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कश्मीर में जब तक जैश का खात्मा नहीं कर देंगे तब तक ऐसे ऑपरेशन जारी रहेंगे: सेना

अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: Pranjal Dixit Updated Mon, 11 Mar 2019 04:12 PM IST
सार

  • घाटी में 20 दिनों में जैश के 14 आतंकी ढेर
  • आठ पाकिस्तानी, 10 स्थानीय समेत 18 दहशतगर्द मारे गए

ले. जनरल केजेएस ढिल्लों
ले. जनरल केजेएस ढिल्लों - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सेना की 15वीं कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन ने कहा है कि सुरक्षाबल घाटी में आतंकवाद को कुचलने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जब तक सभी जैश-ए-मोहम्मद और विदेशी आतंकवादी मारे नहीं जाते तब तक अभियान जारी रहेगा। गत 21 दिनों में जैश-ए-मोहम्मद के 14 आतंकियों सहित कुल 18 आतंकवादी घाटी में ढेर किए गए हैं। 


बादामीबाग स्थित सेना की 15 कोर मुख्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए फिदायीन हमले का मास्टरमाइंड त्राल में हुई मुठभेड़ में मुख्य षड्यंत्रकारी मुदस्सिर मारा गया है। वह जैश का सेकेंड इन कमांड था और गत एक साल से सक्रिय था। पुलवामा हमले के दो षड्यंत्रकारी अभी तक मार गिराए गए हैं। पहले कामरान को पिछले महीने ढेर किया गया था।




ढिल्लन ने बताया कि पुलवामा हमले के बाद से ही जैश के पीछे लग गए थे। हमारा मुख्य उद्देश्य जैश की लीडरशिप को खत्म करना था। इसमें काफी हद तक कामयाब भी हुए हैं। इसी के तहत पिछले 21 दिन में 18 आतंकी घाटी में मार गिराए गए हैं। इनमें छह (ए कैटेगरी) बडे़ कमांडरों सहित 14 आतंकी जैश के हैं। 18 आतंकियों में से 8 पाकिस्तानी आतंकी थे। दो हिज्ब और दो लश्कर के आतंकियों सहित 10 स्थानीय थे।

घाटी में चलाए गए आपरेशंस के दौरान सुरक्षाबलों को पहुंचे नुकसान पर कहा कि इसके पीछे एक बड़ा कारण यह है कि हर ऑपरेशन से पहले कोशिश रहती है कि स्थानीय लोगों को मुठभेड़ स्थल से सुरक्षित रेसक्यू किया जा सके। हम ऐसी स्थिति नहीं बनने देना चाहते, जिसमें किसी को बंधक बनाया जाए। उस स्थिति में जब हम उन्हें निकालने की कोशिश करते हैं, तो नागरिकों को बचाने के लिए खुद को एक्सपोज करते हैं। यही कारण है कि सुरक्षा बलों को नुकसान का सामना करना पड़ता है। इस दौरान आईजीपी कश्मीर एसपी पाणि और आईजीपी (ऑपरेशंस) सीआरपीएफ जुल्फिकार हसन भी मौजूद रहे।

भारतीय सेना दे रही मुंहतोड़ जवाब
जीओसी ने कहा पाकिस्तान की ओर से उड़ी में की गई अकारण गोलाबारी से पांच स्थानीय लोग घायल हुए हैं। पाकिस्तान भारतीय सेना को निशाना बनाने में असफल रही है। इसलिए वह उड़ी के कमलकोट में सिविलियन एरिया को निशाना बना रहे हैं। सेना इसका मुंहतोड़ जवाब दे रही है। पीओके में स्थित लांचिंग पैड्स पर भारी संख्या में आतंकी मौजूद हैं, जो बर्फ  कम होने पर मौका मिलते ही घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं। इससे निपटने के लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं।

हम पीस कीपर्स हैं
सीआरपीएफ  के आईजी  (ऑपरेशन) जुल्फिकार हसन ने कहा कि मुदस्सिर अहमद खान उर्फ  मोहम्मद भाई पुलवामा जिले के त्राल के पिंगलिश इलाके में मुठभेड़ में मारे गए दो आतंकियों में से एक था। हालांकि उन्होंने उसकी मौत को 14 फरवरी को सीआरपीएफ पर हुए आत्मघाती हमले में हुई मौतों का बदला कहने से इनकार कर दिया। कहा कि हम पीस कीपर्स हैं और हम सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी देश के खिलाफ  बंदूक न उठाए।

आतंकियों की भर्ती में पिछले तीन माह में आई गिरावट: पाणि
घाटी में पिछले तीन महीनों में स्थानीय स्तर पर आतंकियों की भर्ती में काफी गिरावट आई है। यह घाटी के लिए सकारात्मक बात है। यह बात जम्मू कश्मीर पुलिस के आईजी एसपी पाणि ने कही। उन्होंने कहा कि आम तौर पर जब कोई स्थानीय युवक आतंकी बनता है तो वह सोशल मीडिया पर उसकी घोषणा करता है या उसका परिवार पुलिस थानों में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाता है। 

