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Rift in SP alliance: सपा की चिट्ठी आते ही राजभर बोले- जय BSP, जानें अखिलेश के गठबंधन का आगे क्या होगा?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जयदेव सिंह Updated Sat, 23 Jul 2022 05:34 PM IST
सार

letters to Shivpal Singh Yadav and OP Rajbhar: SP ने ओपी राजभर और शिवपाल यादव को खुली चिट्ठी लिखकर कहा कि अगर आप को भी लगता है कि कहीं ज्यादा सम्मान मिलेगा तो आप वहां जाने के लिए स्वतंत्र हैं। 

सपा और सुभासपा के रास्ते हुए अलग।
सपा और सुभासपा के रास्ते हुए अलग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

उत्तर प्रदेश की राजनीति में शनिवार को बड़ी उठापटक हुई। समाजवादी पार्टी (SP) ने गठबंधन सहयोगियों को दो खुली चिट्ठियां लिखीं। एक चिट्ठी ओम प्रकाश राजभर के नाम और दूसरी शिवपाल यादव के नाम पर थी। ये दोनों ही नेता पिछले कई दिनों से SP और SP प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते रहे हैं। दोनों ने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान सपा गठबंधन से अलग जाकर NDA उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन किया था। चिट्ठी में दोनों से कहा गया कि अगर आप चाहें तो अपना रास्ता अलग कर सकते हैं।   



SP की चिट्ठी में क्या लिखा है? चिट्ठी पर ओमप्रकाश राजभर का क्या कहना है? SP गठबंधन का आगे क्या होगा? आइये जानते हैं…

SP की चिट्ठी में क्या-क्या लिखा है? 

समाजवादी पार्टी की ओर से ओम प्रकाश राजभर के नाम खुली चिट्ठी लिखी गई है।  राजभर को संबोधित करते हुए लिखा गया, ‘ओम प्रकाश राजभर जी, समाजवादी पार्टी लगातार भाजपा के खिलाफ लड़ रही है। आपका भाजपा के साथ गठजोड़ है और लगातार भाजपा को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। अगर आपको लगता है, कहीं ज्यादा सम्मान मिलेगा तो वहां जाने के लिए आप स्वतंत्र हैं।’  वहीं, शिवपाल यादव को लिखी चिट्ठी में कहा गया है, ‘शिवपाल सिंह यादव जी, अगर आपको लगता है, कहीं ज्यादा सम्मान मिलेगा तो वहां जाने के लिए आप स्वतंत्र हैं।’ चिट्ठी सामने आते ही ओम प्रकाश राजभर ने भी अपने अंदाज में कहा, यह तलाक हमें मंजूर है। 

अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर
अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर - फोटो : अमर उजाला

चिट्ठी पर ओमप्रकाश राजभर का क्या कहना है? 

SP की चिट्ठी सामने आते ही ओमप्रकाश राजभर का बयान आया। राजभर ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान जब पहले चरण के टिकट बंटे तभी मैंंने अखिलेश यादव से कहा कि अति पिछड़ों को टिकट दीजिए। उस वक्त अखिलेश ने कहा दूसरे चरण में देंगे। दूसरे चरण में भी ऐसा नहीं किया गया। तभी मैंने कह दिया था SP गठबंधन चुनाव नहीं जीत सकता। क्योंकि जब अति पिछड़ों को टिकट नहीं मिलेगा तो वो आपको वोट क्यों देंगे। वहीं, ओमप्रकाश राजभर के बेटे ने लिखा, ‘खुदकुशी करती है आपस की सियासत कैसे, हमने ये फिल्म नई खूब इधर देखी है, धन्यवाद है समाजवादी पार्टी, अखिलेश यादव जी को... फिर मिलेंगे चलते-चलते।’ 

क्या अब राजभर अब किसके साथ जा सकते हैं? 

