जम्मू-कश्मीर: दस वर्ष बाद भी नहीं बन पाया शहीद का स्मारक, पत्नी ने कहा- यह अपमान है

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sun, 26 Sep 2021 06:35 PM IST

सार

शहीद की पत्नी ने कहा कि कई बार जनप्रतिनिधियों से स्मारक का काम पूरा करने की मांग की गई है, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। यह शहीदों का अपमान करने जैसा है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : भारतीय सेना
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विस्तार

सरकार की ओर से शहीदों के परिवारों की बेहतरी के लिए दावे किए जाते हैं, लेकिन सेना के हवलदार सुरजीत सिंह के शहीद होने के दस वर्ष बाद भी स्मारक स्थल का कार्य पूरा नहीं हो पाया। इसके चलते परिवार के लोगों में रोष है। जम्मू में मीरां साहिब क्षेत्र में गांव निहालपुर सिंबल के शहीद की पत्नी कुलतीन कौर का कहना है कि दस वर्ष पहले गांव के बाहर उनका स्मारक बनाए जाने का कार्य आरंभ किया गया, जो आज भी अधूरा है।
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उन्होंने बताया कि पुंछ-राजोरी क्षेत्र में उनके पति हवलदार सुरजीत सिंह आतंकियों से लोहा लेते शहीद हुए थे। उस समय जनप्रतिनिधियों ने शहीद के नाम पक्की सड़क बनवाने के साथ उनके स्मारक बनाए जाने का वादा किया था। उस समय के विधायक ने 1.50 लाख रुपये की राशि मंजूर कर स्मारक का काम आरंभ कराया गया था। दस वर्ष बाद भी स्मारक का काम पूरा नहीं किया गया। गांव की सड़क को भी पक्का नहीं किया गया है।

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उन्होंने बताया कि कई बार जनप्रतिनिधियों से स्मारक का काम पूरा करने की मांग की गई है। यह शहीदों का अपमान करने जैसा है। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि स्मारक का अधूरा काम पूरा करने के साथ गांव की मुख्य सड़क को पक्का कराया जाए। हवलदार सुरजीत सिंह सात सिख रेजिमेंट में थे और 157 टीए से अटैच होने पर पुंछ-राजोरी क्षेत्र में 30 मार्च 2010 को शहीद हुए थे।
 

शहीद स्मारकों की देखरेख के लिए किया कमेटी का गठन

गांव कोटली शाहदौला के शहीद दवेंद्र सिंह व गांव कोटली अर्जुन सिंह बलविंद्र सिंह व गांव किरपंड के जनवीर सिंह कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए थे। इन तीनों के स्मारकों की देखरेख करने के लिए ग्रामीणों द्वारा एक कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी इन स्मारकों की देखरेख करती है। पूर्व सरपंच विनोद शर्मा का कहना है कि हर वर्ष गणतंत्र व स्वतंत्रता दिवस पर यहां कार्यक्रम का आयोजन कर शहीदों को याद किया जाता है। कमेटी की ओर से रंग-रोगन कराने के साथ इनकी देखरेख की जाती है। शहीदी दिवस पर आयोजित समारोह में शहीद के परिजन और स्थानीय लोग कार्यक्रम का हिस्सा बनते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह शहीदों के स्मारक स्थलों की देखरेख करे ताकि समाज के लोगों में अच्छा संदेश जाए।
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