जैश के रिक्रूटमेंट मॉड्यूल की तफ्तीश जारी
आईजी कश्मीर एसपी पाणि ने बताया कि पुलवामा आतंकी हमले का मुख्य षड्यंत्रकारी मुदस्सिर स्थानीय युवाओं को जैश में भर्ती करता था और उसकी सुरक्षाबलों को काफी समय से तलाश थी। मुदस्सिर और जैश की अन्य लीडरशिप के मारे जाने से संगठन में एक बड़ी सेंध लगी है। जैश के रिक्ररूटमेंट मॉड्यूल की तफ्तीश जारी है। 

मुठभेड़ में पुलवामा हमले की साजिश रचनेवाला आतंकवादी मुदस्सिर अहमद मारा गया: अधिकारी

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले की साजिश रचनेवाला आंतकवादी दक्षिणी कश्मीर के त्राल क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में मारा गया। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि जैश ए-मोहम्मद का आतंकवादी मुदस्सिर अहमद उर्फ ‘मोहम्मद भाई’ पुलवामा जिले के त्राल के पिंग्लिश क्षेत्र में कल रात मुठभेड़ के दौरान मारे गए दो आतंकवादियों में से एक है। उन्होंने बताया कि खान और जैश-ए-मोहम्मद के एक अन्य आतंकवादी सज्जाद भट सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए। भट की ही गाड़ी का पुलवामा आतंकवादी हमले में इस्तेमाल किया गया था।    

अधिकारियों के अनुसार खान के परिवार के सदस्य उसका शव ले गए हैं। भट के परिवारवालों ने यह कहते हुए शव लेने से इनकार कर दिया कि वह इतना जल चुका है कि उसकी पहचान नहीं हो पा रही है। अधिकारियों के मुताबिक पिंग्लिश क्षेत्र में आतंकवादियों की मौजूदगी की विशेष खुफिया जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने क्षेत्र की घेराबंदी करके तलाशी अभियान शुरू कर दिया। अभियान तब मुठभेड़ में बदल गया जब आतंकवादी गोलियां चलाने लगे और सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।    

पुलवामा हमले से 10 दिन पहले खरीदी थी कार  
अधिकारियों ने बताया कि जैश के आतंकवादी खान की पहचान पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले का षड्यंत्र करने वाले के रूप में हुई थी। हालांकि, वह पहले चर्चा में कम रहा था। पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। 14 फरवरी को जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकवादी ने विस्फोटकों से लदी मारूति इको कार सीआरपीफ के काफिले की एक बस से टकरा दी थी जिससे 40 जवान शहीद हुए थे। इस आत्मघाती बम विस्फोट से दस दिन पहले भट ने यह इको कार खरीदी थी।    

पेशे से इलेक्ट्रिशियन था खान  
अधिकारियों के अनुसार आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार निरंतर खान के संपर्क में था। इस हमले की जांच में अब तक जुटाए गए सबूतों के आधार पर सुरक्षाबलों ने बताया कि 23 साल का खान पेशे से इलेक्ट्रिशियन था और स्नातक पास था। वह पुलवामा का रहनेवाला था और उसने ही आतंकी हमले में इस्तेमाल किए गए वाहन और विस्फोटक का इंतजाम किया था। त्राल के मीर मोहल्ला में रहनेवाला खान 2017 में जैश से जुड़ा और उसे मदद पहुंचाने लगा। बाद में नूर मोहम्मद तंत्रे उर्फ ‘नूर त्राली’ ने उसको आतंकवादी संगठन में शामिल कर लिया। नूर त्राली के बारे में माना जाता है कि उसने घाटी में आतंकी संगठनों को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाई।    

2018 में सुंजवान में सेना के शिविर पर हुए आतंकी हमले में भी था शामिल
त्राली के 2017 में मारे जाने के बाद खान अपने घर से 14 जनवरी, 2018 को लापता हो गया और वह तब से आतंकवादी के रूप में सक्रिय था। खान ने ग्रेजुएट करने के बाद एक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) से इलेक्ट्रिशियन का एक साल का डिप्लोमा किया। वह यहां के एक श्रमिक का सबसे बड़ा बेटा था। ऐसा माना जाता है कि फरवरी 2018 में सुंजवान में सेना के शिविर पर हुए आतंकी हमले में भी वह शामिल था। इस हमले में छह जवान शहीद हो गए थे और एक नागरिक की मौत हो गई थी।    

एनआईए भी थी पीछे 
जनवरी, 2018 में लेथोपोरा में सीआरपीएफ के शिविर पर हुए हमले के बाद खान की भूमिका सुरक्षाबलों के नजर में सामने आई थी। इस हमले में सीआरपीएफ के पांच जवान शहीद हो गए थे। पुलवामा हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने खान के घर पर 27 फरवरी को छापा मारा था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी 14 फरवरी को पुलवामा में हुए हमले की जांच कर रही है। उसने 27 फरवरी को खान के घर की तलाशी ली थी।
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