समीकरण: डबल 'एम' फैक्टर से दीदी ने लगाया दोहरा शतक, क्यों धरी रह गई भाजपा की रणनीति

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Sun, 02 May 2021 07:13 PM IST

सार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब तक आए रुझानों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) भारी बहुमत के साथ तीसरी बार सत्ता में वापसी कर ली है। हालांकि, टीएमसी प्रमुख और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी सीट नहीं बचा पाईं। मतगणना अभी भी जारी है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रसे की जीत के पीछे दो 'एम' फैक्टर का कमाल बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब तक आए रुझानों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) भारी बहुमत के साथ तीसरी बार सत्ता में वापसी कर ली है। हालांकि, टीएमसी प्रमुख और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी सीट नहीं बचा पाईं। मतगणना अभी भी जारी है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रसे की जीत के पीछे डबल 'एम' फैक्टर का कमाल बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि पहला महिला और दूसरा मुस्लिम। इन्हीं की बदौलत ममता की पार्टी ने बहुमत हासिल किया है। 
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार और मतदान पर गौर किया जाए, तो डबल 'एम' मुस्लिम और महिला मतदाताओं की खूब चर्चा होती रही। डबल'एम' का फायदा सीधा-सीधा टीएमसी को मिला, जिसका परिणाम है कि टीएमसी को बहुमत मिला है। 


'एम' : महिलाओं ने दीदी का किसा सपोर्ट
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में करीब 7.18 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से 3.15 करोड़ यानी 49 प्रतिशत महिलाएं हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वोटिंग के दौरान मतदान केंद्रों पर महिलाओं की खासी भीड़ देखने को मिली थी। मतदान के दौरान महिलाओं के उत्साह को देखकर भाजपा को उम्मीद थी कि यह सपोर्ट उनके प्रत्याशियों को मिलने वाला है, लेकिन नतीजों में ऐसा दिखा नहीं। पिछले साल बिहार विधानसभा चुनावों में बूथों पर महिलाओं खासी आबादी जुटने का फायदा भाजपा और नीतीश कुमार को हुआ था, लेकिन बंगाल में ऐसा नहीं हुआ है। अब तक आए रुझानों से स्पष्ट होता दिख रहा है कि अधिकतम महिलाओं ने ममता दीदी को ही अपना वोट दिया है।

'एम' : औवेसी और पीरजादा के बहकावे में नहीं आए मुस्लिम 
राज्य में चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा लगातार आरोप लगा रही थी कि ममता बनर्जी मुस्लिम तुष्टीकरण करती हैं। ममता बनर्जी ने चुनावी मंच से मुस्लिमों को एकजुट रहने का संदेश दिया, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहद सधे हुए शब्दों में पश्चिम बंगाल के हिंदुओं को भाजपा को समर्थन करने का संदेश दे दिया। भाजपा को उम्मीद थी कि मुस्लिमों का वोट ममता के पक्ष में जाने से हिंदुओं का एक मुश्त वोटर भाजपा के समर्थन में आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मुस्लिम वोटरों को ममता से दूर करने के लिए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी कई सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे, लेकिन यहां वह बिहार जैसा कमाल नहीं कर सके। ममता बनर्जी नें तेजस्वी यादव वाली गलती नहीं कि और वे मुस्लिम वोटरों को अपने साथ जोड़े रहने में सफल हुईं।

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