सीबीआई/ईडी प्रमुखों का कार्यकाल: 'बहुमत के बाहुबली' और 'शी जिनपिंग' का नाम लेकर विपक्ष ने निकाली भड़ास 

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 15 Nov 2021 05:38 PM IST

सार

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि जब सभी को मालूम है कि संसद का सत्र शुरु होने वाला है तो ऐसे में केंद्र सरकार को केंद्रीय जांच एजेंसियों के प्रमुख का कार्यकाल बढ़ाने के लिए अध्यादेश लाने की जरुरत क्यों पड़ी।
अधीर रंजन चौधरी (फाइल फोटो)
अधीर रंजन चौधरी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार

केंद्रीय जांच एजेंसी 'सीबीआई' और प्रवर्तन निदेशालय 'ईडी' के निदेशकों का कार्यकाल पांच साल तक बढ़ाने के लिए जैसे ही केंद्र के अध्यादेश की खबर बाहर आई तो विपक्षी नेताओं ने सरकार पर हमला बोल दिया। किसी नेता ने केंद्र सरकार और उसके मंत्रियों को 'बहुमत के बाहुबली' कहा तो कोई केंद्र सरकार को याद दिलाने लगा कि स्वर्गीय अरुण जेटली ने कहा था कि लोकतंत्र में 'अनिर्वाचित' लोगों यानी नौकरशाहों के अत्याचार को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। 
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दोनों केंद्रीय एजेंसियों के प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ाना विपक्षी नेताओं को इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने 'शी जिनपिंग' से प्रधानमंत्री की तुलना कर डाली। कांग्रेस पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि कल को प्रधानमंत्री मोदी अगर अपना कार्यकाल दस साल कर लेंगे तो क्या होगा। वे कह सकते हैं कि मैं देश के हित में और इसकी प्रगति के लिए अपना कार्यकाल बढ़ा रहा हूं। ऐसा मैने शी जिनपिंग से सीखा है। ये संभव हो सकता है कि क्योंकि वे खुद को 'बहुमत के बाहुबली' समझते हैं। 


केंद्र सरकार की मंशा 'हड़बड़ी' वाली है: चौधरी  
लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि जब सभी को मालूम है कि संसद का सत्र शुरु होने वाला है तो ऐसे में केंद्र सरकार को केंद्रीय जांच एजेंसियों के प्रमुख का कार्यकाल बढ़ाने के लिए अध्यादेश लाने की जरुरत क्यों पड़ी। इसका मतलब है कि दाल में कुछ काला है। अध्यादेश जारी करने के पीछे केंद्र सरकार की मंशा 'हड़बड़ी' वाली है। इस पर सवाल उठाया जाना चाहिए। 

बता दें कि लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, जो सीबीआई प्रमुख का चयन करने वाली समिति में विपक्ष के सदस्य हैं, ने कहा, यह अध्यादेश सरकार के तानाशाही रवैये का एक और उदाहरण है। इस तरह के मामलों में पहले भी केंद्र सरकार, विपक्ष को विश्वास में नहीं लेती थी, आज भी नहीं ले रही है। ये कोई नई बात नहीं है कि केंद्र की भाजपा सरकार के मन में लोकतंत्र के लिए कोई सम्मान नहीं है। मोदी सरकार, किसी से सलाह नहीं लेती। 

कांग्रेस नेता ने सवाल किया, क्या वे इस लोकतंत्र को पुलिस राज्य बनाना चाहते हैं। वे भारी जनादेश की आड़ में जो मर्जी करते रहें। मोदी सरकार, कई बार ऐसा दिखा चुकी है कि उनके पास जनादेश है तो वे ऐसा कर रहे हैं।

ये तो 'बहुमत के बाहुबली' बन गए हैं...   
चौधरी ने कहा, कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को संसद में उठाएगी। हम संसद में ज्यादा कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि सरकार के पक्ष में संख्या बहुत अधिक है। अब एक ही रास्ता बचता है। वह है अदालत की राह। हम न्यायपालिका से अपील करते हैं कि इस ओर ध्यान दें। अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप कर केंद्र सरकार की मनमनी पर लगाम लगानी चाहिए। उन्होंने भाजपा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ये लोग संसदीय लोकतंत्र का अपमान और उसे बर्बाद कर रहे हैं। इनका प्रयास है कि सीबीआई और ईडी के निदेशक उनके अनुरूप हों। वे लोग, सरकार के इशारे पर गलत काम करते रहें। 

