राजस्थान कांग्रेस में मतभेद: सियासी संकट सुलझाने की हो रही कोशिश, अजय माकन की विधायकों से बातचीत जारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 29 Jul 2021 11:16 PM IST

सार

सचिन पायलट गुट के विधायकों को मंत्री बनाने की अटकलों के बाद भी कांग्रेस पार्टी पर से संकट का बादल छटने का नाम नहीं ले रहा है।
अजय माकन
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विस्तार

राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के गुटों के बीच मतभेद लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सचिन पायलट गुट के विधायकों को मंत्री बनाने की अटकलों के बाद भी कांग्रेस पार्टी पर से संकट के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं। ऐसे में अब इन मामलों को सुलझाने के लिए पार्टी हाईकमान के इशारे पर राजस्थान प्रभारी अजय माकन जयपुर पहुंचने के बाद से लगातार विधायकों से बात कर रहे हैं। इस दौरान विधायकों ने अपने-अपने मुद्दे भी उठाए।
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बता दें कि मंगलवार देर रात अजय माकन के जयपुर पहुंचने पर हवाई अड्डे पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा व अन्य नेताओं ने स्वागत किया था। इससे पहले डोटासरा ने मंगलवार को दिन में ट्वीट किया था, 'अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव व राजस्थान कांग्रेस प्रभारी अजय माकन बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर राजस्थान आ रहे हैं। इस दौरान वे सभी कांग्रेस एवं कांग्रेस समर्थक विधायकों से चर्चा करेंगे।'

 

बता दें कि इससे पहले राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी अजय माकन और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बीते शनिवार रात कैबिनेट फेरबदल को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ बैठक की थी, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद दोनों नेताओं ने रविवार को जयपुर में फिर से राज्य पार्टी के नेताओं के साथ बैठक की और कहा कि वे राज्य मंत्रिमंडल विस्तार के मुद्दे पर आम सहमति पर पहुंच गए हैं।

वहीं केंद्रीय कांग्रेस के नेताओं ने कहा है कि कैबिनेट फेरबदल को लेकर कोई विवाद नहीं है और मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद इस बारे में फैसला पार्टी आलाकमान पर छोड़ दिया गया है।

इस बीच पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके समर्थकों द्वारा उठाई गई चिंताओं के मद्देनजर कांग्रेस में घमासान जारी है। माकन और वेणुगोपाल द्वारा गहलोत को बताए गए मुद्दे, कैबिनेट विस्तार, राज्य बोर्डों और निगमों में राजनीतिक नियुक्तियां और राजस्थान में 2018 के विधानसभा चुनावों से पहले किए गए वादों को लागू करना है।

जून के बाद से, पायलट और उनके समर्थकों ने सार्वजनिक रूप से मांग की है कि उनके मुद्दों पर भी पार्टी ध्यान दे। बता दें कि पिछले साल जुलाई में, पायलट और 18 विधायकों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ विद्रोह कर दिया था, जिसके कारण 30 दिनों तक चलने वाली उथल-पुथल हुई, जो दिल्ली में पार्टी आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद एक समझौता फार्मूले के साथ समाप्त हुई।

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