अशोक 'अंजुम' की हास्य कविता: हुस्न की आरजू में खड़े हैं 

अशोक 'अंजुम' की हास्य कविता: हुस्न की आरजू में खड़े हैं
                
                                                             
                            हुस्न की आरजू में खड़े हैं 
                                                                     
                            
जानेमन हम भी क्यू में खड़े हैं 

प्यार तेरा है वातानुकूलित 
हम क्यूं वर्षों से लू में खड़े हैं ?

पीछे वाले तो पहुंचे शिखर पे 
हम तो कब से 'शुरू' में खड़े हैं आगे पढ़ें

2 weeks ago
Comments
X