मां की ममता से मिला मृत बेटे को इंसाफ, पूरी बिरादरी जिसे दुघटना मान रही थी मां उसे मान रही थी हत्या

Jammu and Kashmir Bureau जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Sat, 25 Sep 2021 11:48 PM IST
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पुंछ। किसी ने सच ही कहा है कि दुनियां में मां की ममता सबसे महान है। मां बच्चे का हर दुख दर्द बिना बताए ही जान जाती है। ऐसा ही मामला मेंढर में सामने आया। जब मां की ममता के कारण एक मृत बेटे को उसकी मौत के चार माह बाद इंसाफ मिला, और बेटे की हत्या करने वाला पुलिस की गिरफ्त में आ गया।
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चार माह से जहां पूरा गांव पूरी बिरादरी 14 वर्षीय मोहम्मद शारिक की मौत को एक हादसा मान रहे थे। वहीं उसकी मां रकिया बेगम अकेली औरत यह कह रही थी कि उसके बेटे की मौत हादसा नहीं हत्या है। उसकी ममता यह मानने को तैयार नहीं कि उसका बेटा किसी हादसे का शिकार हुआ है। मां के बार-बार बेटे की हत्या की बात कहे जाने के बावजूद रिश्तेदारों, बिरादरी और गांव ने उसकी बात को दर किनारा कर बेटे को अपने रीतिरिवाज से दफन कर दिया और उसका चालीसवां आदि सब कुछ करा दिया, लेकिन रकिया बेगम की ममता कई माह तक बच्चे को इंसाफ दिलाने के लिए कभी पुलिस थाने, कभी किसी नेता, तो कभी जिला प्रशासन के दरवाजे पर भटकती रही। क्योंकि उसका पति मोहम्मद सदीक दिव्यांग होने के कारण बैसाखियों के सहारे ज्यादा दूर आ जा नहीं सकता था।

गरीब मां दिन भर कानून के रखवालों के यहां भटकती रही और आखिरकार उसे एक हफ्ता पूर्व उस समय अपनी बात को साबित करने और बेटे को इंसाफ दिलाने की पहली किरण मिली। जब प्रशासन की तरफ से जांच कमेटी का गठन कर रकिया के बेटे शारिक के शव को कब्र से निकालने का आदेश दिया। इसके बाद पुलिस की जांच में तेजी आई। संदिग्ध मौत का मामला हत्या के मामले में बदला और पुलिस ने भी इस बात का खुलासा कर दिया कि रकिया के बेटे शारिक की मौत हादसा नहीं हत्या थी। 14 वर्षीय मासूम बेटे की हत्या का खुलासा होने पर इस मां को कुछ राहत का अहसास हुआ है।
रकिया का कहना है कि मैं अपने बेटे को घर छोड़ कर कुछ समय के लिए बाजार गई थी और लौटने पर उसका शव जिस प्रकार तालाब से मिला, मेरा मन इस बात को मान ही नहीं रहा था कि मेरे बेटे की मौत पानी में डूबने से हुई है। जब मैंने बेटे के शव को गले लगाया था तो मुझे उसके शरीर में पानी में डूब कर मरने का एक भी प्रमाण नहीं मिला।

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