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PMC जैसे 24 बैंकों ने की अर्थव्यवस्था पर चोट, एक लाख से ज्यादा हैं देश में सहकारी बैंक

रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Thu, 17 Oct 2019 04:46 PM IST

सार

  • शहरी सहकारी बैंक 1542
  • शेड्यूल बैंक 54
  • नॉन-शेड्यूल बैंक 1488
  • ग्रामीण सहकारी बैंक 96606
  • प्रधान कृषि क्रेडिट सोसायटी 95595
  • ग्रामीण एवं कृषि विकास सहकारी बैंक 601
  • जिला स्तर के सहकारी बैंक 364
  • राज्य स्तर के सहकारी बैंक 33
  • राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास सहकारी बैंक 13
  • मार्च 2017 के आंकड़े, स्रोतः भारतीय रिजर्व बैंक
  • सबसे ज्यादा जिला स्तर के सहकारी बैंकों वाला राज्यः उत्तर प्रदेश
  • सबसे ज्यादा शहरी सहकारी बैंकों वाला शहरः बेंगलुरू (263 बैंक)
पीएमसी बैंक घोटाला
पीएमसी बैंक घोटाला - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

इन दिनों सात राज्यों में फैले पंजाब व महाराष्ट्र सहकारी ( PMC ) बैंक में हुए घोटाले की पूरे देश में चर्चा है। घोटाले की जानकारी रिजर्व बैंक को एक व्हिसलब्लोअर के माध्यम से मिली, जिसके बाद 23 सितंबर को केंद्रीय बैंक ने पीएमसी को अपने नियंत्रण में ले लिया और नगद निकासी की सीमा तय कर दी। यकायक सामने आए घोटाले की वजह से अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है।



इस घटना से एक बार फिर देश की बैंकिंग व्यवस्था को आघात पहुंचा है। ऐसी सूचनाएं प्राप्त हुई हैं कि यह घोटाला करीब 7000 करोड़ रुपये का है। देशभर में इस बैंक की 137 शाखाएं हैं और लगभग 51 हजार सदस्य हैं। इन सदस्यों ने पीएमसी में 11,617 करोड़ रुपये जमा किए हुए हैं।


घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद पता चला कि पीएमसी ने अपने कुल 8800 करोड़ रुपये के कर्ज में से 73 फीसदी सिर्फ एक ही कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ( HDIL ) को दे रखा था।

सहकारी बैंकों द्वारा की गई अनियमितताओं की बदौलत 26 मार्च 2019 को भारतीय रिजर्व बैंक ने शहरी सहकारी बैंकों को सीधे अपने निर्देश के दायरे में ले लिया था। इसी वजह से पीएमसी घोटाले के बाद भी रिजर्व बैंक तुरंत हरकत में आया है।

पीएमसी देश का 24वां ऐसा सहकारी बैंक है, जिसे आरबीआई ने अपने नियंत्रण में लिया है। वहीं देशभर के 26 बैंक इस समय केंद्रीय बैंक के नियंत्रण में हैं। मार्च 2019 तक देश में 1542 शहरी सहकारी बैंक थे जबकि 2018 में इनकी संख्या 1551 थी। यानी एक साल में 9 सहकारी बैंक कम हो गए।

पीएमसी घोटाला क्या है?

24 सितंबर 2019 की सुबह पंजाब एंड महाराष्ट्र सहकारी बैंक (पीएमसीबी) के लाखों ग्राहकों को जिंदगी भर नहीं भूलेगी। इसी दिन बैंक के ग्राहकों को यह जानकारी मिली कि रिजर्व बैंक ने पीएमसीबी को छह महीने के लिए अपने नियंत्रण में ले लिया है। इसका सीधा सा मतलब यह था कि बैंक का प्रबंधन और संचालन छह महीने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के हाथ में रहेगा। इस नियंत्रण का अर्थ यह था कि बैंक से जमा राशि की निकासी, ऋण आदि केंद्रीय बैंक द्वारा तय होगा।

यह पता चलते ही खाताधारक नजदीकी शाखाओं में पहुंचना शुरू हो गए। इस बीच रिजर्व बैंक ने बैंक से नकदी निकालने की सीमा एक हजार रुपये तक सीमित कर दी थी। घबराए खाताधारकों की सहूलियत के लिए जल्द ही रिजर्व बैंक ने निकासी की सीमा को पहले दस हजार फिर 25 हजार रुपये कर दिया।

