अनुगूंज होली उल्लास काव्य सम्मेलन

anugoonj holi ullas kavya sammelan
                
                                                             
                            

अनुगूंज साहित्यिक संस्था ने 21 मार्च 2021 को आगामी होली के त्योहार को एक उल्लास काव्य सम्मेलन के रूप में मनाया। ये कार्यक्रम ज़योन इंटरनेशनल कॉन्वेंट स्कूल, सेक्टर 5,  गुरुग्राम के तत्वावधान में आयोजित किया गया जिसमें गुरुग्राम और दिल्ली एन.सी.आर. के कई वरिष्ठ कवि - कवयित्रियों के साथ युवा रचनाकारों ने भी भाग लिया। काव्य सम्मेलन 3 घंटे तक चला और 'होली' विषय पर बेहतरीन रचनाएं सुनने को मिलीं। कार्यक्रम का संयोजन और संचालन अनुगूंज की संस्थापिका निवेदिता चक्रवर्ती ने किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राज्य प्रभारी पांडुचेरी, ओ. बी. सी. मोर्चा श्रीमती ऊषा प्रियदर्शी जी रहीं। विशिष्ट अतिथि गुरुग्राम की प्रसिद्ध कवयित्री वीणा अग्रवाल और प्रसिद्ध गीतकार नरेंद्र शर्मा 'ख़ामोश' रहे। कुल दस कवि - कवयित्रियों ने काव्य पाठ किया। 

गुरुग्राम के प्रतिष्ठित कवि रेंद्र शर्मा 'ख़ामोश' जी के इस गीत ने मन मोह लिया, "मन तेरो खेलन चाहै है, आंखिन सू फिर क्यों नाटै है, ग्वालिन की छोरी, गांव में ख़ूब मची होरी।

गुरुग्राम की प्रतिष्ठित कवयित्री वीणा अग्रवाल की इन पंक्तियों में प्रेम का सार गागर में सागर जैसा भरा था,"होली का रंग ऐसा डालो,थोड़ा सा प्यार मिला लो रे। द्वेष को दिल से निकालो, उमंग जीवन में बसा लो रे।"  कवयित्री सीमा गुलाटी ने इन पंक्तियों में प्रेम में बिताई गई किसी पुरानी होली को याद किया,"जब लगाया था उसके गालों पर गुलाल, आज भी आईना देख कर सुर्ख़ हो जाते उसके गाल।" कवयित्री अर्चना शरण ने फाल्गुन के चांद को अपनी कविता में कुछ इस प्रकार वर्णित किया, "निराशा की दीवारों को फांद, आंगन मेरे उतरा फाल्गुन का चांद, सौंदर्य की गरिमा से गर्वित, सुखद स्मृतियों से सुसज्जित।" 

कवयित्री दीपशिखा श्रीवास्तव 'दीप' ने इन पंक्तियों में पिया के प्रेम में रंगने की बात कही, "पिया के रंग में, रंग गई अब तो,रंग चढ़े ना दूजा, कैसे खेलूं होली सखी री-कैसे खेलूं होली। युवा कवि शुभम् तिवारी ने रंगों के बारे में कुछ यूं कहा,"चलो बेरंग जिंदगी को थोड़ा रंगीन बनाएं, थोड़ा रंग तुम मिलाओ थोड़ा रंग हम मिलाएं। मज़हब में ना सिमट जाए यह त्यौहार फागुन का, मस्जिद से तुम निकल आओ मंदिर से हम निकल आएं।"       
 
वहीं सौरभ तिवारी ने होली के रंग को श्रृंगार रस में डुबो कर कुछ यूं कहा ,"फागुन महीने की रंग तुम लगती हो, सतरंगी और अतरंगी क्या खूब लगती हो", दिल्ली से उपस्थित कवयित्री मोनिका चावला कपूर ने होली पर कुछ ऐसी पंक्तियां प्रस्तुत कीं,"रंगों की प्यारी वो फुहार ना होगी, अब की होली में वो बहार ना होगी। टेसू और गुलाल सब वैसे ही होंगे, गांव और चौपाल सब वैसे ही होंगे।"

अनुगूंज की संस्थापिका और कवयित्री निवेदिता चक्रवर्ती ने अपने बचपन की होली को कुछ यूं याद किया, "सूखे रंग की नकचढ़ी सी होली, हमें तो न भाये ये फीकी होली।" पटौदी के कवि नीरज गुप्ता ने भी अपनी कविताओं से सबका मन मोह लिया।

एक साथ एकत्र होकर काव्य पाठ करके सबके चेहरों पर एक अलग तरह की प्रसन्नता की छटा दिखाई दे रही थी। इस काव्य सम्मेलन में कोविड से संबंधित सभी सावधानियों का ध्यान रखा गया। 

2 months ago
Comments
X