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Supreme Court: दिल्ली के छावला दुष्कर्म केस में शीर्ष कोर्ट के फैसले को चुनौती, पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की अहम खबर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 07 Dec 2022 11:14 PM IST
Supreme Court
Supreme Court - फोटो : ANI

सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने सुप्रीम कोर्ट में एक समीक्षा याचिका (रिव्यू पिटिशन) दायर की है। मामले में दिल्ली पुलिस ने भी याचिका दाखिल कर दी है। याचिका में 2012 में दिल्ली के छावला इलाके में 19 वर्षीय एक महिला के साथ कथित रूप से दुष्कर्म और हत्या के मामले में दिल्ली की एक कोर्ट द्वारा मौत की सजा पाने वाले तीन लोगों को बरी करने के फैसले को चुनौती दी गई है।



छावला गैंगरेप-हत्या में सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर के शुरुआती सप्ताह में आरोपियों को रिहा करने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाया पीड़िता का क्षत-विक्षत शव घटना के तीन दिन के बाद बरामद किया गया था। शरीर पर गहरे जख्म मिले थे। इस घटना पर निचली अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराया था।


छावला इलाके में साल 2012 में घटना को अंजाम दिया गया था जिसने हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थी। तीन युवकों ने इलाके की रहने वाली 19 साल की युवती को कार से अगवा कर लिया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद उसकी आंखों में तेजाब डालकर मार डाला। घटना 14 फरवरी 2012 की है।

सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
जल्लीकट्टू पर सुप्रीम कोर्ट ने कही यह बात
‘जल्लीकट्टू’ की अनुमति देने वाले तमिलनाडु के एक कानून को दी गई चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि यदि शीर्ष अदालत उसके समक्ष पेश की गई तस्वीरों के आधार पर कोई धारणा बनाता है तो यह बहुत खतरनाक स्थिति होगी। सांड को काबू करने के इस खेल के दौरान बरती जाने वाली कथित निर्ममता को दिखाने के लिए कुछ याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष कोर्ट के सामने ये तस्वीरें पेश की हैं। जल्लीकट्टू खेल का आयोजन फसल कटाई के उत्सव पोंगल के अवसर पर तमिलनाडु में किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
CAT में 51 सदस्य नियुक्त किए, कोर्ट ने बाकी 19 सीटें भरने को कहा
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में 51 रिक्तियों को भर दिया है और 47 सदस्य पहले ही पदभार ग्रहण कर चुके हैं। केंद्र के वकील ने मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ को बताया कि सरकार के पास कोई सिफारिश लंबित नहीं है। जब कोर्ट ने वकील से उन 19 रिक्तियों के बारे में पूछा जो अभी भी कैट की बेंचों में मौजूद हैं, तो उसे बताया गया कि सरकार ने सीजेआई से खोज-सह-चयन समिति के प्रमुख के लिए एक न्यायाधीश नियुक्त करने का अनुरोध किया है, ताकि इन्हें भरा जा सके।

केंद्र ने कहा कि हमारे पास जो कुछ भी था, हमने उसे मंजूरी दे दी है। हमने 51 सदस्यों के नामों को मंजूरी दे दी है, जिसमें 26 न्यायिक सदस्य शामिल हैं। 51 सदस्यों में से 47 ने पदभार ग्रहण कर लिया है, जबकि चार को अभी अपना कार्यभार संभालना है। अब मुख्य न्यायाधीश को खोज सह चयन समिति में उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश की नियुक्ति करनी है, जिसके बाद एक बैठक होगी और 19 सीटों के लिए नई सिफारिश की जाएगी। इसके बाद उनकी नियुक्ति की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani
‘एससी’ के दर्जे पर केंद्र ने कोर्ट से कही यह बात
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि ‘संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 किसी ‘असंवैधानिकता’ से ग्रसित नहीं है। ईसाई और इस्लाम को इस वजह से बाहर रखा गया कि छुआछूत की उत्पीड़क व्यवस्था इन दोनों धर्मों में मौजूद नहीं थी। समय-समय पर संशोधित किए गए संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश,1950 में कहा गया है कि हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म को छोड़ कर अन्य धर्म मानने वाले किसी व्यक्ति को अनुसूचित जाति (एससी) का सदस्य नहीं माना जाएगा। सरकार ने कहा कि उसने न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट स्वीकार नहीं की है, जिसमें दलित ईसाईयों और दलित मुस्लिमों को अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल करने की सिफारिश की गई थी क्योंकि यह त्रुटिपूर्ण थी। सरकार ने एक याचिका पर शीर्ष न्यायालय में दाखिल एक जवाब में इन मुद्दों को रेखांकित किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश,1950 भेदभावपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) और 15 (धर्म, नस्ल, जाति आदि के आधार पर भेदभाव का निषेध) का उल्लंघन करता है।

Supreme Court
Supreme Court - फोटो : ANI
मोबाइल एप 2.0 लॉन्च
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने मोबाइल एप्लिकेशन का एंड्रायड संस्करण 2.0 लांच किया। इससे कानूनी और विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के नोडल अधिकारियों को अदालती कार्यवाही को वास्तविक समय में देखने की सुविधा मिलेगी। भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है, जबकि आईओएस संस्करण एक सप्ताह के समय में उपलब्ध होगा। सीजेआई ने कहा कि एंड्रॉइड संस्करण 2.0 उपलब्ध है, जबकि आईओएस एक सप्ताह के समय में उपलब्ध होगा। वकीलों और अधिवक्ताओं के रिकॉर्ड के अलावा, आवेदन केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के सभी कानून अधिकारियों और नोडल अधिकारियों को विशेष वास्तविक समय पहुंच प्रदान करेगा। वे इस एप्लिकेशन के माध्यम से लॉग इन करके अदालती कार्यवाही देख सकते हैं।
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