SP की चिट्ठी आते ही राजभर ने कहा की वह  BSP के साथ जाएंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या आपकी मायावती से बात हो गई है तो उन्होंने कहा कि बसपा के नेताओं के साथ बातचीत जारी है। जल्द मायावती से भी बात हो जाएगी। वहीं, जब उनसे भाजपा के साथ बढ़ती नजदीकियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा पहले BSP से बात हो जाने दीजिए। हालांकि, उन्होंने फिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की। 

राजभर भले BSP के साथ जाने की बात कर रहे हैं। इसके बावजूद कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि राजभर भले BSP के साथ जाने की बात कर रहे हैं, लेकिन उनका फैसला क्या होगा ये कहना जल्दबाजी होगी। बीते दिनों में उनकी करीबी भाजपा के साथ ज्यादा देखी गई है। राष्ट्रपति चुनाव में भी राजभर की पार्टी ने BJP उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन किया था। 

मतदान करने के बाद शिवपाल सिंह यादव।
मतदान करने के बाद शिवपाल सिंह यादव। - फोटो : amar ujala

शिवपाल यादव ने क्या कहा है? 

सपा की ओर से चिट्ठी जारी होने के बाद शिवपाल यादव की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि शिवपाल के पास दो रास्ते हैं। पहला वो सपा विधायक रहते हुए अखिलेश पर हमले करते रहें। दूसरा 2017 की तरह सपा का विधायक होते हुए भी अपनी पार्टी को सपा के खिलाफ मजबूत करने का एलान कर दें। 

तो क्या सपा गठबंधन पूरी तरह बिखर जाएगा? 
चुनाव नतीजे आने के बाद अखिलेश यादव के ज्यादातर सहयोगी उनका साथ छोड़ चुके हैं। सबसे पहले महान दल के केशव देव मौर्य गठबंधन से अलग हुए। उनके बाद संजय चौहान ने भी अपना रास्ता अलग कर लिया। अब ओम प्रकाश राजभर भी अलग रास्ते जा सकते हैं। ऐसे में अखिलेश के गठबंधन में अब जयंत चौधरी की पार्टी रालोद ही रह जाएगी। 

एक साथ मंच पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर।
एक साथ मंच पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर। - फोटो : अमर उजाला
सपा मुखिया पर  लगातार हमले कर रहे थे ओम प्रकाश राजभर
 ओम प्रकाश राजभर पिछले कुछ दिनों से अखिलेश यादव पर लगातार निशाना साध रहे थे। चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही वह सपा प्रमुख पर लगातार हमलावर होते रहे हैं। विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के दौरान भी राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसा था। ओम प्रकाश राजभर चाहते थे कि विधान परिषद की चार सीटों में कम से कम एक सीट उन्हें मिले, जिससे उनका बेटा सदन में पहुंच सके। लेकिन अखिलेश यादव ने इंकार कर दिया। इससे नाराज राजभर ने तंज कसते हुए कहा था कि 34 सीट पर चुनाव लड़कर आठ जीतने वाले को राज्यसभा का इनाम मिला और 14 सीट लेकर छह जीतने वाले की अनदेखी हुई। 

आजमगढ़ और रामपुर में हार के लिए ठहराया था जिम्मेदार
आजमगढ़, रामपुर लोकसभा उपचुनाव हारने के बाद भी राजभर ने अखिलेश पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, 'अगर अखिलेश आजमगढ़ गए होते तो चुनाव जीत जाते। हम लोग धूप में प्रचार कर रहे थे और वे एसी में बैठे रहे।' इस पर बुधवार को अखिलेश ने कहा कि सपा को किसी की सलाह की जरूरत नहीं है। कई बार राजनीति पर्दे के पीछे से चलती है।

अखिलेश यादव और जयंत चौधरी।
अखिलेश यादव और जयंत चौधरी। - फोटो : सोशल मीडिया
चुनाव के बाद ही क्यों दूर हो जाते हैं सपा गठबंधन के साथी?
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी खुद को नए सिरे से तैयार करने की कोशिश करती है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह चाहती है कि अगले चुनाव तक वह अकेले दम पर फिर से लड़ सके। इसलिए नतीजा आने के बाद ही वह गठबंधन की पार्टियों को नजरअंदाज करना शुरू कर देती है। खासतौर पर उन दलों को जिनके साथ रहने से उन्हें नुकसान पहुंचने का डर होता है। इस बार भी वही हो रहा है। सपा ने रालोद के साथ अच्छे रिश्ते बरकरार रखे हैं। क्योंकि अखिलेश जानते हैं कि पश्चिम यूपी में बगैर रालोद के वह कुछ नहीं कर सकते हैं। वहीं, पूर्वांचल में राजभर की पकड़ को कमजोर मानते हैं। वह जानते हैं कि पूर्वांचल में सपा अकेले दम पर मजबूत हो सकती है। इसलिए उन्होंने राजभर को किनारे कर दिया।
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