रोहिणी कोर्ट में शूटआउट: भारी पड़ी वकीलों की दबंगई, सुप्रीम कोर्ट से सीखते तो न होता जितेंद्र गोगी हत्याकांड

Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Fri, 24 Sep 2021 06:15 PM IST

सार

रोहिणी जिला अदालत के एक कर्मचारी के अनुसार अदालतों की सुरक्षा पर वकीलों की 'दबंगई' भारी पड़ी है। अदालतों के वकील अदालत परिसर में प्रवेश के समय होने वाली चेकिंग को अपनी शान के विरूद्ध समझते हैं। चेकिंग करने वाले कर्मचारियों से अकसर उनकी बहस हो जाती है। यही कारण है कि सुरक्षा कर्मचारी भी वकीलों को ठीक से चेक करने से बचते हैं...
दिल्ली: रोहिणी कोर्ट गैंगवार
दिल्ली: रोहिणी कोर्ट गैंगवार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

देश की राजधानी दिल्ली की एक जिला अदालत में जज के सामने 35 से 40 राउंड गोलीबारी हुई। इस गोलीबारी में छह लाख का ईनामी बदमाश जितेंद्र गोगी मारा गया, तो पुलिस ने उसके हमलावरों को भी मार गिराया। लेकिन जिस तरह दिल्ली की अदालत में खुलेआम फायरिंग हुई है, उससे राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस यूनिट की योग्यता पर भी गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़े हो गए हैं। हालांकि, इसे वकीलों की दबंगई का परिणाम भी माना जा रहा है क्योंकि वकील सुरक्षा जांच को अपनी शान के खिलाफ समझते हैं और जांच से बचते हैं और आज वकीलों के वेश में आए हमलावरों ने जितेंद्र गोगी को अदालत में जज के सामने भून डाला।
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यह घटना इस मामले में और ज्यादा गंभीर है कि इस समय दिल्ली की सुरक्षा हाई अलर्ट पर है। चंद दिनों पहले ही एक आतंकी गुट के छह आतंकियों को सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार किया गया था। बताया गया था कि ये आतंकी त्योहारों के सीजन में सार्वजनिक स्थलों को निशाना बनाने वाले हैं। पुलिस ने आतंकियों के अन्य मॉड्यूल के होने की संभावना को लेकर हाई अलर्ट जारी किया था। ऐसे हाई अलर्ट के बीच एक अदालत में इस तरह का हमला होना सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


रोहिणी जिला अदालत के एक कर्मचारी के अनुसार अदालतों की सुरक्षा पर वकीलों की 'दबंगई' भारी पड़ी है। अदालतों के वकील अदालत परिसर में प्रवेश के समय होने वाली चेकिंग को अपनी शान के विरूद्ध समझते हैं। चेकिंग करने वाले कर्मचारियों से अकसर उनकी बहस हो जाती है। यही कारण है कि सुरक्षा कर्मचारी भी वकीलों को ठीक से चेक करने से बचते हैं। आज वकीलों की यही दबंगई अदालत की सुरक्षा पर भारी पड़ी और तीन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

रोहिणी कोर्ट में इसके पहले 2015 में भी इसी तरह का एक हमला किया गया था। उस मामले में भी हमलावर ने जज के सामने अपने दुश्मन को गोली मार दी थी। उस समय भी रोहिणी की अदालत की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए थे, लेकिन उसके बाद यह बात आई गई हो गई।

इसके पहले 2011 में सज्जन कुमार को दिल्ली की एक जिला अदालत में पेश किए जाने के दौरान उड़ाने की साजिश रची गई थी। हालांकि, पुलिस ने समय रहते इस मामले में खालिस्तानी गैंग के कुछ आतंकियों को आरडीएक्स के साथ अंबाला से गिरफ्तार कर लिया था।
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