सहकारी बैंकों की स्थिति

देश में मार्च 2017 तक कुल 98,148 सहकारी बैंक और क्रेडिट सोसायटी थीं। इनमें से 96,606 ग्रामीण सहकारी बैंक व 1542 शहरी सहकारी बैंक थे। 1542 शहरी सहकारी बैंकों में सिर्फ 54 शेड्यूल व 1488 नॉन शेड्यूल बैंक थे। ग्रामीण सहकारी बैंकों में सबसे अधिक 95,595 प्राइमरी कृषि ऋण सोसायटी हैं।

देश में सहकारी बैंक और क्रेडिट सोसायटी की संख्या

शहरी सहकारी बैंक 1542
* शेड्यूल बैंक 54
* नॉन-शेड्यूल बैंक 1488


ग्रामीण सहकारी बैंक 96606
* प्रधान कृषि क्रेडिट सोसायटी 95595
* ग्रामीण एवं कृषि विकास सहकारी बैंक 601

* जिला स्तर के सहकारी बैंक 364
* राज्य स्तर के सहकारी बैंक 33
* राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास सहकारी बैंक 13
* सबसे ज्यादा जिला स्तर के सहकारी बैंकों वाला राज्यः उत्तर प्रदेश
* सबसे ज्यादा शहरी सहकारी बैंकों वाला शहरः बेंगलुरू (263 बैंक)

बैंकों की गड़बड़ियां

आर्थिक समाचारों की वेबसाइट्स में प्रकाशित अलग-अलग रिपोर्ट के आकलन से यह पता चलता है कि देश में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के बैंक घोटाले हो चुके हैं। बैंकों में धोखाधड़ी के 92 प्रतिशत मामले ऋण से संबंधित होते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने धोखाधड़ी से संबंधित जो सूचनाएं संकलित की हैं उसके अनुसार वित्तीय वर्ष 2018-19 में देश में कुल 6800 से अधिक धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। इनमें बैंकों को 71500 करोड़ रुपये का चूना लगा। यहां हम आपको महाराष्ट्र के कुछ सहकारी बैंकों के कारनामों के बारे में बता रहे हैंः

महाराष्ट्र सहकारी बैंक: 25000 करोड़ की गड़बड़ी

एक जनवरी 2007 से 31 मार्च 2017 के बीच लगभग 25000 करोड़ रुपये का घोटाला किए जाने का खुलासा हुआ था। इस मामले में बैंक के 70 पूर्व अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज की गई थी। बाम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा से इस मामले में कुल 75 लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे।

माधवपुरा सहकारी बैंक: 45000 लोग परेशान

गुजरात स्थित माधवपुरा मर्चेंटाइल सहकारी बैंक में वर्ष 2001 में लगभग 1200 करोड़ रुपये के घोटाले का पता चला था। इस बैंक में 45000 ग्राहकों का पैसा एक साल तक फंसा था। जून 2012 में भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक का लाइसेंस निरस्त कर दिया था।

समता सहकारी बैंक: 145 करोड़ का घोटाला

3-4 अगस्त 2006 को आरबीआई ने महाराष्ट्र के समता सहकारी बैंक के लेनदेन पर पाबंदी लगा दी थी। बैंक में 145 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ था।

और भी हैं बैंक घोटाले

पंजाब नेशनल बैंक घोटाला: 11,400 हजार करोड़ का पीएनबी घोटाला देश का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला है। इसका मुख्य आरोपी नीरव मोदी है जो देश छोड़कर भाग गए हैं। इसमें नीरव का मामा मेहुल चौकसी भी शामिल है।
इलाहाबाद बैंक घोटाला: पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) द्वारा जारी साख पत्रों के आधार पर हुए 11,400 करोड़ रुपये के घोटाले में इलाहाबाद बैंक का भी करीब 2,000 करोड़ रुपया फंसा है। इसके अलावा देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने भी 1,360 करोड़ रुपये का कर्ज दिया है।

* मार्च 2017 के आंकड़े, स्रोतः भारतीय रिजर्व बैंक
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