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Rajasthan Politics: आलाकमान के निर्देश की अनदेखी से चुनौती देने तक, क्या कांग्रेस के भाजपा एजेंट की वजह से बने

आशीष कुलश्रेष्ठ, जयपुर Published by: रोमा रागिनी Updated Wed, 05 Oct 2022 05:03 PM IST
सार

राजस्थान कांग्रेस में पिछले दिनों बहुत कुछ हुआ। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कांग्रेस अध्यक्ष पद पर ताजपोशी निश्चित लग रही थी, लेकिन उन्हें पीछे हटना पड़ा। क्या यह सब कांग्रेस में मौजूद भाजपाई एजेंट की वजह से हुआ। 

अशोक गहलोत और सचिन पायलट
अशोक गहलोत और सचिन पायलट - फोटो : Social Media
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विस्तार

राजस्थान की राजनीति में पिछले दिनों कुछ ऐसा हुआ कि पूरे देश को और खुद कांग्रेस आलाकमान को भी कुछ समझ नहीं आया। चार साल से चल रहा है कि मुख्यमंत्री बदला जाएगा, लेकिन अशोक गहलोत ने न केवल अपनी स्थिति को मजबूत किया बल्कि विरोधियों को दरकिनार करते चले गए। इसी वजह से उनकी जादूगर की छवि अब भी चमक रही है। 


दो हफ्ते पहले गांधी परिवार के विश्वासपात्र अशोक गहलोत के राज्य में ऐसा कुछ हुआ कि पार्टी के पर्यवेक्षकों अजय माकन और मल्लिकार्जुन खरगे की किरकिरी हो गई। 25 सितंबर का घटनाक्रम ही कुछ ऐसा था। माहौल ऐसा बना कि अजय माकन मुख्यमंत्री बदलने का प्रस्ताव पारित करवाने वाले हैं। फिर क्या था, एक ऐसी लहर उठी कि कांग्रेस के 2024 के पूरे प्लान को ही निगल गई। उसके बाद न तो राजस्थान मॉडल बचा और न ही उसे गढ़ने वाले गहलोत की छवि। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का नामांकन भरने से पहले ही कांग्रेस नेताओं ने सोनिया गांधी के सामने गहलोत की जादूगरी को निपटा दिया।



स्थिति यह थी कि यह सब तब हुआ जब गहलोत जयपुर में भी नहीं थे। गहलोत ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में माना कि राज्य मेरा है, लेकिन मुझे ही नहीं पता चला कि विधायक क्या करने जा रहे हैं? गहलोत ने ये भी माना कि माहौल कुछ ऐसा बना दिया कि सबके मन में डर समा गया कि आगे क्या होगा? नया मुख्यमंत्री उनके साथ क्या करेगा? इस वजह से ऐसा कुछ हुआ, जो नहीं होना चाहिए था।  

इन सवालों के जवाब अब भी नहीं मिले  
राजस्थान में ऐसा माहौल किसने बनाया और उसका मकसद क्या था? यह ऐसे प्रश्न है, जिनके जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं। गहलोत से अमर उजाला ने पूछा कि क्या कांग्रेस में ऐसा कोई है, जो भाजपा के लिए काम कर रहा है? इस पर उन्होंने न तो स्वीकारोक्ति दी और न ही विरोध किया। साफ है कि वे जानते सब हैं, लेकिन बोलना नहीं चाहते। बात ही ऐसी है कि हालात जैसे बने उससे सिर्फ भाजपा को ही लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि मीडिया ही तो सब पता करती है। आप इसकी तह में जा सकते हैं और बता सकते हैं कि क्यों हुआ, क्या हुआ और कैसे हुआ। मुख्यमंत्री ने इशारों-इशारों में साफ कर दिया कि गहलोत को संदेह नहीं बल्कि यकीन है कि किसी ने साजिश के चलते ऐसा माहौल बनाया और इसका फायदा निश्चित तौर पर भाजपा को पहुंचाया भी। 

राजस्थान में कई बड़े उपहार दिए हैं गहलोत ने 
गहलोत कांग्रेस के उन गिने-चुने नेताओं में से एक हैं, जिनका व्यापक जनाधार है और नेताओं में अच्छी पकड़ भी है। कम से कम हिंदी प्रदेशों में तो कांग्रेस के पास गहलोत जैसा कोई दूसरा नेता नहीं है। गहलोत ने राजस्थान के बजट में चिरंजीवी योजना (10 लाख का बीमा), बिजली दर में कटौती, सरकारी अंग्रेजी स्कूल लगाने जैसे उपहार दिए हैं, जो उन्हें जनता में लोकप्रिय बनाते हैं। गहलोत को घेरने की कोशिशें भाजपा ने कम नहीं की, लेकिन हर बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी। करौली दंगे, उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या के मामले ऐसे थे, जिन्होंने पूरे देश को दहला दिया। इसके बाद भी गहलोत ने हालात पर काबू पाया और भाजपा को बढ़ने से रोका। 

कांग्रेस की उठापटक का लाभ भाजपा उठाएगी 2023 में  
गहलोत को इस समय जो उठापटक का सामना करना पड़ा है, उसका लाभ भाजपा 2023 में उठाने की पूरी कोशिश करेगी। कांग्रेस के पास ले-देकर पूरे देश में राजस्थान के तौर पर एक ही तो बड़ा राज्य रह गया है, वह भी आपसी खींचतान में पार्टी गंवा सकती है। गहलोत को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाता तो निश्चित तौर पर भाजपा को 2024 में राजस्थान की सभी 25 लोकसभा सीटों को जीतना आसान नहीं रहता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिक्कत हो सकती थी।
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