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जम्मू-कश्मीर : अक्तूबर में हुई नागरिकों की हत्या में शामिल सभी आतंकियों का सफाया

अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 29 Nov 2021 04:31 AM IST

सार

सुरक्षा बल छोटी-छोटी टीमों के रूप में सर्जिकल स्ट्राइक पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। 
srinagar encounter
srinagar encounter - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार

बीते अक्तूबर माह में जम्मू -कश्मीर में हुई आम नागरिकों की हत्या में शामिल सभी आतंकी मारे जा चुके हैं। सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों का कहना है कि अब सशस्त्र सुरक्षा बल छोटी-छोटी टीमों के रूप में सर्जिकल स्ट्राइक पर अपना ध्यना केंद्रित कर रहे हैं। 

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सूत्रों ने बताया कि आतंकवाद से निपटने के लिए नए परिष्कृत दृष्टिकोण को जम्मू-कश्मीर पुलिस, खुफिया एजेंसियों और सेना के बीच बेहतर समन्वय योजना के साथ रखा गया है। इसका उद्देश्य यह है कि आतंकी हमले से होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके। अपेक्षाकृत शांत रहने के बाद प्रदेश में पिछले महीने निर्दोष नागरिकों की हत्याओं की संख्या अचानक बढ़ गई थे। इससे माहौल में उथल-पुथल सी मच गई। 


इसके  बाद सुरक्षा बलों ने आतंकरोधी गतिविधियों को और कड़ाई से इस्तेमाल करना शुरू किया। इसका उद्देश्य यह था कि निर्दोष लोगों को होने वाले नुकसान को शून्य पर लाया जा सके। इसके लिए सुरक्षा से जुड़ी सभी एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाया जा सके। सभी एजेंसियां इस दिशा में काम कर रही हैं। यही कारण है कि खुफिया जानकारियों पर आधारित सर्जिकल ऑपरेशन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें छोटी-छोटी टीमों को शामिल किया गया है। इस तरह के ऑपरेशन के लि स्थानीय लोगों से समर्थन प्राप्त करने पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

सूत्रों ने कहा कि जो खुफिया जानकारी है उसके अनुसार पाकिस्तान स्थित आतंकी आकाओं ने कश्मीर में सक्रिय अपने गुर्गों को निर्देश दिया है कि जब भी सुरक्षा बल आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू करें तो कम से कम 10 नागरिक मारे जाएं। इससे दहशत का माहौल बनाने में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि 2018 में विभिन्न आतंकवाद विरोधी अभियानों में 24 नागरिक मारे गए और 49 घायल हुए।

सूत्रों ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में, सुरक्षा बलों ने न्यूनतम संपार्श्विक क्षति सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए और इस तरह के प्रयासों के परिणामस्वरूप, केवल दो नागरिक मारे गए और दो को मामूली चोटें आईं।

श्रीनगर के हैदरपोरा में मुठभेड़ के बारे में पूछे जाने पर सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूक्ष का कहना था कि एक खास वर्ग अपनी खोई हुई जमीन हासिल करने के लिए इस तरह की चीजों को उछालने में सक्रिय है। जम्मू -कश्मीर के पुलिस प्रमुख दिलबाग सिंह गुरुवार को कह चुके हैं कि हैदरपोरा मुठभेड़ की चल रही जांच से पता चलता है कि आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने में आतंकवादियों को एक नेटवर्क का समर्थन प्राप्त था।

सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा बलों को जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में स्थानीय लोगों से कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी और समर्थन मिल रहा है। इन इलाके के लोगों ने पाकिस्तान द्वारा चलाए जा रहे झूठे प्रचार को खारिज कर दिया है।

आतंकियों को दिया सेफ पैकेज
एक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ऐसे उदाहरण भी हैं जब कई बार सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ के दौरान फंसे आम नागरिकों को बचाने के लिए आतंकियों को भागने का रास्ता देना पड़ा। ऐसा सिर्फ आम लोगों की जान बचाने के लिए किया गया।

आतंकी घटनाओं में कमी
सूत्रों ने दावा किया कि जम्मू -कश्मीर में स्थिति नियंत्रण में है। वर्ष 2018 में 318 आतंकवाद से संबंधित घटनाओं की तुलना में 2021 में केवल 121 घटनाएं दर्ज की गईं। इसी तरह 2019 में पथराव की 202 घटनाएं हुईं, जबकि 2021 में केवल 39 मामले दर्ज किए गए। पाकिस्तान से जुड़े तत्व कश्मीरी लोगों को भड़काने की लगातार कोशिश कर रहे हैं।

मारे गए प्रमुख आतंकी

  • 24 नवंबर को मेहरान यासीन शल्ला श्रीनगर में मारा गया। उसने 7 अक्टूबर को श्रीनगर के सफा कदल में सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल सुपिंदर कौर व शिक्षक दीपक चंद की हत्या की थी। 
  • 20 अक्तूबर को  शोपियां मे मारे गए आतंकी आदिल शाह वानी ने अनंतनाग में लिट्ट बस स्टैंड के पास युपी के सहारनपुर निवासी बढ़ई सगीर अहमद अंसारी की हत्या की थी।
  • 20 अक्टूबर को सुरक्षा बलों ने गुलजार अहमद रेशी को मार गिराया था। रेशी ने 17 अकतूबर कुलगाम के वानपोह में को बिहार के दो मजदूरों की हत्या की थी। 

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