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युवा चेहरों को जनता का साथ: जिग्नेश मेवाणी, हार्दिक पटेल, रिवाबा जडेजा और अल्पेश ठाकोर ने हासिल की जीत

महेंद्र तिवारी, अहमदाबाद Published by: Amit Mandal Updated Fri, 09 Dec 2022 06:22 AM IST
सार

गुजरात में पाटीदार नेता नेता हार्दिक पटेल, दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और पिछड़ा वर्ग के नेता अल्पेश ठाकोर लगभग एक ही  समय में अलग-अलग आंदोलन से आगे बढ़े हैं।

Gujarat Election- Jignesh Mevani, Alpesh Thakor and Hardik Patel
Gujarat Election- Jignesh Mevani, Alpesh Thakor and Hardik Patel - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

गुजरात का यह चुनाव नए और युवा चेहरों के प्रयोग की सफलता के लिए भी याद किया जाएगा। हालांकि मोदी लहर में इसका अधिकतम फायदा भी भाजपा को ही मिला है। कांग्रेस हो या आप, उसके ज्यादातर चर्चित युवा चेहरे अपनी सीट बचाने में नाकाम साबित हुए हैं। हालांकि कांग्रेस नेता जिग्नेश मेवाणी अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। अपनी-अपनी पार्टी में चेहरे की तौर पर पहचान बनाकर उभरे इन युवा नेताओं की नई भूमिका पर लोगों की नजरें होंगी।



हार्दिक, ठाकोर, मेवाणी तीनों जीते 
गुजरात में पाटीदार नेता नेता हार्दिक पटेल, दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और पिछड़ा वर्ग के नेता अल्पेश ठाकोर लगभग एक ही  समय में अलग-अलग आंदोलन से आगे बढ़े हैं। हार्दिक और अल्पेश भाजपा प्रत्याशी के रूप में  क्रमश: विरमगाम और गांधीनगर दक्षिण सीट से शानदार जीत हासिल करने में सफल रहे हैं। कांग्रेस के राज्य कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी बनासकांठा जिले की अपनी वडगाम सीट से जीत गए। पिछला चुनाव वह इसी सीट से कांग्रेस के समर्थन से बतौर निर्दल प्रत्याशी जीते थे। लेकिन, आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री चेहरा ईशुदान गढ़वी देवभूमि द्वारका जिले की खंभालिया सीट नहीं जीत सके। इसी तरह पिछले वर्ष सूरत नगर निकाय चुनाव में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा हासिल करने वाली आप ने अपने तीन प्रमुख युवा चेहरों को सूरत में आजमाया था।


आप राज्य प्रमुख को मिली हार 
राज्य प्रमुख गोपाल इटालिया को कतारगाम, अल्पेश कथीरिया को वराछा रोड तथा धार्मिक मालवीया को ओलपाड सीट से उतारा गया, लेकिन तीनों ही हार गए हैं। दूसरी ओर भाजपा से हार्दिक व अल्पेश से इतर पहली बार चुनाव मैदान में उतारे गए चर्चित युवा चेहरों में जामनगर उत्तर से रिबावा जडेजा, अहमदाबाद के वेजलपुर से युवा मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित ठक्कर, नरोडा से पायल कुकराणी, मणिनगर से अमूल भट्ट, एलिसब्रिज से अमित शाह जैसे कई युवा चेहरे जोरदार जीत हासिल करने में सफल रहे हैं।

घाटलोडिया: सीएम भूपेंद्र 1.92 लाख से जीते मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल लगातार दूसरी बार इस सीट से मैदान में थे। मुख्यमंत्री भूपेंद्र ने 2,12,480 वोट हासिल कर एकतरफा जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस की राज्यसभा सांसद अमी याग्निक को 1,92,263 वोटों हराया। अमी को 21267 वोट मिले। यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी घाटलोडिया सीट से जीतकर मुख्यमंत्री बन चुकी हैं।

