नगर परिषद कठुआ में प्रधान, उप प्रधान की कुर्सी को लेकर फैसला सोमवार को

Jammu and Kashmir Bureau जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Sun, 26 Sep 2021 12:21 AM IST
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कठुआ। नगर परिषद कठुआ में 12 जुलाई से शुरू हुआ गतिरोध अब थमने की कगार पर है। शनिवार को नगर परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप अबरोल ने विशेष बैठक का न्योता सभी पार्षदों को भेज दिया है। जिसमें अध्यक्ष नरेश शर्मा और उपाध्यक्ष रेखा कुमारी की कुर्सी का फैसला होगा।
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फ्लोर टेस्ट की यह कवायद बीते दो महीने में दूसरी बार होने जा रही है। इससे पहले 25 जुलाई को फ्लोर टेस्ट के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की ओर से बैठक बुलाई गई थी, लेकिन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ट्रिब्यूनल से स्टे ले आए थे। जिसके बाद बैठक नहीं हो पाई। मामला ट्रिब्यूनल में चले जाने के बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को राहत मिली। लेकिन, ट्रिब्यूनल के फैसले से असंतुष्ट 12 पार्षद इसके बाद हाई कोर्ट में चले गए। कोर्ट के निर्देश पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने म्यूनिसिपल एक्ट के तहत अध्यक्ष को विशेष बैठक बुलाने के लिए लिखा था। सात दिन बीतने के बाद भी जब कार्रवाई नहीं हुई, तो अगली कार्रवाई में मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने उनके पास उपलब्ध अवधि में बैठक बुलाई है।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि हाई कोर्ट की ओर से मिले निर्देशानुसार प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जिसके तहत शनिवार को सभी पार्षदों को विशेष बैठक के लिए न्योता भेज दिया गया है। सोमवार को सुबह 11 बजे नगर परिषद कार्यालय में यह बैठक रखी गई है। मैजिस्ट्रेट से लेकर पुलिस की तैनाती भी हो चुकी है। सोमवार को सीक्रेट बैलेट से यह प्रक्रिया अंजाम दी जाएगी। विशेष बैठक में कम से कम 11 पार्षदों का उपस्थित रहना जरूरी है, ताकि फ्लोर टेस्ट कराया जा सके। अधिकारी ने साफ किया है कि फ्लोर टेस्ट के नतीजे को सुरक्षित रखा जाएगा, और 1 अक्टूबर को हाई कोर्ट की ओर से मिलने वाले निर्देश के बाद ही अगली कार्रवाई होगी।
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21 पार्षदों वाली नगर परिषद में 12 पार्षद हुए हैं बागी
कठुआ नगर परिषद में 21 पार्षद हैं। भाजपा पार्षद अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर आरोप पहले भी लगा चुके हैं। जुलाई 2020 में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान बहुमत हासिल करने में नगर परिषद के अध्यक्ष नरेश शर्मा कामयाब रहे थे। लेकिन, इस बार भाजपा के ही सात और पांच अन्य पार्षद उनके खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। भाजपा की ओर से पार्षदों को वापस लाने के लिए दबाव भी बनाया गया, और उन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त उन्हें पार्टी ने चेतावनियां भी दी थीं। लेकिन, पार्षद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को लेकर अपने फैसले पर अड़े रहे।

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