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Goa Liberation Day: पीएम मोदी बोले- गोवा काफी पहले ही आजाद हो जाता, अगर सरदार पटेल लंबे समय तक जीवित रहते

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 19 Dec 2021 04:23 PM IST
सार

पीएम मोदी ने कहा कि अमृत महोत्सव में देश ने हर एक देशवासी को सत्ता प्रयास का आह्वान किया है। गोवा का मुक्ति संग्राम इस मंत्र का बड़ा उदाहरण है।

पीएम मोदी
पीएम मोदी - फोटो : ANI
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विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को गोवा पहुंचे। गोवा मुक्ति दिवस के अवसर पर उन्होंने पुनर्निमित फोर्ट अगुआड़ा कारागार संग्रहालय, गोवा चिकित्सा महाविद्यालय में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक, न्यू साउथ गोवा जिला अस्पताल, मोपा हवाई अड्डे पर विमानन कौशल विकास केंद्र और डावोरलिम-नावेलिम, मडगांव में गैस इंसुलेटेड उपकेंद्र का उद्घाटन किया। गोवा मुक्ति दिवस हर साल 19 दिसंबर को मनाया जाता है। इस दिन भारतीय सशस्त्र बलों ने 1961 में तटीय राज्य को पुर्तगाली शासन से मुक्त किया था।


उन्होंने कहा कि अगर सरदार वल्लभभाई पटेल कुछ और समय रहते, तो गोवा पुर्तगाली शासन से काफी पहले आजाद हो जाता। नेहरू कैबिनेट में डिप्टी पीएम पटेल का 15 दिसंबर 1950 को निधन हो गया था। उन्हें तत्कालीन निजाम के शासन से महाराष्ट्र में मराठवाड़ा क्षेत्र की मुक्ति का श्रेय दिया जाता है। इस दौरान पीएम ने गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर परिकर को याद किया। उन्होंने कहा कि परिकर न केवल गोवा को विकास की नई ऊंचाई तक पहुंचाया, बल्कि गोवा की क्षमता का भी विस्तार किया। गोवा के लोग कितने ईमानदार, प्रतिभावान और मेहनती होते हैं, देश गोवा के चरित्र को मनोहर जी के भीतर देखता था।


उन्होंने कहा कि मैं कुछ समय पहले इटली और वैटिकन सिटी गया था, वहां मुझे पोप फ्रांसिस से मुलाकात का भी अवसर मिला। मैंने उन्हें भारत आने के लिए आमंत्रित भी किया। तब पोप फ्रांसिस ने कहा था कि ये सबसे बड़ा उपहार है जो आपने मुझे दिया, ये भारत की विविधता, वाइब्रेंट डेमोक्रेसी के प्रति उनका स्नेह है।

उन्होंने कहा कि गोवा मुक्ति विमोचन समिति के सत्याग्रह में 31 सत्याग्रहियों को अपने प्राण गंवाने पड़े थे। आज मैं इस अवसर पर ये भी कहूंगा कि अगर सरदार पटेल साहब कुछ वर्ष और जीवित रहते तो गोवा को अपनी मुक्ति के लिए इतना इंतजार नहीं करना पड़ता।

उन्होंने कहा कि गोवा की धरती को, गोवा के समंदर को प्रकृति का अद्भुत वरदान मिला हुआ है। आज सभी गोवा के लोगों का ये जोश, गोवा की हवाओं में मुक्ति के गौरव को और बढ़ा रहा है। आज आपके चेहरों पर गोवा के गौरवशाली इतिहास का गर्व देखकर मैं भी आपके जितना ही खुश हूं। आनंद में हूं। मुझे बताया गया कि यह जगह बहुत छोटी पड़ गई तो बगल में दो पंडाल बनाए गए और बाकी लोग वहां बैठे हुए हैं। आज गोवा न केवल अपनी मुक्ति की डायमंड जुबली मना रहा है, बल्कि 60 वर्षों की इस यात्रा की स्मृति भी हमारे सामने है। हमारे सामने आज हमारे संघर्ष और बलिदानों की गाथा भी है। 

उन्होंने कहा कि हमने कम समय में एक लंबी दूरी तय की है। सामने जब इतना कुछ गर्व करने के लिए हो तो भविष्य के लिए संकल्प खुद ब खुद बनने लग जाते हैं। एक और सुखद संयोग है कि गोवा की आजादी की यह डायमंड जुबली आजादी के अमृत महोत्सव के साथ मन रही है। इसलिए गोवा के सपने और गोवा के संकल्प आज देश को ऊर्जा दे रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि अमृत महोत्सव में देश ने हर एक देशवासी को सत्ता प्रयास का आह्वान किया है। गोवा का मुक्ति संग्राम इस मंत्र का बड़ा उदाहरण है। अभी मैं आजाद मैदान में शहीद मेमोरियल को देख रहा था। इसे चार हाथों की आकृतियों से आकार दिया गया है। यह प्रतीक है कि कैसे गोवा की मुक्ति के लिए देश के चारों कोनों से हाथ गुंथे हुए थे। आप देखिए गोवा एक ऐसे समय में पुर्तगाल के अधीन गया था, जब देश के दूसरे बड़े संभाग में मुगलों की सल्तनत थी। तबसे सत्ताओं की कितनी उठापटक हुई। लेकिन समय और सत्ताओं की उठापटक के बाद भी न गोवा अपनी भारतीय जड़ों को भूला न ही भारत कभी गोवा को भूला। गोवा मुक्ति का संग्राम ऐसी अमर ज्योति है, जो अटल रही है।

उन्होंने कहा कि देश तो गोवा से पहले आजाद हुआ था। देश के अधिकांश लोगों को अपने अधिकार थे। उनके पास अपने सपनों को जीने का समय था। उनके पास विकल्प था कि वो शासन व्यवस्था के लिए संघर्ष कर सकते थे। पद प्रतिष्ठा ले सकते थे, लेकिन कितने ही सेनानियों ने वो सब छोड़कर गोवा की आजादी के लिए संघर्ष और बलिदान का रास्ता चुना। गोवा के  लोगों ने मुक्ति और स्वराज के लिए आंदोलन को कभी थमने नहीं दिया। उन्होंने भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक आजादी की लौ को जलाए रखा। भारत सिर्फ एक राजनीतिक सत्ताभर नहीं है। भारत मानवता और उसके हितों की रक्षा करने वाला एक विचार है, एक परिवार है। भारत एक ऐसा देश है जहां राष्ट्र सर्वोपरि होता है। जहां एक ही मंत्र होता है राष्ट्र प्रथम। एक ही संकल्प होता है- एक भारत, श्रेष्ठ भारत।

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