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बारामुला में आतंकी हमला: सुरक्षाबलों को निशाना बनाकर आतंकियों ने फेंका ग्रेनेड, चार जवान और एक नागरिक घायल

कश्मीर घाटी के बारामुला में आतंकियों ने ग्रेनेड हमला किया है। इस हमले में चार जवान और एक नागरिक हुआ है। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। साथ ही हमलावरों की तलाश में इलाके की घेराबंदी कर अभियान चलाया जा रहा है।

बता दें कि उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के खानपोरा ब्रिज पर शुक्रवार को आतंकवादियों ने सीआरपीएफ पार्टी पर ग्रेनेड फेंका। जिसमें चार जवान और एक नागरिक घायल हो गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आतंकवादियों ने खानपोरा ब्रिज पर सीआरपीएफ पार्टी की ओर ग्रेनेड फेंककर हमला किया। इस हमले में चार जवान और एक नागरिक घायल हो गए हैं। इस बीच फरार हुए आतंकियों को पकड़ने के लिए पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है।

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बारामुला में ग्रेनेड हमला बारामुला में ग्रेनेड हमला

जम्मू में हाई अलर्ट:  सांप्रदायिक तनाव फैलाने के लिए मंदिरों पर हमले की योजना, खुफिया एजेंसियों को मिला इनपुट

5 अगस्त को अनुच्छेद 370 निरस्त होने की बरसी और स्वतंत्रता दिवस पर आतंकी हमला हो सकता है। जिसको देखते हुए जम्मू में हाई अलर्ट जारी किया गया है। खुफिया इनपुट है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा आईईडी लगाकर जम्मू शहर में हमले की योजना बना रहे हैं। जिसमें धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की साजिश है।

पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा द्वारा सांप्रदायिक तनाव फैलाने के लिए मंदिरों पर हमले की योजना के बारे में खुफिया एजेंसियों से इनपुट मिलने के बाद जम्मू में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

सूत्रों का कहना है कि ड्रोन द्वारा आईईडी गिराए जाने की हाल की घटनाओं से पता चलता है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठन जम्मू में धार्मिक स्थलों के पास भीड़-भाड़ वाली जगहों पर विस्फोटक लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

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जल-प्रलय:  कुपवाड़ा में आई बाढ़ से एक पुल क्षतिग्रस्त, किश्तवाड़ में बारिश ने रोका रेस्क्यू ऑपरेशन

कुपवाड़ा में भारी बारिश के बाद नवा बाजार खुमरियाल में बाढ़ आ गई है। एक पुल के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। लोगों को नदी-नालों से दूर रहने की हिदायत दी गई है। उधर, किश्तवाड़ में एक बार फिर से बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। जिसकी वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिया गया है।

किश्तवाड़ में बादल फटने के बाद तीसरे दिन शुक्रवार सुबह एक बार फिर से पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय लोगों द्वारा बचाव अभियान शुरू किया गया था लेकिन बारिश के चलते इसे रोकना पड़ा। लापता 19 लोगों का अभी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पांच किलोमीटर तक कई-कई फीट ऊंचा मलबा और पत्थरों का ढेर जमा है। लगभग एक हजार कनाल खेत की मिट्टी पूरी तरह बह गई है। 

मचैल माता इलाके में 100 से अधिक यात्री व स्थानीय लोग पुल क्षतिग्रस्त होने की वजह से फंसे हुए हैं। इनसे संपर्क कर सुरक्षित वापस लाने की प्रशासन कोशिश कर रहा है। घटना में बचाए गए पांच लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। गौरतलब है कि बुधवार को दच्छन क्षेत्र के होंजड़ गांव में बादल फटने से सात लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 19 लोग लापता हैं।
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किश्तवाड़ जल प्रलय:  मौत के मुंह से निकले इमरान की आपबीती- हमारे बुजुर्गों ने भी कभी नहीं देखी ऐसी तबाही

मैं 26 साल का हूं, लेकिन आज तक मैंने कभी अपने बुजुर्गों से ऐसी त्रासदी के बारे में न ही सुना और ना ही कभी देखा। हमारे होंजड़ गांव में कई मकान 35 से 40 वर्ष पुराने हैं, लेकिन खराब मौसम ने कभी ऐसी तबाही नहीं मचाई। दच्छन के होंजड़ में बादल फटने के साथ भारी मलबा और पत्थर लेकर आई बाढ़ में शायद ही कोई बचा होगा, क्योंकि हमारे गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर ही दरिया बह रहा है जो चिनाब में जाकर मिलता है। ऐसी आशंका है कि मलबे के साथ आई बाढ़ में सभी लोग दरिया में गिर गए होंगे। जिससे उनके बचने की उम्मीद काफी कम है। किश्तवाड़ में होंजड़ त्रासदी से मौत के मुंह से निकले होंजड़ निवासी इमरान ने यह आपबीती सुनाई।

