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Cough Syrup: जम्मू कश्मीर में भी कफ सीरप पीने से हो चुकी है 12 बच्चों की मौत, हिमाचल में बनी थी दवा

अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 07 Oct 2022 01:10 PM IST
सार

उधमपुर के रामनगर में दिसंबर 2019 से जनवरी 2020 की अवधि में अचानक 12 शिशुओं की मौत हो गई। जांच में पाया गया कि सभी बच्चों ने स्थानीय दवा विक्रेता से सामान्य खांसी-जुकाम के लिए कोल्ड बेस्ट पीसी कफ सीरप ली थी।

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cough syrup - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार

पश्चिमी अफ्रीकी में स्थित गांबिया देश में कफ सीरप पीने से बच्चों की मौत का कारण सिरप में डायथाइलीन ग्लाइकॉल की अधिक मात्रा पाया जाना सामने आया है। यह डायथाइलीन ग्लाइकॉल उधमपुर जिले की रामनगर तहसील में भी 2019-20 में कहर बरपा चुका है। उस समय कोल्ड बेस्ट पीसी सीरप पीने से 12 शिशुओं की मौत हो गई थी, जबकि छह बच्चे दिव्यांग हो गए। 



अनाधिकारिक तौर पर इस घटना में 14 बच्चों की मौत हुई थी, जिसमें एक बिश्नाह का शिशु भी शामिल था और एक अन्य मामले में अभी विवाद है। बाद में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सिफारिश पर प्रदेश सरकार ने जान गंवाने वाले 12 शिशुओं के परिजनों को तीन-तीन लाख रुपये की मुआवजा राशि दी।


लेकिन केंद्र शासित प्रशासन ने दोबारा से मामला सर्वोच्च न्यायालय में उठाया और वहां यह याचिका लंबित है। किसी दवा में डायथाइलीन ग्लाइकॉल की अधिक मात्रा पेट दर्द, उल्टी, दस्त से लेकर गंभीर मामलों में किडनी फेल होने तक का कारण बन सकती है, जिससे मौत का खतरा अधिक होता है।

रामनगर में हुई घटना के अनुसार दिसंबर 2019 से जनवरी 2020 की अवधि में अचानक 12 शिशुओं की मौत हो गई। जांच में पाया गया कि सभी बच्चों ने एक स्थानीय दवा विक्रेता से सामान्य खांसी-जुकाम के लिए कोल्ड बेस्ट पीसी कफ सीरप ली थी। इसका उत्पादन एमएस डिजिटल विजिन, कालाअंब (हिमाचल प्रदेश) ने किया था। 

सामाजिक कार्यकर्ता खजूरिया ने उठाया था मामला 

इस मामले को स्थानीय वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता सुकेश सी खजूरिया ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष उठाया। आयोग ने सितंबर 2020 में मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए जांच में पाया कि इसमें राज्य सरकार के ड्रग कंट्रोल विभाग की लापरवाही हुई है, जिसने दवा की जांच नहीं की गई।

आयोग ने बच्चों के परिवार वालों को तीन-तीन लाख रुपये का मुआवजा देने की सिफारिश की। इसके बाद राज्य सरकार मामले को सर्वोच्च न्यायालय में ले गई। लेकिन न्यायालय ने आयोग के फैसले को बरकरार रखा और आखिर में राज्य प्रशासनिक परिषद की मंजूरी के बाद 21 दिसंबर 2021 को प्रभावित परिवारों में 36 लाख रुपये का मुआवजा जारी किया।

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वर्तमान में यूटी प्रशासन ने इस मामले को दोबारा सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है, लेकिन अभी याचिका लंबित है। सामाजिक कार्यकर्ता सुकेश ने बताया कि एक अन्य बच्चे की मौत का मामला विवाद में है, जिस पर काम हो रहा है।  

घबराएं नहीं, प्रदेश में नहीं है ऐसी दवा: ड्रग कंट्रोलर 

जम्मू। ड्रग कंट्रोलर लोतिका खजूरिया ने दावा किया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशानिर्देशों के बाद हमने जम्मू-कश्मीर में सर्वे करवाया है। इसमें पाया गया है कि उक्त दवा का निर्यात सिर्फ गांबिया को हुआ था। भारत में इसकी कहीं आपूर्ति नहीं हुई है।

फिर भी विभाग ने एहतियात बरतते हुए दवा विक्रेताओं को दिशानिर्देश जारी किए हैं कि अगर कहीं ऐसी दवा की उपलब्धता है भी तो उसकी बिक्री पर तत्काल प्रभाव से बंद कर दें। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। जम्मू-कश्मीर केमिस्ट एसोसिएशन के आयोजक सचिव गुरमीत सिंह का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में उक्त दवा की कहीं सप्लाई नहीं हुई है। 

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