पुलवामा: इन दो भाइयों के मुरीद हुए पीएम मोदी, जानिए युवाओं के लिए प्रेरणा बने बिलाल और मुनीर के बारे में रोचक बातें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sun, 26 Sep 2021 08:16 PM IST

सार

बिलाल ने अपने घर पर ही वर्मी कंपोस्ट की यूनिट लगाई है। इस यूनिट से तैयार होने वाले बायो फर्टिलाइजर से न केवल खेती में काफी लाभ हुआ है बल्कि यह लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी लेकर आया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के दो भाइयों को लोगों खासकर युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्त्रोत बताया। पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर स्वरोजगार के जरिये न केवल स्वयं की आजीविका चला रहे बल्कि 15 अन्य लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे दो भाइयों बिलाल अहमद शेख व मुनीर अहमद शेख के हौसले को सलाम किया। कहा कि वे न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि देशभर के लोगों को वर्मी कंपोस्ट से नई राह दिखा रहे हैं। 
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मोदी ने कहा कि पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर खेती में हो रहे नए प्रयोग, नए विकल्प स्वरोजगार के नए साधन बना रहे हैं। पुलवामा के दो भाइयों की कहानी भी इसी का एक उदाहरण है। बिलाल अहमद शेख और मुनीर अहमद शेख ने जिस प्रकार अपने लिए नए रास्ते तलाशे वह नए भारत की एक मिसाल है। 39 साल के बिलाल अहमद उच्च शिक्षित हैं। उन्होंने कई डिग्रियां हासिल कर रखी हैं। अपनी उच्च शिक्षा से जुड़े अनुभवों का इस्तेमाल आज वो कृषि में खुद का स्टार्ट अप बनाकर कर रहे हैं।

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बिलाल ने अपने घर पर ही वर्मी कंपोस्ट की यूनिट लगाई है। इस यूनिट से तैयार होने वाले बायो फर्टिलाइजर से न केवल खेती में काफी लाभ हुआ है बल्कि यह लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी लेकर आया है। हर साल इन भाइयों की यूनिट से किसानों को करीब तीन हजार क्विंटल वर्मी कंपोस्ट मिल रहा है। आज उनकी इस यूनिट में 15 लोग काम भी कर रहे हैं। उनकी इस यूनिट को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं और उनमें ज्यादातर ऐसे युवा होते हैं जो कृषि क्षेत्र में कुछ करना चाहते हैं। पुलवामा के शेख भाइयों ने नौकरी करने की जगह रोजगार प्रदाता बनने का संकल्प लिया। आज वह जम्मू-कश्मीर ही नहीं बल्कि देश भर के लोगों को नई राह दिखा रहे हैं।

सियाचिन फतह करने वाले दिव्यांगों की सराहना

प्रधानमंत्री ने मन की बात में सियाचिन फतह करने वाले दिव्यांगों की सराहना की। कहा कि सियाचिन ग्लेशियर के बारे में हम सभी जानते हैं। वहां की ठण्ड ऐसी भयानक है जिसमें रहना आम इंसान के बस की बात ही नहीं है। कुछ ही दिन पहले सियाचिन के इस दुर्गम इलाके में 8 दिव्यांग जनों की टीम ने जो कमाल कर दिखाया है वो हर देशवासी के लिए गर्व की बात है। इस टीम ने सियाचिन ग्लेशियर की 15 हजार फीट से भी ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित कुमार पोस्ट पर अपना परचम लहराकर विश्व रिकॉर्ड तक बना दिया है। शरीर की चुनौतियों के बावजूद भी हमारे इन दिव्यांगों ने जो कारनामा कर दिखाया है वो पूरे देश के लिए प्रेरणा है। जब इस टीम के सदस्यों के बारे में जानेंगे तो आप भी मेरी तरह हिम्मत और हौसले से भर जाएंगे। इन जांबाज दिव्यांगों के नाम है-महेश नेहरा, उत्तराखंड के अक्षत रावत, महाराष्ट्र के पुष्पक गवांडे, हरियाणा के अजय कुमार, लद्दाख के लोब्सांग चोस्पेल, तमिलनाडु के मेजर द्वारकेश, जम्मू-कश्मीर के इरफान अहमद मीर और हिमाचल प्रदेश की चोन्जिन एन्गमो। सियाचिन ग्लेशियर को फ तह करने का ये ऑपरेशन सेना के विशेष बलों के जाबांजों की वजह से सफ ल हुआ है। मैं इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व उपलब्धि के लिए इस टीम की सराहना करता हूं यह हमारे देशवासियों की हर चुनौती से निपटने की भावना को भी प्रकट करता है।
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