जीएमसी के डिजास्टर वार्ड में भर्ती इमरान को बीती रात के उस त्रासदी के मंजर के याद आते ही अपनों के खोने का गम हो रहा है। इमरान ने बताया कि होंजड़ में एक 50-60 फीट का नाला बह रहा है, जिसके दोनों तरफ घर बसे हैं।
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जम्मू-कश्मीर : 24 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन में भी नहीं मिला किश्तवाड़ में लापता 19 लोगों का सुराग

किश्तवाड़ जल प्रलय
बादल फटने के बाद किश्तवाड़ में दच्छन क्षेत्र के होंजड़ में पांच किलोमीटर तक मलबे के ढेर लग गए हैं। करीब एक हजार कनाल जमीन तबाह हो गई है। इस क्षेत्र में फसलों का नामोनिशान नहीं है। इसी बीच, बादल फटने की घटना के दूसरे दिन वीरवार को भी बचाव अभियान जारी रहा। एयरलिफ्ट कर पहुंचाई गईं एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें भी दिन भर मलबे में जिंदगियों की तलाश करती रहीं। 24 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी लापता 19 लोगों का कोई पता नहीं चल सका है। उधर, पुल और रास्ते बहने के कारण मचैल माता क्षेत्र में अभी भी सौ से ज्यादा यात्री फंसे हैं। बीते दिन रेस्क्यू किए गए 17 में से पांच लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। 

दच्छन क्षेत्र के होंजड़ गांव में मंगलवार रात को बादल फटने से सात लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 19 लोग लापता हैं। 21 घर, गौशालाएं, पुल, राशन डिपो ध्वस्त होने के साथ मस्जिद भी क्षतिग्रस्त हो गई है। वीरवार को पूरा दिन रेस्क्यू ऑपरेशन चलता रहा। पुलिस, सेना और एसडीआरएफ के साथ दोपहर को हेलिकॉप्टर से पहुंची एनडीआरएफ की टीम ने भी कड़ी मशक्कत की, लेकिन लापता 19 लोगों में से किसी का कोई सुराग नहीं मिल सका। लापता लोगों की नाले के जरिये चिनाब नदी में भी पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, जिनकी तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। 

उधर, सरकार के कई बड़े अधिकारी होंजड़ में पहुंच कर राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। घटना के बाद देर रात एडीजीपी मुकेश सिंह और मंडलायुक्त डॉ. राघव लंगर ने मौके पर पहुंचकर मौके का जायजा लिया। एसडीआरएफ तथा एनडीआरएफ की टीमों को घटनास्थल पर भेजने के लिए सुबह से ही तैयार रखा गया था, लेकिन मौसम खराब होने की वजह से दोपहर बाद उन्हें वायुसेना के हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर मौके पर पहुंचाया गया। एक टीम सुबह 5.45 बजे सड़क मार्ग से घटनास्थल पर भेजी गई। बुधवार को भी टीम को एयरलिफ्ट कर मौके पर भेजने की कोशिश की गई, लेकिन खराब मौसम के चलते यह संभव नहीं हो सका। शुक्रवार को रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहेगा।

सड़क न होने के कारण गांव में नहीं पहुंच पा रही मशीनरी
बादल फटने के बाद गांव के 19 मकान मलबे में तब्दील हो गए हैं। सड़क न होने के कारण खोदाई के लिए मशीनरी नहीं पहुंच पा रही है। सभी टीमें हाथ से पेड़, पत्थर और लकड़ियां उठाने को मजबूर हैं। लापता लोग मलबे नीचे दबे हो सकते हैं, लेकिन मलबे बिना मशीनरी हटाना संभव नहीं है। गांव तक पहुंचने के लिए सड़क से करीब सात किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ता है। पूरा रास्ता पहाड़ी से होकर ही गुजरता है।

सौंदर तक ही पहुंच पा रहा वायुसेना का हेलिकॉप्टर
वायु सेना का हेलिकाप्टर भी सौंदर गांव तक ही जा पा रहा है। एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ टीमों को केवल सौंदर गांव तक ही पहुंचा पा रहा है। इससे आगे करीब सात किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। सड़क के रास्ते भी टीमें हिरवाई गांव तक ही जा पा रही हैं। इससे आगे सभी को पैदल सफल करना पड़ रहा है।

मौसम खराब होने से एनडीआरएफ की टीम नहीं लौट सकी
राहत कार्यों के लिए यहां पहुंची एनडीआरएफ टीम के कुछ सदस्य और डॉग स्कवायड वीरवार शाम मौसम खराब होने के कारण यहीं फंस गए। उन्हें हैलीपैड पर रुकना पड़ा है।

पल-पल की जानकारी ले रहे गृह मंत्री शाह
उधर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा गृह मंत्रालय लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहकर पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। उप राज्यपाल तथा मुख्य सचिव से पूरी स्थिति की जानकारी लेने के साथ ही हर संभव सहयोग करने का भरोसा दिया है।

