जम्मू-कश्मीर: ब्रिटेन के अखबार में लेख से पीडीएफ नेता ने गुपकार गठबंधन पर जताई नाराजगी, जानिए पूरा मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Sun, 11 Jul 2021 10:33 PM IST

सार

पीडीएफ नेता बेग ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की स्थायी शांति में बाधा पैदा कर रहा पीएजीडी।

 
गुपकार गठबंधन
गुपकार गठबंधन - फोटो : ANI
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पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) के नेता और प्रदेश सचिव जावेद बेग ने रविवार को जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग के लिए पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डेक्लेरेशन (पीएजीडी) की आलोचना करते हुए कहा कि तथाकथित कश्मीरी नेतृत्व केंद्र शासित प्रदेश में स्थायी शांति और स्थिरता प्राप्त करने के रास्ते में बाधाएं उत्पन्न कर रहा है।
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ब्रिटेन के एक दैनिक अखबार में प्रकाशित एक लेख में बेग ने कहा कि जब भी कश्मीर में स्थायी शांति और स्थिरता की वापसी के अवसर सामने आते हैं तो तथाकथित कश्मीरी नेतृत्व द्वारा उसमें बाधाएं पैदा की जाती हैं। इस नेतृत्व ने कश्मीर घाटी को स्थायी रूप से राजनीतिक अस्थिरता, अराजकता और अनिश्चितता में डाल दिया है।


उन्होंने लिखा है कि पीएजीडी की हालिया घोषणा में जम्मू-कश्मीर के लिए केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव कराने की पूर्व शर्त के रूप में राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग एक बार फिर कश्मीर केंद्रित पार्टियों के जिद्दी रवैये को दर्शाती है कि कश्मीर घाटी से संबंधित किसी भी मुद्दे को हमेशा विवाद की स्थिति में रखा जाए। बेग ने आगे सवाल किया कि पीएजीडी जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की राह में अनावश्यक बाधा क्यों पैदा कर रहा है जबकि दिल्ली पहले ही इसके बारे में प्रतिबद्ध है।

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लेख में आगे कहा गया है कि तत्कालीन जम्मू और कश्मीर में विधान सभा सीटों का परिसीमन कश्मीर घाटी के पक्ष में गलत तरीके से किया गया था। कश्मीर घाटी और जम्मू तथा लद्दाख के बीच विधान सभा सीटों के वितरण में असमानता थी। बेग ने कहा कि जम्मू क्षेत्र में दस लाख से अधिक की आबादी के लिए विधानसभा सीटें थीं, जबकि कश्मीर को कृत्रिम रूप से कई विधानसभा क्षेत्रों की अनुमति दी गई थी, जिनकी आबादी केवल हजारों में थी।

उन्होंने अपने लेख में कश्मीर घाटी में रहने वाले गुज्जर और बक्करवालों के खानाबदोश आदिवासी समुदायों को कोई राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं देने की भी शिकायत की। लेख में लिखा गया है कि कश्मीर केंद्रित पीएजीडी के जिद्दी राजनीतिक नेतृत्व को यह एहसास नहीं है कि इस तरह की बाधा पैदा करने वाले व्यवहार ने अंतत: कश्मीर को राजनीतिक अस्थिरता और उग्रवाद की ओर धकेल दिया। पीएजीडी को अपनी सामंती मानसिकता और पुरानी राजनीतिक पैंतरेबाजी से बाहर आना चाहिए और सभी राजनीतिक अवसरों को अपने हाथ में लेने की कोशिश करनी चाहिए।

पीएजीडी ने चुनाव से पहले पूर्ण राज्य के दर्जे की उठाई थी मांग
पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डेक्लेरेशन (पीएजीडी) ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने के बाद ही होना चाहिए।

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