चौधरी ने कहा, ऐसे तो दूसरे अध्यादेश भी लाए जा सकते हैं। कल को मोदी जी अपने कार्यकाल 10 साल बढ़ाने के लिए अध्यादेश या विधेयक लाएंगे। वे ऐसा करने के लिए कह सकते हैं कि उन्होंने ये सब चीन के राष्ट्रपति 'शी जिनपिंग' से सीखा है। चूंकि हम तो बहुमत के बाहुबली हैं, इसलिए देश के हित में और इसकी प्रगति के लिए अपना कार्यकाल बढ़ा रहे हैं। 

तृणमूल कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र का बेशर्म वध बताया... 
तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने अपने ट्वीट में लिखा, मोदी-शाह को संसद की परवाह नहीं है। दो सप्ताह में सत्र शुरू हो रहा है, लेकिन वे अध्यादेश ला रहे हैं। उन्होंने भारत से 'गुजरात मॉडल' का वादा किया था, क्या हम वहां पहुंच रहे हैं। उसका संक्षिप्त नाम बीएस होना चाहिए। यानी लोकतंत्र का बेशर्म वध। राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने कहा, सरकार ने बार-बार संसदीय प्रक्रियाओं और सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। मोदी सरकार अध्यादेशों के माध्यम से शासन कर रही है। जब सत्र शुरू होने वाला था, तो वे इंतजार कर सकते थे। इस तरह के निर्णय और कार्य न केवल संसद जैसी संस्था, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के लिए भी सरकार के अनादर को दर्शाते हैं। सरकार के कार्यों पर ध्यान देना शीर्ष अदालत पर निर्भर है। 

सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने ट्विटर पर लिखा कि संसद का सत्र 29 तारीख से शुरू हो रहा है। अपनी जांच से बचने के लिए केंद्र ने रविवार को सीबीआई और ईडी के निदेशकों के कार्यकाल को बढ़ाने के लिए अध्यादेश जारी किया है। उनकी इस बेताब हड़बड़ी में कुछ गड़बड़ की बू आ रही है।

सुखेंदु शेखर रॉय ने जेटली का हवाला दिया... 
राज्यसभा में टीएमसी के मुख्य सचेतक सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा, यह तो अध्यादेश राज पेश किया गया है। इस सरकार में संसद के लिए कोई सम्मान नहीं बचा है। उन्हें ऐसा करने के लिए किसने प्रेरित किया है। जरुर इसके पीछे कोई तो उल्टा मकसद रहा होगा। ये नौकरशाह अनिर्वाचित हैं, स्वर्गीय अरुण जेटली ने यह बात कही थी। उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में अनिर्वाचित लोगों के अत्याचार को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। हमारे लोकतंत्र में अनिर्वाचित लोगों के अत्याचार को न्योता दिया जा रहा है। आज वही सरकार, केंद्रीय एजेंसियों में पांच साल तक का सेवा विस्तार देने जा रही है। 

राजद नेता मनोज कुमार झा ने कहा कि सरकार के 'तरीके' से सभी को चिंतित होना चाहिए। जब 15 दिनों में संसद सत्र शुरू होने जा रहा है, तो सरकार ने यह अध्यादेश का रास्ता अपनाया है। ये लोग सभी संस्थाओं और संस्थागत ढांचे को नष्ट कर रहे हैं। उन्होंने भारत को लगभग एक पुलिस राज्य बना लिया है। संसद को दरकिनार करते हुए इस तरह के कदम इतिहास में बहुत दयालु नहीं होंगे। सरकार को अपनी मंशा लेकर संसद में आना चाहिए था। अगर ऐसा नहीं है तो संसद की क्या भूमिका बचती है। संसद का क्या मूल्य रह जाएगा। आप एक नया संसद भवन किस लिए बना रहे हैं। क्या ये सब लोकतंत्र और लोकतांत्रिक कामकाज के विचार को संग्रहालय बनाने के लिए है। 

भाकपा महासचिव डी राजा ने कहा, जब संसद शुरू होने वाली है तो अध्यादेश जारी करने की जल्दी क्या है। यह कई सवाल खड़े करता है। क्या सरकार का 'निदेशकों' को सेवा विस्तार देने का कोई उल्टा मकसद है।

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