जम्मू-कश्मीर: फर्जी और जाली ऋण पर 8 साल की कैद, होगा एक लाख जुर्माना

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Fri, 24 Sep 2021 12:12 PM IST

सार

13 साल बाद शिकायकर्ता को बस राशि का भुगतान करने का पत्र मिला। चार आरोपियों को बरी किया गया।
धोखाधड़ी
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विस्तार

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भ्रष्टाचार निरोधक जम्मू रितेश दुबे ने धोखाधड़ी और जाली कर्ज के एक मामले में मुख्य दोषी राजेंद्र सिंह को आठ साल के कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले में अन्य आरोपी तरसेम लाल, सुभाष चंद्र चोपड़ा तत्कालीन चीफ मैनेजर एसएफसी, सुदर्शन कुमार बाली तत्कालीन सहायक मैनेजर यातायात एसएफसी और मूल राज शर्मा तत्कालीन वरिष्ठ सहायक एसएफसी जम्मू को बरी कर दिया गया।  

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मामले के अनुसार एक भूतपूर्व सैनिक मंगत राम ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसने एक बस बेयरिंग नंबर जेकेक्यू-5349 को अक्तूबर 1988 में काका राम के साथ साझेदारी में खरीदा और यह व्यवसाय लाभदायक नहीं निकला। जिससे 1989 में बस को यूपी की एक पार्टी को बेचने के साथ वाहन का रूट परमिट आरटीओ जम्मू के पास जमा कर दिया था। वर्ष 1991 में राजेंद्र सिंह (शिंदा) ने जय सिंह उर्फ राजा दलाल के साथ उनसे संपर्क करके उक्त रूट परमिट की खरीद के लिए सौदा किया और उन्हें आरोपी राजेंद्र द्वारा उनके पास लाए गए विभिन्न दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया था।


उक्त रूट परमिट के हस्तांतरण के बहाने राजेंद्र ने उसका पासपोर्ट साइस फोटो भी लिया था। लेकिन 13 साल बाद उन्हें जम्मू कश्मीर राज्य वित्तीय निगम (एसएफसी) की ओर से 17-4-2004 को एक पत्र जारी किया गया जिसमें पंजीकृत वाहन जेके02बी-2174 के लिए ऋण की 1549495 रुपये राशि का भुगतान करने को कहा गया। आरटीओ कार्यालय और एसएफसी जम्मू से पूछताछ में पता चला कि उक्त वाहन उनके नाम पर पंजीकृत है।

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इसमें अन्य आरोपी तरसेम लाल को एसएफसी जम्मू के कार्यालय में तैयार किए गए ऋण दस्तावेजों पर गारंटर के रूप में दिखाया गया था। मुख्य आरोपी ने आपराधिक साजिश करके शिकायकर्ता के नाम पर कर्ज लिया और उनकी सहमति व जानकारी के बिना उक्त वाहन की खरीद की गई। अपराध शाखा ने प्रारंभिक जांच करके प्राथमिकी दर्ज करके चालान पेश किया। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सबूत आरोपी की अपराध की एक और परिकल्पना की ओर इशारा करते हैं।

उसके खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 के तहत आरोप सिद्ध होते हैं। हालांकि धारा 120-बी आरपीसी के तहत आपराधिक साजिश का अपराध साबित नहीं होता है। उसे धारा 420, 471 आरपीसी के तहत अपराध करने पर तीन-तीन साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई जाती है। उसे धारा 467, 471 आरपीसी के अपराधों के लिए प्रत्येक में पांच साल की साधारण कारावास की भी सजा भुगतनी होगी। कारावास की सभी सजाएं साथ चलेंगी।

निर्धारित जुर्माना न देने पर एक वर्ष की अवधि का एक और साधारण कारावास भुगतना होगा। अन्य आरोपियों को सेक्शन 5(1) (डी) , 5 (2) जेके पीसी एक्ट और 161, 120-बी, 420 आरपीसी के तहत आरोपों से बरी किया जाता है। आरोपी नंबर 4 की मौत हो चुकी है और उसके विरुद्ध कार्यवाही निरस्त की जाती है।

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