।

केंद्र में भी मोदी का गणित ऐसे ही चलता है

प्रधानमंत्री मोदी सक्रिय राजनीति में एक आयु सीमा को लागू करने के प्रस्ताव को लेकर आए। वह प्रस्ताव लेकर नहीं आए, बल्कि एक दो अपवाद को छोड़कर इसे दृढ़ता से लागू भी किया। हालांकि इस विषय पर भाजपा के नेता चर्चा नहीं करना चाहते, लेकिन राजनीति को जानने समझने वालों को भाजपा के मार्गदर्शक मंडल के दो वरिष्ठ नेताओं का राजनीतिक सन्यास याद करना चाहिए। डा. मुरली मनोहर जोशी की कुछ स्तर पर नाराजगी भी। राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र समेत कई नेताओं का केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा भी। प्रधानमंत्री ने हाल के अपने मंत्रिमंडल विस्तार में भी कई विश्वसनीय माने जाने वाले सहयोगियों को केंद्रीय मंत्रिमंडल से संगठन की तरफ का रास्ता दिखाया। इसमें प्रकाश जावड़ेकर, रविशंकर प्रसाद, रमेश पोखरियाल निशंक, डा. हर्षवर्धन के मंत्रिमंडल से इस्तीफे ने सबको चौंकाया। प्रधानमंत्री के प्रिय थावर चंद गहलोत की मंत्रिमंडल से छुट्टी और कर्नाटक का राज्यपाल बनाना। अश्विन वैष्णव को रेलमंत्री और दूर संचार मंत्री, अनुराग ठाकुर को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री, मनसुख मंडाविया को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय जैसा प्रभार देकर संदेश देने की कोशिश की।

'भाग्य' ने नहीं दिया नितिन पटेल का साथ?

इस बारे में कोई स्पष्ट खुलकर नहीं बोलना चाहता। समझा जाता है कि प्रधानमंत्री की सहमति के बिना भूपेंद्र पटेल का नाम तय नहीं हुआ है। लेकिन राजनीति के गलियारे में दो चर्चा जोर पकड़ रही है। पहली यह कि शांत, सौम्य भूपेंद्र पटेल पाटीदार समाज को साध सकते हैं। दूसरा यह कि भाजपा को गुजरात की राजनीति में एक संतुलन बनाना है। इसमें नितिन पटेल का नाम कुछ कारणों से फिट नहीं बैठ रहा था। वह अंदरूनी राजनीति का भी शिकार बन रहे थे। दबी जुबान से एक चर्चा यह भी है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भावी राजनीति और चुनौतियों को ध्यान में रखकर अपनी सलाह दी है। प्रधानमंत्री के बारे में आम है कि वह संबंधित लोगों की सलाह लेकर ही अपना मन बनाते हैं, लेकिन आखिरी निर्णय की जानकारी कम लोगों को होती है। इसलिए निष्कर्ष पर पहुंचने के पहले भेद खुलना मुश्किल होता है।
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