सफलता के बीज मंत्र, जरूर पढ़ें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित गुरनाम सिंह की यह बातें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 07 Sep 2019 05:13 PM IST
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, गुरनाम सिंह
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, गुरनाम सिंह - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
ख़बर सुनें
मैंने दूर दराज इलाकों में निष्ठा भाव से विद्यार्थियों की सेवा की। यह सिर्फ मेरा कर्तव्य ही नहीं था, मेरा धर्म भी था। बच्चों और उनके अभिभावकों को प्रेरित करना कि सरकारी स्कूलों के ढांचों और सेवाओं को भी बेहतर किया जा सकता है। कभी-कभी ऐसा भी महसूस हुआ कि विभाग में जो काम कर रहे हैं उसकी कदर नहीं है, लेकिन आज लग रहा है कि निष्ठा भाव से बच्चों की जो सेवा की थी वो सफल रही है।
विज्ञापन


राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार हासिल कर लौटे गुरनाम सिंह का जम्मू कश्मीर पहुंचने पर स्वागत हुआ। कठुआ जिले के जसरोटा गांव निवासी मास्टर गुरनाम को जम्मू कश्मीर से इस वर्ष शिक्षक दिवस पर राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित किया गया था। गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के अन्य चयनित बेहतरीन शिक्षकों के साथ मास्टर गुरनाम को भी इस पुरस्कार से नवाजा। शुक्रवार शाम गुरनाम अपने गांव जसरोटा पहुंचे तो स्वागत करने और बधाई देने वालों का भी तांता लगा रहा।


कठुआ के जसरोटा स्थित अपने निवास पर पहुंचे गुरनाम सिंह का स्वागत परिवार के सदस्यों के साथ-साथ जम्मू कश्मीर टीचर्स फोरम के सदस्यों ने भी किया। गांव के लोग भी गुरनाम सिंह की मेहनत पर उन्हें मिले मेडल और सर्टिफिकेट को देखने के लिए पहुंचे।

बहुत कुछ हुआ और बहुत कुछ होना बाकी है

अमर उजाला से बातचीत में गुरनाम सिंह ने बताया कि शिक्षा विभाग में उनकी सेवाएं दुर्गम इलाकों में रही हैं। उन्होंने बडशाला जिला डोडा की सरकारी स्कूल, प्राइमरी स्कूल गूडा पंडिता और फिर लाहड़ी सरकारी स्कूल के ढांचे को बेहतर करने की कोशिश की। गरीब तबके से आने वाले विद्यार्थियों और अभिभावकों को प्रेरित करने का काम किया। उन्हें वर्दियों से लेकर किताबें उपलब्ध कराने और निजी स्कूलों की ही तरह सरकारी स्कूलों में सेवाएं देने की कोशिश जारी रखी।

कहा, आज लगा की भगवान के घर देर है अंधेर नहीं
गुरनाम सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चाय पर बुलाया और हमारे अनुभव जाने। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल से भी मिलने का मौका मिला। देश के अलग-अलग राज्यों से आए 46 शिक्षकों की अपनी-अपनी गाथाएं थीं, जिसमें अलग-अलग परिस्थितियों में शिक्षकों ने बेहतर काम किया। यह अनुभव साझा कर एक दूसरों को समझने की भी मदद मिली।

मास्टर गुरनाम सिंह ने बताया कि शिक्षा एक बहुत बड़ा दायरा है। 3.72 लाख शिक्षक और बहुत से स्कूल हैं। समग्र या फिर सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकार ने बहुत कुछ किया है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना जरूरी है। जिन दुर्गम इलाकों में रहकर सेवाएं दी हैं, वहां समझ में आया कि रूढ़ीवादी सोच किस तरह से आज भी बालिकाओं को शिक्षा से वंचित रख रही है।

बताया कि कई जगह शिक्षा के ढांचे इतनी दूर हैं कि बच्चों खासकर लड़कियों को पहुंचने में दिक्कतें होती हैं। राज्य अब केंद्र शासित प्रदेश बन गया है, उम्मीद है कि केंद्र की ओर से पहले से भी बेहतर तरीके से शिक्षा व्यवस्था को सुधारने काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के साथ कई जिम्मेदारियां भी हासिल हुई हैं, जिन्हें निभाने की पूरी कोशिश करूंगा।
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00