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उमर ने उठाए सवाल: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए अलग-अलग कानून क्यों, अब जमीन और अपनी पहचान के लिए लड़ाई

संवाद न्यूज एजेंसी, रामबन Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Fri, 03 Dec 2021 02:48 AM IST

सार

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रामबन में ने कहा कि अनुच्छेद 370 खत्म करने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में दो अलग-अलग कानून क्यों हैं। उन्होंने कहा कि अब लड़ाई जम्मू कश्मीर की पहचान और जमीन बचाने के लिए है। 
 
रामबन में संबोधित करते पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला।
रामबन में संबोधित करते पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला। - फोटो : संवाद
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विस्तार

रामबन में नेकां उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वीरवार को कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर में कुछ ठीक नहीं है। चिनाब घाटी के दौरे के अंतिम दिन उमर ने डाक बंगला रामबन में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। उमर ने कहा कि 5 अगस्त 2019 के बाद भाजपा सरकार ने सूचित किया गया था कि एक राष्ट्र एक कानून लागू करने के लिए अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया गया, और तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों यानी जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया।
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उन्होंने सवाल किया कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लिए दो अलग-अलग संविधान क्यों हैं? उन्होंने केंद्र और भाजपा पर तंज कसते हुए पूछा कि आप यहां क्या गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि लड़ाई अब जम्मू-कश्मीर की पहचान और जमीन के लिए है। इसका दूसरा हिस्सा लद्दाख सुरक्षित है, जबकि जम्मू-कश्मीर में सभी को जमीन और नौकरी हासिल करने की इजाजत है।

 
केंद्र ऐसे समय में गैर-गंभीर मुद्दे उठा रही है जब कश्मीर 5 अगस्त 2019 के बाद की समस्याओं की चपेट में है।उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने नेशनल कांफ्रेंस की आवाज कमजोर बनाने के कोशिश की, लेकिन अब सभी मुख्यधारा की पार्टियों ने जम्मू-कश्मीर के सामूहिक मुद्दों पर हाथ मिलाया है। अब सीटों की गिनती नहीं होगी। यह लड़ाई सत्ता या मुख्यमंत्री पद के लिए नहीं है। अगर ऐसा करेंगे तो लोग कभी माफ नहीं करेंगे।
 
अगर यह पहले हुआ होता तो जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं होता। उमर ने कहा कि केंद्र सरकार ने दावा किया कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास के नए युग की शुरुआत होगी। चिनाब घाटी की यात्रा के दौरान सरकार की उपलब्धियों को जमीन पर देखने की कोशिश की, लेकिन वहां पिछली सरकार की शुरू की गईं परियोजनाओं के अलावा कुछ मिला ही नहीं।
 
भाजपा ने राज्य में मतदाताओं के ध्रुवीकरण के लिए एक सुनियोजित साजिश रचने के अलावा कुछ नहीं किया है।उन्होंने आरोप लगाया कि सांप्रदायिक आधार पर चुनाव लड़ने के लिए लोगों को बांटने की सुनियोजित साजिश के तहत ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वह पार्टी के खिलाफ कोई निराधार आरोप नहीं लगा रहे हैं, बल्कि पार्टी के नेताओं की ओर से दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

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