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SAAB: स्वीडिश रक्षा उत्पाद कंपनी साब भारत में बनाएगी ये घातक हथियार, 2024 से उत्पादन शुरू होने की उम्मीद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 27 Sep 2022 06:37 PM IST
सार

स्वीडिश रक्षा उत्पाद कंपनी साब भारत में अपने कार्ल-गुस्ताफ एम4 हथियार प्रणाली का निर्माण करेगी। कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि भारत में इसका उत्पादन 2024 में शुरू होने की उम्मीद है। 
 

स्वीडन की हथियार बनाने वाली कंपनी साब
स्वीडन की हथियार बनाने वाली कंपनी साब - फोटो : ANI
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विस्तार

स्वीडन की जानी मानी रक्षा निर्माता कंपनी साब भारत में अपनी इकाई साब एफवीवी इंडिया खोलेगी। इस इकाई में कार्ल गुस्ताफ एम-4 हथियार प्रणाली बनाई जाएगी। कंपनी के शीर्ष कार्यकारी अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि कंपनी अपना उत्पादन बढ़ाना चाहती है। कार्ल-गुस्ताफ एम4 एक रिकॉइललेस राइफल है जिसे भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑर्डर किया है।



सीनियर वाइस प्रेजिडेंट गोरगेन जॉनसन ने न्यूज कॉन्फ्रेंस में कहा, 1500 मीटर दूरी पर दुश्मन को निशाना बनाने में सक्षम इस हथियार प्रणाली का भारत में उत्पादन 2024 से शुरू होगा। जॉनसन ने हालांकि यह बताने से साफ मना कर दिया कि कंपनी भारत में खुलने वाली इकाई में कितना निवेश करेगी। 


नई कंपनी उत्पादन के साथ साथ दुनिया भर में इस हथियार को इस्तेमाल करने वालों को भी सहयोग करेगी। जॉनसन ने कहा, अब तक हमने किसी और देश में ऐसा नहीं किया है। यूक्रेन संकट के बाद इस हथियार की मांग बढ़ी है। इसका इस्तेमाल टैंक्स के सामने किया जा सकता है। ज्यादा से ज्यादा कंपनियां चाहेंगी कि उनके पास टैंक रोधी क्षमता हो।

एलएसी की अग्रिम चौकियों पर तैनात जवानों के पास है यह हथियार
चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारतीय सेना की लगभग सभी अग्रिम चौकियों के पास इस हथियार प्रणाली का पिछला संस्करण है।

मेक इन इंडिया मुहिम में होगी शामिल
जॉनसन ने कहा, साब भारत की मेक इन इंडिया मुहिम में शामिल होगी। अपनी इस खास हथियार प्रणाली के लिए हम भारतीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ साझेदारी करेंगे। हमारी भारत की नई इकाई मेक इन इंडिया मुहिम में पूरा सहयोग करेगी। उन्होंने कहा, हमें बेहद खुशी है कि विश्व स्तरीय रक्षा उद्योग विकसित करने के भारत के लक्ष्य में हम योगदान करने में सक्षम हैं।

हम भारतीय सशस्त्र बलों को भारत में निर्मित हमारे कार्ल-गुस्ताफ एम4 की पेशकश करने पर गर्व करते हैं। अब तक आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) साब के साथ मिलकर 1200 मीटर तक मार करने वाली कार्ल गुस्ताफ एम3 राइफल बना रहा था।

एक छत के नीचे तैयार होगा रॉकेट इंजन
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कर्नाटक में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लि. (एचएएल) की एक इंटीग्रेटेड क्रायोजेनिक इंजन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी (आईसीएमएफ) का उद्घाटन किया। यहां एक छत के नीचे इसरो के लिए संपूर्ण रॉकेट इंजन का निर्माण होगा। मुर्मू ने इस दौरान वैज्ञानिकों को सामाजिक जिम्मेदारी के पथ का अनुसरण करने की नसीहत दी।
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इसरो के लिए मार्च 2023 तक बनने लगेंगे इंजन
एचएएल के बंगलूरू मुख्यालय ने कहा, प्री-प्रोडक्शन गतिविधियां जिनमें प्रक्रिया की तैयारी, गुणवत्ता की योजना व चित्र शामिल है। यहां मार्च 2023 तक इंजन बनाकर देना शुरू हो जाएगा। एचएएल का एयरोस्पेस डिवीजन ध्रुवीय उपग्रह लॉन्च वाहन (पीएसएलवी), जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च वाहन (जीएसएलवी एमके-द्वितीय), जीएसएलवी एमके-3 और स्टेज जीएसएलवी एमके-2 के तरल प्रणोदक टैंक और लॉन्च वाहन संरचनाएं बनाता है।

गिनती के देशों को है महारत
क्रायोजेनिक इंजन की जटिल प्रकृति के कारण अब तक सिर्फ अमेरिका, फ्रांस, जापान, चीन और रूस ने ही क्रायोजेनिक तकनीक में महारत हासिल की है। 5 जनवरी, 2014 को भारत ने क्रायोजेनिक इंजन के साथ जीएसएलवी-डी5 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसके साथ ही क्रायोजेनिक इंजन विकसित करने वाला  छठा देश बन गया। भविष्य में अंतरिक्ष की खोज ज्यादातर क्रायोजेनिक तकनीक पर निर्भर है।

घरेलू उद्योगों से 85,000 करोड़ के रक्षा उपकरणों की होगी खरीद
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा उत्पादकों से अपील की कि यह समय बिना थके, तेज गति से आगे बढ़ने का है। उन्होंने घरेलू उत्पादन को सरकार की प्राथमिकता बताते कहा, भारत ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में 2025 तक 1.75 लाख करोड़ के टर्नओवर का लक्ष्य रखा है। 

सिंह ने कहा, रक्षा उत्पादन में लगे घरेलू उद्योगों के सहयोग के उद्देश्य से सरकार ने इस साल 85,000 करोड़ की खरीद का बजट निर्धारित किया है। उन्होंने कहा, रक्षा मंत्रालय ने 309 उपकरणों की तीन सूची जारी की हैं, जिसका आयात नहीं किया जाएगा। सोसायटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफेक्चरर्स की सालाना बैठक में कहा, पिछले वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लगभग 8,400 करोड़ रुपये रहा।

डिफेंस एक्सपो की तैयारियों की समीक्षा
रक्षा मंत्री ने डिफेंस एक्सपो 2022 की तैयारियों की समीक्षा की। 18 से 22 अक्तूबर के बीच गुजरात के गांधीनगर में आयोजित होने वाला डिफेंस एक्सपो का 12 वां संस्करण अब तक का सबसे बड़ा संस्करण होगा, क्योंकि मंगलवार तक इस आयोजन के लिए रिकॉर्ड 1,136 कंपनियों ने पंजीकरण कर लिया है।

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