कठुआ: पर्यावरण और पशु प्रेमी इस झील की खूबसूरती और वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र का ले सकेंगे नजारा

एस खजूरिया, कठुआ Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 01 Apr 2021 04:47 PM IST

सार

थीन वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र में 8.80 किलोमीटर लंबा ट्रैकिंग रूट तैयार किया गया। रंजीत सागर झील से सटा होने के चलते पर्यटकों को इस ट्रैकिंग रूट की ओर आकर्षित करने की योजना है।
 
वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र
वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कठुआ जिले के एकमात्र और 18.90 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले थीन वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र में ईको टूरिज्म को लेकर कवायद शुरू कर दी गई है। बीते वर्ष ही वन्यजीव विभाग की ओर से इस परियोजना को मंजूरी के लिए भेजा गया था, जिसे प्रशासनिक परिषद की ओर से मंजूरी मिलने के बाद अब नए आयाम खुलने जा रहे हैं। पर्यटन, स्थानीय रोजगार के साथ साथ ईको टूरिज्म की यह परियोजना पशु-पक्षी प्रेमियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। 
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थीन वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र में 8.80 किलोमीटर लंबा ट्रैकिंग रूट तैयार किया गया है। पहाड़ीनुमा होने के साथ ही तीखी चढ़ाई और उतराई वाले इस रूट को पूरा करने में पांच घंटे तक की ट्रैकिंग की जा सकेगी। वन्यजीव विभाग की ओर से बाकायदा जहां प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखते हुए इस ट्रैकिंग रूट की मेंटेनेंस की जाएगी, वहीं ट्रैकिंग मार्ग पर पेयजल व्यवस्था से लेकर व्यू प्वाइंट और छांव में बैठने का प्रबंध करने की भी योजना है।


ऐसे में इस रूट पर ट्रैकिंग करने वाले लोग वन्यजीव को काफी करीब से देख और महसूस कर पाएंगे। वन्यजीव विभाग इसके लिए स्थानीय स्तर पर गाइड भी तैयार करने पर विचार कर रहा है, जिससे रोजगार के साधनों का भी सृजन होगा। रंजीत सागर झील से सटा होने के चलते पर्यटकों को इस ट्रैकिंग रूट की ओर आकर्षित करने की योजना है। ट्रैकर्स के रूकने के लिए सतवाईं में वन्यजीव विभाग के फारेस्ट रेस्ट हाउस में भी व्यवस्था को लेकर काम शुरू कर दिया गया है। 

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थीन वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र में हैं इन जंगली जानवरों की प्रजातियां

मुख्य रूप से पिज्जड के लिए जाने पहचाने जाने वाले थीन वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र में सांभर, बार्किंग डियर के साथ हिमालयन गोडल भी आम तौर पर दिखाई देते हैं। हाल ही में इस वन्यजीव क्षेत्र में वाइट रंपड वल्चर भी देखे गए हैं। सर्वेक्षण में इनके घरौंदे भी देखे गए हैं। देश में इनकी 95 प्रतिशत आबादी खत्म हो चुकी है। आईयूसीएन की लिस्ट में इसे क्रिटिकल इंडेजरड बर्ड के रूप में दर्ज कर दिया गया है। ऐसे में इस क्षेत्र में इनके घोंसलों के साथ-साथ देखे जाने पर उम्मीद की एक नई किरण भी सामने आई है। 

थीन गांव से बांध साइट तक होगा ट्रैकिंग रूट
थीन वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र में ट्रैकिंग रूट थीन गांव से शुरू होगा जो रंजीत सागर बांध साइट के नजदीक जाकर खत्म होगा। यह ट्रैकिंग रूट वन्यजीव क्षेत्र के बीचों बीच होकर गुजरेगा।
ट्रैकिंग रूट को लेकर कवायद शुरू की जा रही है। इसे नियमित रूप पर मेंटेन भी किया जाएगा। ट्रैकिंग रूट में रेस्टिंग शेड, प्रोटेक्शन के साथ-साथ व्यू प्वाइंट, बावली आदि को भी प्राकृतिक तरीके से तैयार किया जाएगा और प्रकृति के साथ छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। विभाग की कोशिश है कि स्थानीय लोगों को गाइड के तौर पर बढ़ावा दिया जाए। -विजय कुमार वर्मा,  वन्यजीव वार्डन, कठुआ

2002 में गेम रिजर्व से वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र बना थीन का क्षेत्र

राजा महाराजाओं के समय से वन्यजीव क्षेत्रों को अलग-अलग केटेगरी में परिभाषित किया जाता रहा है। गेम रिजर्व(शिकारगाह के रूप) सरकार ने पहले इस वन्यजीव क्षेत्र को रिजर्व किया था। वर्ष 2002 में संशोधन के बाद इसे संरक्षित वन्यजीव क्षेत्र घोषित कर दिया गया। थीन वन्यजीव क्षेत्र मुख्य रूप से गोरल (पिज्जड) का प्राकृतिक वास है।
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