सियासत: बीएसएफ का दायरा बढ़ाए जाने के विरोध में उतरे तृणमूल और कांग्रेस, भाजपा पर संघीय ढांचा क्षतिग्रस्त करने का आरोप

एजेंसी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Fri, 15 Oct 2021 05:00 AM IST

सार

बीएसएफ के अधिकार बढ़ाने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर पंजाब में राजनीति तेज हो गई है।  पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने फैसला वापस लेने की मांग की है। वहीं  टीएमसी ने कहा कि बिना बातचीत के फैसला थोप दिया गया है।
ममता बनर्जी और चरमजीत सिंह चन्नी
ममता बनर्जी और चरमजीत सिंह चन्नी - फोटो : Self
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विस्तार

देश के सीमावर्ती राज्यों में बीएसएफ के कार्रवाई के अधिकार बढ़ने के बाद कांग्रेस के साथ राज्य सरकारें बौखला गई हैं। केंद्र के फैसले से नाराज राज्य सरकारों ने केंद्र पर संघीय ढांचे को क्षतिग्रस्त करने का आरोप लगाया है। पंजाब, असम और पश्चिम बंगाल में पहले बीएसएफ को 15 किमी के दायरे में कार्रवाई का अधिकार था जिसे अब बढ़ाकर 50 किमी कर दिया गया है।
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कांग्रेस पार्टी के लोकसभा सदस्य अधीर रंजन चौधरी ने केंद्र के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह राज्यों की सीमा में केंद्र की बेशर्मी है। चौधरी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर हमला बोलते हुए ट्वीट किया, आप किसी छेड़खानी में शामिल नहीं हो सकते, नहीं तो इसका परिणाम भुगतना होगा। पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने केंद्र के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि तीन राज्यों की सीमा में बड़े पैमाने पर बीएसएफ को कार्रवाई का अधिकार संघीय ढांचे पर सीधा हमला है।


पंजाब के गृहमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि केंद्र का ये फैसला संघीय ढांचे को तहस नहस करने का फैसला है। उन्होंने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पर आरोप लगाया कि राजनीतिक उठापटक के बीच केंद्र के फैसले को राज्य में लागू करने के लिए मुहर लगाई थी। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों को राजनीति का केंद्र न बनाया जाए।  राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सांसद मनोज झा ने कहा है कि आतंकवाद और क्रॉस बॉर्डर क्राइम रोकने को आधार बनाकर केंद्र ने जो फैसला लिया वो राज्यों के अधिकारों पर कब्जे की कोशिश है। एजेंसी

पंजाब-बंगाल की फैसला वापस लेने की मांग
पंजाब के सीएम चन्नी ने गृहमंत्री अमित शाह से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है। वहीं, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र पर हमला बोलते हुए कहा कि यह राज्यों के अधिकारों का उल्लंघन है। संघीय ढांचे पर हमला है। टीएमसी के प्रवक्ता कुनाल घोष ने कहा है कि हम केंद्र से इस फैसले को वापस लेने की मांग करते हैं।

पंजाब राजभवन के बाहर शिअद का प्रदर्शन, धरने पर बैठे बादल
केंद्र के फैसले के विरोध में शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में राजभवन के बाहर धरना दिया गया। इस दौरान हुई धक्कामुक्की के बीच पुलिस ने सुखबीर सहित अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया। हालांकि बाद में सेक्टर-3 थाने से सभी को रिहा कर दिया गया। इस दौरान बादल ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर केंद्र के साथ सांठगांठ का आरोप लगाया और उनसे इस्तीफे की मांग की। बादल ने कहा कि केंद्र ने बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र का विस्तार कर राज्य के आधे से अधिक कानून और व्यवस्था पर नियंत्रण कर लिया है। यह संघीय ढांचे पर केंद्र का हमला है।

आंतरिक सुरक्षा देश की पहली प्राथमिकता
बीएसएफ को कार्रवाई का दायरा 50 किमी तक करने के फैसले को रक्षा विशेषज्ञ सही ठहरा रहे हैं। बीएसएफ के पूर्व आईजी बीएन शर्मा का कहना है कि आंतरिक सुरक्षा देश के लिए पहली प्राथमिकता है। इससे क्रॉस बॉर्डर अपराध को रोकने में मदद मिलेगी। पंजाब और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रग्स और हथियारों की तस्करी होती है। शर्मा ने बताया, लोगों को इस फैसले का स्वागत करना चाहिए क्योंकि इस फैसले से सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।

सुरक्षा के मसले पर राजनीति नहीं
बीएन शर्मा ने स्पष्ट कहा कि बीएसएफ एक पेशेवर फोर्स है जो सीमा पर दुश्मनों से रक्षा के लिए खड़ी रहती है। उसका अधिकार बढ़ा है इसका मतलब है कि सुरक्षा कवच और मजबूत होगा। ध्यान रहे कि बीएसएफ हमेशा स्थानीय पुलिस के संपर्क में रहती है। नई शक्तियां मिलने के बाद सीमापार से होने वाले अपराध को रोकने में मदद मिलेगी। ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, इस पर राजनीति की जरूरत नहीं है।

तस्करों की कमर तोड़ने वाला फैसला
बीएसएफ के पास बॉर्डर क्राइम पर रोक लगाने की जिम्मेदारी है। पूर्वी क्षेत्रों की सीमा की तुलना में पश्चिमी सीमा की स्थिति अलग है। सबको पता है कि पंजाब पिछले दस साल से बॉर्डर पार से होने वाले हथियारों और ड्रग्स की तस्करी से प्रभावित है। देश के दुश्मन सीमावर्ती क्षेत्रों से सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी के बीच बीएसएफ को इस तरह का अधिकार मिलने के बाद तस्करी करने वालों पर रोक संभव है। केंद्र सरकार का ये फैसला तस्करों की कमर तोड़ने वाला साबित होगा। 

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