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IPS Dinesh MN: अपराधियों और रिश्वतखोरों के लिए 'काल', सात साल जेल में रहे, मेहनत और ईमानदारी ने दी नई पहचान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Wed, 07 Dec 2022 11:49 AM IST
सार

सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर मामले में दिनेश एमएन को गिरफ्तार किया गया था। दिनेश सात साल तक जेल में बंद रहे। जब जेल से छूटकर बाहर आए तो प्रमोशन मिला। फिर दिनेश एमएन आईजी बन गए। दिनेश एमएन का भ्रष्ट अधिकारियों और गैंगस्टर में खौफ बरकरार है।

आईपीएस दिनेश एमएन
आईपीएस दिनेश एमएन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

राजस्थान पुलिस में एक आईपीएस ऐसे हैं, जिन्हें प्रदेश का हर नागरिक जानता है। इसलिए नहीं कि वे ज्यादातर जिलों में एसपी रहे हैं या सामाजिक सरोकार वाले कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हों। बल्कि इसलिए कि उनके काम करने का तरीका सबसे अलग है। सभी आईपीएस की जिम्मेदारी भले ही एक जैसी हो, लेकिन दिनेश एमएन की मेहनत और ईमानदारी ने उन्हें नई पहचान दी है।



उदयपुर एसपी रहते हुए सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर मामले में दिनेश एमएन को गिरफ्तार किया गया था। दिनेश एमएन सात साल तक जेल में बंद रहे, लेकिन उन्होंने अपना हौंसला नहीं टूटने दिया। जेल से छूटने के बाद फिर से पुलिस सेवा में आए और अपने काम की बदौलत नई पहचान बनाई।


साल 1995 बैच के आईपीएस दिनेश एमएन कर्नाटक के रहने वाले हैं। राजस्थान कैडर ये ऐसे अफसर हैं, जिनकी ईमानदारी पर कोई शक नहीं करता। दिनेश एमएन जिन जिलों में एसपी रहे। वहां के बदमाश इनके नाम से कांपते थे। डर के मारे कई आदतन अपराधियों ने जिले ही छोड़ दिए थे।

असली सिंघम के नाम से जाने जाते हैं दिनेश...
राजस्थान में इन्हें असली सिंघम के नाम से जाना जाता है। साल 1998 में इनकी पहली पोस्टिंग के तौर पर दौसा जिले में एएसपी रहे तो बदमाशों की ऐसी धुनाई की कि उन्हें दौसा छोड़कर भागना पड़ा। बाद में जयपर शहर के गांधी नगर सर्किल के एएसपी रहे। इस सर्किल में राजस्थान विश्वविद्यालय आता है, जहां आए दिन राजनैतिक संरक्षण के चलते गुंडागर्दी होती थी। दिनेश एमएन ने यूनिवर्सिटी के नेताओं का ऐसा इलाज किया कि आज तक लोगों की जुबान पर किस्से चर्चित हैं।

दो साल में बीहड़ को डकैतों से मुक्त कराया...
दिनेश एमएन साल 2000 से 2002 तक करौली के एसपी रहे तो बीहड़ के जंगलों में डकैतों के खिलाफ अभियान छेड़ा और कई गैंग्स को गिरफ्तार किया। दो साल के कार्यकाल में इन्होंने बीहड़ को डकैतों से खाली करवा दिया। साल 2005 में दिनेश एमएन उदयपुर जिले के एसपी बने। उस दौरान राजस्थान पुलिस और गुजरात पुलिस के ज्वॉइंट ऑपरेशन में सोहराबुद्दीन को एनकाउंटर करके मार गिराया था। बाद में इस एनकाउंटर पर सवाल उठे और फर्जी एनकाउंटर बताते हुए कई पुलिस अफसरों के खिलाफ मुकदमें दर्ज हुए। आईपीएस दिनेश एमएन सहित कई अधिकारी गिरफ्तार हुए और जेल गए।

गैंगस्टर आनंदपाल को ढेर करने में बड़ी भूमिका...
गैंगस्टर आनंदपाल सिंह राजस्थान पुलिस के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ था। आनंदपाल सिंह पुलिस पर हमला करके फरार हो गया था। पुलिस ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया, लेकिन उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। साल 2017 में यह टास्क दिनेश एमएन को दिया गया, जब वे एसओजी आईजी बने। दिनेश एमएन ने एक स्पेशल टीम बनाई और हर हाल में आनन्दपाल सिंह पकड़ने का निश्चय किया। जून 2017 में एसओजी की टीम ने गैंगस्टर आनन्दपाल सिंह को घेर लिया। उसे पुलिस के हवाले करने की बात कही, लेकिन आनन्दपाल सिंह ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में आनन्दपाल सिंह ढेर हो गया।
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अशोक सिंघवी किया था गिरफ्तार...
एंटी करप्शन ब्यूरो में दिनेश एमएन आईजी रहने के दौरान पहली बार किसी आईएएस अफसर को ढाई करोड़ रुपये की घूस लेते गिरफ्तार किया था। दिनेश एमएन के नेतृत्व में वरिष्ठ आईएएस और खान विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक सिंघवी को 2 करोड़ 50 लाख रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया।

अब राजस्थान में ACB के एडीजी हैं दिनेश...
साल 2019 से दिनेश एमएन फिर से एंटी करप्शन ब्यूरो में आ गए। फिलहाल, वे एसीबी के एडीजी हैं। दिनेश एमएन के नेतृत्व में एसीबी ने प्रदेश के कई आईएएस और आईपीएस अफसरों को रिश्वत लेते गिरफ्तार करके जेल भेजा। रिश्वत लेने के मामलों में पहली बार जिला एसपी और कलेक्टर को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया।

जेल में रहे दिनेश...
सोहराबुद्दीन एनकाउंटर की जांच सीबीआई ने की थी। आईपीएस दिनेश एमएन सात साल तक जेल में बंद रहे। साल 2014 में वे जमानत पर छूटे और 2017 में सर्विस के लिए बहाल हुए। इतने लंबे समय जेल में रहने के बावजूद भी उनका हौंसला बिल्कुल कम नहीं हुआ। एक बार फिर से पुलिस सेवा में आते ही उन्होंने ज्यादा उत्साह से काम शुरू कर दिया। सोहराबुद्दीन केस में सीबीआई से आईपीएस दिनेश एमएन सहित सभी को बरी कर दिया। जेल से छूटने के बाद फिर से पुलिस सेवा में आए तो उन्हें प्रमोशन मिला और वे आईजी बन गए। एंटी करप्शन ब्यूरो में दिनेश एमएन के आते ही रिश्वतखोरों की नींद हराम हो गई।

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