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AIR Pollution: PM 2.5 प्रदूषण में सबसे ज्यादा वृद्धि वाले 20 में से 18 शहर भारत के, AHEI की रिपोर्ट में खुलासा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 17 Aug 2022 05:07 PM IST
सार

अमेरिका के शोध संगठन हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट (एचईआई) द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में प्रति एक लाख आबादी पर दिल्ली में 106 और कोलकाता में 99 लोगों की मौत हुईं थीं। ये मौतें पीएम 2.5 प्रदूषण के चलते हुईं थीं।

वायु प्रदूषण
वायु प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

2010 से 2019 तक पीएम 2.5 में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी वाले 20 शहरों में से 18 भारत के हैं। अमेरिका स्थित शोध संगठन हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट (एचईआई) ने अपनी रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है। एचईआई ने दुनिया भर के 7,000 से अधिक शहरों पर अध्ययन के बाद बुधवार अपनी रिपोर्ट जारी की है। वायु प्रदूषण और वैश्विक स्वास्थ्य प्रभावों के व्यापक और विस्तृत विश्लेषण के आधार पर ये खुलासा किया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों में दिल्ली में पीएम 2.5 का औसत स्तर सबसे ज्यादा है।



पीएम 2.5 के कारण 2019 में दुनिया भर में शहरों में हुईं 1.7 मिलियन मौतें 
'एयर क्वालिटी एंड हेल्थ इन सिटीज' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में बताया गया है कि विश्लेषण में शामिल दुनिया भर के 7,239 शहरों में PM2.5 प्रदूषण के कारण 2019 में 1.7 मिलियन मौतें हुईं। इसके अलावा एशिया, अफ्रीका और पूर्वी और मध्य यूरोप के शहरों में स्वास्थ्य पर इसका सबसे ज्यादा असर देखा गया है। 


भारत और इंडोनेशिया में पीएम 2.5 प्रदूषण में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी 
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत और इंडोनेशिया में पीएम 2.5 प्रदूषण में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है, वहीं चीन में सबसे ज्यादा सुधार हुआ है। अध्ययन में शामिल 7,239 शहरों में से भारत के ऐसे 18 शहर हैं, जहां 2010 से 2019 तक पीएम 2.5 प्रदूषण में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। इसके अलावा दो शहर इंडोनेशिया केहैं। इसके अलावा 2010 से 2019 तक पीएम2.5 प्रदूषण में सबसे ज्यादा कमी वाले 20 शहर चीन के हैं। 

शोध संगठन हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट (एचईआई) ने इस अध्ययन के लिए 2010 से 2019 तक के डेटा का अध्ययन किया है। दो सबसे हानिकारक प्रदूषकों फाइन पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) को केंद्र बनाकर ये विश्लेषण किया गया। 

दिल्ली और कोलकाता टॉप टेन में
इस अध्ययन में प्रत्येक क्षेत्र के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों का भी विश्लेषण किया गया है। इसमें 21 क्षेत्रों के 103 शहर शामिल हैं।  सबसे ज्यादा आबादी वाले ऐसे शहरों जहां 2019 में PM2.5 प्रदूषण के कारण सबसे ज्यादा लोग बीमार हुए उनमें शहरों में दिल्ली और कोलकाता शीर्ष 10 में शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सबसे ज्यादा पीएम 2.5 एक्सपोजर वाले 20 शहरों में भारत, नाइजीरिया, पेरू और बांग्लादेश के शहर शामिल हैं। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि कम और मध्यम आय वाले देशों में स्थित शहरों में पीएम 2.5 प्रदूषण का जोखिम अधिक होता है। वहीं, उच्च आय वाले शहरों के साथ-साथ निम्न और मध्यम आय वाले देशों में NO2 का जोखिम अधिक होता है। रिपोर्ट में निम्न और मध्यम आय वाले देशों में डेटा अंतराल को भी बताया गया है, जो वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों को समझने का एक महत्वपूर्ण पहलू है। WHO के वायु गुणवत्ता डेटाबेस के अनुसार, इस समय दुनिया भर के तमाम देशों में से केवल 117 देशों के पास PM2.5 को ट्रैक करने के लिए तंत्र है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में, वायु प्रदूषण नौ मौतों में से एक के लिए जिम्मेदार है। इसमें यह भी कहा गया है कि  2019 में 6.7 मिलियन मौतें वायु प्रदूषण के कारण हुईं थीं। वायु प्रदूषण का असर, विशेष रूप से युवाओं, बुजुर्गों और पुरानी सांस और हृदय रोगों से पीड़ित लोगों पर होता है। 

PM2.5 प्रदूषण के कारण दिल्ली में प्रति लाख जनसंख्या पर 106 मौतें
अमेरिका के शोध संगठन हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट (एचईआई) द्वारा पेश की गई इस नई रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली और कोलकाता में 2019 में प्रति एक लाख आबादी पर 106 और 99 लोगों की मौत हुईं थीं। ये मौतें पीएम 2.5 प्रदूषण के चलते हुईं थीं।  2019 में दिल्ली में 110 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की वार्षिक औसत से पीएम 2.5 सघनता दर्ज की गई थी। ये दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों में सबसे अधिक है। इसके बाद कोलकाता में 84 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर सघनता दर्ज की गई थी।  

क्या होता है पीएम 2.5?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक पीएम 2.5, प्रदूषक कणों की उस श्रेणी को संदर्भित करता है जिसका आकार 2.5 माइक्रोन के करीब का होता है। मुख्य रूप से जंगल की आग, बिजली संयंत्रों और औद्योगिक प्रक्रियाओं के कारण इसका स्तर बढ़ जाता है।  पीएम 2.5  के बढ़ने के कारण धुंध छाने और साफ न दिखाई देने के साथ कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। यह कण आसानी से सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश करके गले में खराश, जलन और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। 

इन अंगों को कर सकता है प्रभावित
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक पीएम 2.5 के बढ़े हुए स्तर के संपर्क में रहने के कारण आंख, नाक, गले, फेफड़े और हृदय को गंभीर खतरा हो सकता है। आंखों में जलन, आंखों से पानी आना, सांस लेने में दिक्कत, खांसी और त्वचा से संबंधित समस्याओं का खतरा सबसे अधिक होता है। पीएम 2.5 से सुरक्षित रहने के लिए सभी लोगों को बाहर जाते समय अच्छे और कसे हुए मास्क पहनने के साथ आंखों पर चश्मा लगाकर रखना चाहिए। 

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