जम्मू-कश्मीर: फारूक ने पहली बार स्वीकारा, 2018 में पंचायत चुनाव न लड़ना पार्टी की थी बड़ी भूल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Wed, 01 Sep 2021 01:00 PM IST

सार

चुनाव में भागीदारी न करने के लिए जताया खेद, बोले-इसका अफसोस, हमें लड़ना चाहिए था चुनाव। विधानसभा चुनाव में नेकां भारी जीत हासिल करेगी, पंचायत प्रतिनिधियों के सम्मेलन में हुए शामिल।
फारूक अब्दुल्ला (फाइल फोटो)
फारूक अब्दुल्ला (फाइल फोटो) - फोटो : Instagram/dr.farooqabdullah
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विस्तार

नेकां प्रमुख तथा सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने पहली बार स्वीकार किया है कि 2018 के पंचायत चुनाव में न लड़ना पार्टी की बड़ी भूल थी। चुनाव में पार्टी की भागीदारी न करने के लिए उन्होंने खेद जताया। कहा कि इसका उन्हें अफसोस है। हमें चुनाव लड़ना चाहिए था। वर्ष 2018 के पंचायत चुनाव का नेकां ने बहिष्कार किया था। साथ ही अनुच्छेद 370 हटने के बाद हुए बीडीसी चुनाव में भी पार्टी ने भागीदारी नहीं की थी।
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पंचायती राज संस्थानों की मजबूती के लिए आयोजित संसदीय जनपहुंच कार्यक्रम में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जल्द ही जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार होगी जो अधिकारियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाएगी। उन्होंने जो कुछ किया है उसके लिए कल उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा। आज वह अपने को राजा समझ रहे हैं लेकिन वे राजा नहीं हैं। वे जनता के नौकर हैं जिन्हें जनता के लिए काम करना है।


कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उनकी पार्टी अगला विधानसभा चुनाव जीतेगी। अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार उन्होंने चुनाव में शामिल होने का संकेत दिया। कहा कि वे यह दावे के साथ कह रहे है कि नेकां चुनाव जीतेगी। यदि चुनाव निष्पक्ष तथा पारदर्शी तरीके से कराए गए तो नेशनल कांफ्रेंस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी।

अधिकारी जनता का फोन नहीं उठाते जैसे वे राजा हैं
फारूक ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारी जनता का फोन नहीं उठाते हैं। एलजी से उन्होंने अधिकारियों को जनता के फोन उठाने का निर्देश देने की अपील करते हुए कहा कि जल्द ही राज्य में सरकार का गठन होगा जो सरकारी अधिकारियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाएगी। कहा कि उन्हें सरकारी अधिकारियों से शिकायत है कि वे लोगों के फोन नहीं उठाते हैं जैसे कि उन पर कोई भूत लटक रहा है।

वह लोगों का फोन हर वक्त उठाते हैं क्योंकि वे एक डॉक्टर हैं और वे यह महसूस करते हैं कि कॉल करने वाला किसी प्रकार की परेशानी में होगा। वह यह नहीं पूछते हैं कि वह किस धर्म या पार्टी से जुड़ा हुआ है। मैं यह समझता हूं कि वह एक मानव है जिसके हृदय में भगवान बसता है।

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पंचायत प्रतिनिधि लगातार जनता के संपर्क में रहें
फारूक ने पंचायत प्रतिनिधियों से अनुरोध किया कि वे लगातार जनता के संपर्क में रहें। उनकी बातों व समस्याओं को सुनें। ब्यूरोक्रेट्स की तरह व्यवहार न करें जो जनता को बचाने के लिए कभी आगे नहीं आता।

सरकार अवास्तविक दुनिया से निकले बाहर, आतंकवाद अब भी मौजूद
जम्मू-कश्मीर में पंचायत नेताओं को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने पर जोर देते हुए फारूक ने कहा कि आतंकवाद अभी तक एक बड़ी चुनौती के रूप में मौजूद है। इसलिए सरकार को अवास्तविक दुनिया में नहीं रहना चाहिए और ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि सब कुछ ठीकठाक है। कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों के जीवन पर लगातार खतरा बना रहता है। कश्मीर घाटी में अभी तक आतंकवाद मौजूद है। ये पंचायत सदस्य आतंकवादियों के निशाने पर हैं और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने की आवश्यकता है।

अवास्तविक दुनिया में मत रहिए और ऐसा मत सोचिए कि सब ठीकठाक है। हम अभी तक आतंकवाद का सामना कर रहे हैं और ईश्वर ही जानता है कि भविष्य में क्या होगा। उन्होंने मंच पर मौजूद उप राज्यपाल से उन्होंने आग्रह किया कि पंचायत प्रतिनिधियों को सुरक्षा दी जाए क्योंकि आतंकियों की ओर से उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है। देश के साथ खड़े नेताओं को आतंकियों की ओर से निशाना बनाया जा रहा है और यह देश का दायित्व है कि वह इनकी रक्षा करे।

देश को किसी एक धर्म के आधार पर नहीं चलाया जा सकता
फारूक ने देश की विविधता के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि चेन्नई और श्रीनगर में रहने वाले व्यक्ति में कोई समानता नहीं है। केवल एक ही चीज हमें जोड़ती है और वह यह है कि इस देश को बनाने के लिए हम सभी एकजुट हो जाते हैं। भारत एक विविधतापूर्ण राष्ट्र है और यदि हम इसकी विविधता की रक्षा नहीं करते हैं तो यह समृद्ध नहीं हो सकता।

भारत को किसी एक धर्म के आधार पर नहीं चलाया जा सकता। देश को उसके आंतरिक दुश्मनों से भी अधिक खतरा है। हम अपने देश के बाहरी दुश्मनों के बारे में जानते हैं। किसी भी धर्म में कुछ भी गलत नहीं है और कोई भी धर्म विभिन्न धर्मों के लोगों से नफ रत करना नहीं सिखाता है।
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