कारगिल विजय दिवस: द्रास में सेना प्रमुख रावत ने कहा, दोबारा कारगिल जैसी गलती की हिमाकत न करे पाक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Pranjal Dixit Updated Fri, 26 Jul 2019 01:28 AM IST
सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत
सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत - फोटो : फाइल, एएनआई
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सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए चेताया है कि वह दोबारा कारगिल जैसी गलती का दुस्साहस न करे। 1999 में पाकिस्तान ने भारतीय सशस्त्र बलों के इरादे को सही से नहीं पहचाना था और कारगिल की हिमाकत कर डाली थी। पाकिस्तान के लिए बेहतर है कि भविष्य में ऐसी कोई गलती न करे। कहा, सबको पता है कि एलओसी और अन्य स्थानों पर क्या हो रहा है। हम उसे बैकफुट पर धकेलते रहेंगे।
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कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर द्रास में पत्रकारों से बातचीत में सेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान भारतीय राजनीतिक इच्छाशक्ति और भारतीय जवानों के इरादे को सही ढंग से से पहचान नहीं पाया था। कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे किन ऊंचाइयों पर कब्जा करते। भारतीय सेना किसी भी ऊंचाई को फतह करने में सक्षम है। 1999 में कारगिल युद्ध में यह साबित कर दिया गया। सेना प्रमुख ने कहा कि यह नहीं कहता कि हम हमेशा 100 प्रतिशत सफलता की योजना बनाते हैं। हम जोखिम लेते हैं और कमांडरों से जोखिम लेने की अपेक्षा की जाती है।

 

पुलवामा हमले में पाकिस्तान का हाथ नहीं होने के बारे में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के बयान पर कहा कि हम सत्य से अवगत हैं। इस तरह के किसी बयान पर यकीन नहीं कर सकते। हमारी खुफिया एजेंसियों ने पुलवामा में जो कुछ हुआ है, उसके पर्याप्त सबूत दिए हैं।

घुसपैठ की कोशिश करने वालों का शव ही लौटेगा
बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद घुसपैठ में कमी आने और इससे पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने के सवाल पर कहा कि घुसपैठ में कमी का एक कारण यह भी है कि हमारे जवान सतर्क हैं। हमने अतिरिक्त जवानों को शामिल किया है ताकि काउंटर इनफिल्ट्रेशन ग्रिड और मजबूत हो। पाकिस्तानी सेना और आतंकी अब यह जान चुके हैं कि अगर वह कहीं भी एलओसी के करीब आते हैं तो वापस उनके शव ले जाने होंगे। हमारे एक्शन के चलते घुसपैठ में कमी आई है।

गोला-बारूद भी भारत में बनाने पर विचार
मेक इन इंडिया हथियारों पर एक सवाल के जवाब में रावत ने कहा कि अब आधुनिक 155 गन भारत में बनाई जा रही हैं। हेलीकाप्टर भी बनाए जा रहे हैं। गोला-बारूद बनाने का भी विचार है। एके 203 को भी रूस के साथ संयुक्त रूप से भारत में बनाया जाएगा। हमें खुशी होगी अगर कोई हमारे साथ प्रौद्योगिकी साझा करेगा। इसका उन्हें ही फायदा होने वाला है, क्योंकि हमारे यहां एक बड़ा बाजार है। एक बार जो हथियार भारतीय सेना टेस्ट करती है, वह पूरी दुनिया में प्रसिद्ध होता है।

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