एलजी बोले, पुनर्वास की हर संभव कोशिश होगी
उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि वे इस प्राकृतिक आपदा के शिकार हुए तथा प्रभावित लोगों के पुनर्वास की हर संभव कोशिश करेंगे। घटना काफी दुखद है जिसमें सात लोगों की जान चली गई। उन्होंने घायल लोगों के बेहतर इलाज की हिदायत दी।

क्याड़ गांव में आठ मकान क्षतिग्रस्त, पुल बहा
दच्छन तहसील के क्याड़ गांव में नाले पर बना पुल बह जाने के कारण गांव का संपर्क कट गया है। बादल फटने के कारण आई बाढ़ से यहां आठ मकानों को नुकसान पहुंचा है। लगभग 50 घरों वाले क्याड़ गांव में राहत कार्य भी तेजी से नहीं हो पा रहे हैं।
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रामबन हादसा: नदी में उतराती मिली सब-इंस्पेक्टर की पत्नी की लाश, बच्चे और सिपाही अभी भी लापता

जम्मू-कश्मीर के रामबन में 26 जुलाई को हुए दर्दनाक हादसे के बाद लापता सब-इंस्पेक्टर की पत्नी आशा रानी का शव शुक्रवार को रियासी जिले में नदी में उतराता मिला है। सब इंस्पेक्टर राकेश कुमार और उनके दोनों बच्चों का अभी तक कोई पता नहीं चला है।

बता दें कि सब इंस्पेक्टर राकेश कुमार अपने परिवार के साथ कार से जा रहे थे। गाड़ी पर नियंत्रण खोने से कार सड़क से फिसल कर रामबन-बनिहाल के बीच मेहाड़ इलाके में तेज बहती नदी में गिर गई। हादसे के तुरंत बाद पुलिस और क्यूआरटी की टीम मौके पर पहुंची और तलाशी शुरू की। लेकिन सफलता नहीं मिली। सिपाही और बच्चों की तलाश जारी है।

गुरुवार को भी तलाशी अभियान चलाया गया था। इसमें एनडीआरएफ के जवानों ने नदी के किनारों और संभावित स्थानों को खंगाला है, लेकिन लापता लोगों का कोई सुराग नहीं मिला। मौसम में सुधार होते ही पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के गोताखोरों ने फिर से चिनाब में लापता लोगों और कार का पता लगाने के लिए अभियान शुरू किया। इस दौरान मेहाड़, मैत्रा, कोहबाग और रामबन में तटबंधों को खंगाला गया। एनडीआरएफ के अनुसार तेज बहाव के बावजूद चिनाब में गोताखोरों को उतारा गया है।

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जम्मू-कश्मीर: सांबा में तीन अलग-अलग इलाकों में दिखे ड्रोन, बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान जारी

जम्मू संभाग में सांबा जिले के तीन अलग-अलग इलाकों में बीती रात संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों की सूचना के बाद सुरक्षा बल तलाशी अभियान चला रहे हैं। सांबा सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास सीमावर्ती गांवों में गुरुवार रात तीन अलग-अलग जगहों पर संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन मंडराते देखे गए। सतर्क जवानों ने इन पर फायरिंग की। जिसके बाद ड्रोन वापस लौट गए। एसएसपी सांबा राजेश शर्मा का कहना है कि बीती रात सांबा जिले के तीन अलग-अलग इलाकों में ड्रोन गतिविधियां देखीं गईं हैं। सांबा के घगवाल इलाके में वह मौके पर भी पहुंचे। बताया जा रहा है कि ड्रोन बारी ब्राह्मणा और घगवाल में जम्मू-पठानकोट राजमार्ग पर संवेदनशील सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर मंडराने के तुरंत बाद फरार हो गए।    

बता दें कि सीमावर्ती गांव मावा में गुरुवार शाम को पाकिस्तानी ड्रोन घुस आया, जिसे बीएसएफ जवानों ने फायरिंग कर खदेड़ दिया। ड्रोन रिगाल गांव की सीमा से पाकिस्तान वापस लौट गया। रक्षा सूत्रों के अनुसार, करीब साढ़े आठ बजे पाकिस्तानी ड्रोन सदोह गांव के रास्ते भारतीय सीमा मे घुसा और मावा गांव के ऊपर मंडराने लगा। हरकत में आई बीएसएफ की 173वीं वाहिनी के जवानों नें चार राउंड फायर किए। इसके बाद ड्रोन पाकिस्तान लौट गया।

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स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्होंने मावा पुलिस चौकी के ऊपर एक लाल लाइट को देखा था। कुछ देर के लिए ड्रोन एक जगह ठहरा रहा। बाद में रिगाल गांव की सीमा की ओर बढ़ गया। वहीं अरनिया सेक्टर के सीमावर्ती क्षेत्र कदोयाल में वीरवार शाम सवा आठ बजे ड्रोन जैसी चीज दिखने से सनसनी फैल गई। लोगों के अनुसार आसमान में लाल और हरी रोशनी वाली कोई चीज मंडरा रही थी।

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