जिग्नेश मेवाणी
वडगाम से कांग्रेस के राज्य कार्यकारी अध्यक्ष व दलित नेता जिग्नेश मेवाणी लगातार दूसरी बार इस सीट से मैदान में थे। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को 4928 वोटों से हराया।

पिता-पुत्र की लड़ाई, दोनों सीटें गंवाईं
आदिवासी नेता छोटू भाई वसावा ने पिछले चुनाव से पहले भारतीय ट्राइबल पार्टी की स्थापना की थी। कांग्रेस के साथ चुनाव लड़कर छोटू भाई व उनके बेटे महेश भाई क्रमश: झगड़िया व डेडियापाड़ा से विधायक चुने गए थे। छोटू भाई लगातार सात बार विधायक रह चुके हैं। इस बार चुनाव से पहले पिता-पुत्र में विवाद की स्थिति बन गई और छोटू भाई वसावा को निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा।
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छोटू भाई ने पार्टी चलाने और सीटें जिताने की जिम्मेदारी महेश को दे दी। महेश सभी आदिवासी सीटों पर चुनाव लड़ा रहे थे। उनकी पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका। सात बार के विधायक छोटू  भाई को भाजपा के रीतेशकुमार रमनभाई वसावा ने हरा दिया। आप के सीएम चेहरे ईशुदान गढ़वी द्वारका की खंभालिया सीट से मैदान में थे।  भाजपा के मुलुभाई बेरा 77,834 वोट हासिल कर जीते। दूसरे नंबर पर ईशुदान गढ़वी को 59,089 वोट मिले।

मोरबी पुल हादसे से प्रभावित क्षेत्र की सीट भाजपा ने जीती 
मोरबी पुल हादसे से प्रभावित क्षेत्र की सीट भाजपा ने जीत ली है। भाजपा ने मोरबी के पूर्व विधायक कांतिलाल अमृतिया को टिकट दिया था। कांतिलाल पुल हादसे के बाद लोगों को बचाने के लिए ट्यूब पहन कर पानी में कूद गए थे। कांतिलाल को 114538 वोट मिले हैं।

हिंदी भाषियों के प्रभाव वाले बापूनगर में हर पार्टी हिंदी भाषी प्रत्याशियों को उतारने का प्रयास करती हैं। भाजपा प्रत्याशी दिनेश कुशवाह ने मौजूदा कांग्रेसी विधायक को हराया।

गोधरा सीट भाजपा ने जीती 
पंचमहल जिले की चर्चित गोधरा सीट भाजपा के चंद्र सिंह राउल ने बरकरार रखी है। छह बार के विधायक चंद्र सिंह गुजरात सरकार की उस समिति का हिस्सा थे, जिसने बिलकिस बानो से रेप और उसके परिवार के नौ लोगों की हत्या के 11 दोषियों को छोड़ने की सिफारिश की थी। राउल को 96223 वोट मिले।

बड़ोदरा की मांजलपुर सीट से भाजपा के 76 साल की उम्र वाले विधायक योगेश पटेल ने बड़ी जीत दर्ज की है। योगेश ने रिकार्ड 75.85 फीसदी और 1,20,131 वोट हासिल किए। भाजपा ने अधिक उम्र का हवाला देकर विजय रूपाणी व नितिन पटेल सहित तमाम विधायकों व मंत्रियों को घर बैठा दिया, लेकिन योगेश की जिद के आगे झुकना पड़ा था।  

अल्पेश ने उपचुनाव में हार का गम भुलाया
अल्पेश ने उपचुनाव में हार का गम भुलाया, भाजपा में आए। भाजपा से  राधनपुर सीट से उपचुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इस बार भाजपा ने उनकी सीट बदलकर गांधीनगर दक्षिण से मौका दिया। अल्पेश ने 1,34,051 वोट हासिल कर कांग्रेस के हिमांशु पटेल (90,987 वोट) को हराया।

