केंद्र की घोषणा: किश्तवाड़-जंस्कार हाईवे बनने से 400 किमी रह जाएगी जम्मू-लद्दाख की दूरी, पाडर व सटे इलाकों में जश्न

संवाद न्यूज एजेंसी, किश्तवाड़ Published by: सुशील कुमार Updated Sun, 28 Nov 2021 12:51 AM IST

सार

किश्तवाड़ का यह इलाका सड़कों के बिना पिछड़ा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग बनने से पाडर को बड़ा महत्व मिल सकता है। पाडर को देवभूमि के नाम से जाना जाता है, जहां प्रदेश की दूसरी सबसे प्रसिद्ध मचैल यात्रा होती है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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किश्तवाड़ से जंस्कार हाईवे की घोषणा से लद्दाख से सटे प्रदेश के दूरदराज क्षेत्र में जश्न का माहौल है। किश्तवाड़-पाडर-जंस्कार से होकर लद्दाख रूट पर हाईवे बनने से जम्मू से लद्दाख की दूरी 400 किलोमीटर रह जाएगी। लद्दाख में चीन से तनाव के बाद इस हाईवे की घोषणा सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है।
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पिछले दिनों डोडा जिले में आए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस योजना को हरी झंडी दे दी है। किश्तवाड़ के गुलाबगढ़ से शुरू होकर पाडर के ही मचैल से होते हुए उमशिला और जंसकार से गुजरकर जो मार्ग कारगिल तक जाता है, अब इसे राष्ट्रीय राजमार्ग बनाया जाएगा।


किश्तवाड़ का यह इलाका सड़कों के बिना पिछड़ा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग बनने से पाडर को बड़ा महत्व मिल सकता है। पाडर को देवभूमि के नाम से जाना जाता है, जहां प्रदेश की दूसरी सबसे प्रसिद्ध मचैल यात्रा होती है। हालांकि, इस इलाके को नीलम घाटी के नाम से भी जाना जाता है, जहां का नीलम बेशकीमती माना जाता है। हाईवे बनने से पूरे इलाके का विकास होगा। जिले के पाडर में बौद्ध धर्म के अनुयायी रहते हैं। सड़क न होने के कारण सभी लोग या तो शहरों की ओर रुख कर रहे हैं, या वहीं रहकर गरीबी से जूझ रहे हैं। 

इस प्रस्तावित मार्ग से पूरे जिला को लाभ होगा। पर्यटकों और सेना को हाईवे से लद्दाख जाना आसान होगा। जम्मू से किश्तवाड़ लगभग 240 किमी है। वहीं, किश्तवाड़ से गुलाबगढ़ की दूरी 62 किमी है। गुलाबगढ़ से आगे मचैल तक 31 किमी लंबे मार्ग पर फिलहाल काम जारी है। इसमें लगभग 15 किमी तक मार्ग बन भी चुका है। इस कार्य के पूरा होने के बाद जम्मू से लद्दाख की दूरी लगभग चार सौ किमी तक रह जाएगी।

जनवरी में भेजा गया था प्रस्ताव
जनवरी में इस मार्ग को लेकर एक प्रस्ताव सरकार के पास भेजा गया था। जिसके लिए एक उच्चस्तरीय बैठक भी हुई, जिसमें इस सड़क के लिए प्रारंभिक योग्यता जांचने के आदेश भी हुए। जिला प्रशासन ने ग्रेफ विभाग के सहयोग से एक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसे लोक निर्माण विभाग के प्रधान सचिव को भेज दिया गया। रिपोर्ट में सड़क निर्माण की संभावना, सड़क संपर्क के लिए क्षेत्र का फासला और भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े शामिल थे।

5329 मीटर की ऊंचाई से गुजरेगा हाईवे
मार्ग का संपर्क लद्दाख से करने लिए इसे उमशिला दर्रे से होते हुए बनाना होगा। यह क्षेत्र समुद्र तल से 5329 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। पाडर में जहां तक मार्ग बना है, वह 1620 मीटर की ऊंचाई पर है। वहीं, मचैल का गांव 2958 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। इस मार्ग से पहले भी पर्यटक आते जाते रहे हैं, जो जंसकार से होकर लद्दाख जाते थे। जंसकार के अकशु गांव तक जंगल और ग्लेशियर से होकर गुजरता ट्रेकिंग मार्ग है। इस मार्ग के राष्ट्रीय राजमार्ग बनने की सूचना से पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई।

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