रवींद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा जडेजा जीतीं
क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा जडेजा जामनगर उत्तर से भाजपा प्रत्याशी थीं। रिवाबा के ससुर अनिरुद्ध सिंह जडेजा तथा ननद व कांग्रेस नेता नयनाबा जडेजा कांग्रेस प्रत्याशी का समर्थन कर रहे थे। रिवाबा ने  53 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की। आप दूसरे नंबर पर रही।

राजकोट पश्चिम
इस सीट से पूर्व सीएम विजय रूपाणी चुने जाते थे। इस बार रूपाणी ने पार्टी का रुख देखते हुए चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। भाजपा की डा. दर्शिता पारस शाह ने इस सीट पर 1,38,687 वोट हासिल किए। कांग्रेस के मनसुख कालरिया को 32,712 वोट मिले।

विरमगाम सीट
पाटीदार आरक्षण आंदोलन से चर्चा में आए हार्दिक पटेल ने विरमगाम सीट जीत ली है। वह चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए थे। हार्दिक ने 51 हजार से ज्यादा वोटों से आप के अमर सिंह ठाकोर को हराया।

नारायणपुरा सीट 
गृहमंत्री अमित शाह अहमदाबाद के नारायणपुरा विधानसभा क्षेत्र से आते हैं। यहां इस बार भाजपा ने सिटिंग विधायक कौशिक भाई पटेल का टिकट काटकर जितेंद्र पटेल को उम्मीदवार बनाया था। जितेंद्र ने 108160 वोट हासिल कर कांग्रेस के सोनलबेन पटेल को हराकर यह सीट बरकरार रखी। सोनलबेन को 15360 जबकि आप के पंकज पटेल को 11785 वोट मिले।

मेहसाणा जिले की ऊंझा सीट के अंतर्गत पीएम नरेंद्र मोदी का गृहक्षेत्र वडनगर आता है। पिछले चुनाव में बीजेपी यहां से हार गई थी। इस बार भाजपा के किरीटकुमार पटेल ने यह सीट कांग्रेस से छीन ली।  

मेहसाणा फिर भाजपा को
इस सीट पर पूर्व डिप्टी सीएम नितिन पटेल चुनाव लड़ते थे। भाजपा ने इस सीट से मुकेश पटेल को उतारा था। मुकेश ने 98816 वोट हासिल कर यह सीट बरकरार रखी।  

नरोडा
भाजपा ने इस सीट से सिटिंग विधायक का टिकट काटकर डा. पायल कुकराणी को उतारा था। पायल के पिता मनोज कुकराणी नरोडा पाटिया दंगा मामले में दोषी करार दिए जा चुके हैं। पायल ने एकतरफा जीत हासिल की।

साबरमती
अहमदाबाद की इस सीट से गृहमंत्री अमित शाह के चुनाव एजेंट होते आ रहे डा. हर्षद पटेल चुने गए हैं। मौजूदा विधायक अरविंद पटेल का टिकट काटकर इन्हें मौका दिया गया था। हर्षद ने 1,20,202 वोट (76 फीसदी) हासिल कर धमाकेदार जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के दिनेश माहिदा को हराया।  

वाघोडिया
वड़ोदरा जिले की इस सीट से छह बार के विधायक मधु श्रीवास्तव भाजपा से टिकट न मिलने पर बगावत कर मैदान में उतरे थे। भाजपा ने यहां से अश्विन पटेल और कांग्रेस ने पूर्व राजपरिवार के सदस्य सत्यजीत गायकवाड़ को मैदान में उतारा था। यह सीट निर्दलीय प्रत्याशी धर्मेंद्र वाघेला ने जीत ली।  

वेजलपुर
अहमदाबाद की इस सीट से भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित ठक्कर को भाजपा ने टिकट दिया था। इनके लिए बीजेपी के सिटिंग विधायक किशोर भाई चौहान का टिकट काटा गया। अमित ने 59 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की। दूसरे नंबर पर कांग्रेस रही।

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