कविता

62 Poems

                                                                           मैं मरूंगा सुखी
क्योंकि तुमने जो जीवन दिया था—
(पिता कहलाते हो तो जीवन के तत्व पांच
चाहे जैसे पुंज-बद्ध हुए हों, श्रेय तो तुम्हीं को होगा—)
उससे मैं निर्विकल्प खेला हूं—
खुले हाथों उसे मैंने वारा है—
धज्जियां...और पढ़ें
1 minute ago
                                                                           यह मुमकिन ही नहीं कि सब तुम्हें करें प्यार 
यह तुम बार-बार नाक सिकोड़ते हो 
और माथे पर जो बल आते हैं 
हो सकता है किसी एक को इस पर आए प्यार 
लेकिन इसी वजह से कई लोग चले जाएँगे तुमसे दूर 
सड़क पार करने की घबराहट खाना खा...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           कोई पार नदी के गाता

भंग निशा की नीरवता कर,
इस देहाती गाने का स्वर,
ककड़ी के खेतों से उठकर,
आता जमुना पर लहराता
कोई पार नदी के गाता।

होंगे भाई-बंधु निकट ही,
कभी सोचते होंगे यह भी,
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1 day ago
                                                                           एक सूनी नाव 
तट पर लौट आई। 
रोशनी राख-सी 
जल में घुली, बह गई, 
बंद अधरों से कथा 
सिमटी नदी कह गई, 
रेत प्यासी 
नयन भर लाई। ...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           दरअसल मैं वह आदमी नहीं हूँ जिसे आपने 
ज़मीन पर छटपटाते हुए देखा था। 
आपने मुझे भागते हुए देखा होगा 
दर्द से हमदर्द की ओर। 
वक़्त बुरा हो तो आदमी आदमी नहीं रह पाता। वह भी 
मेरी ही और आपकी तरह आदमी रहा होगा। लेकिन ...और पढ़ें
2 days ago
                                                                           काल, 
तुझसे होड़ है मेरी ׃ अपराजित तू— 
तुझमें अपराजित मैं वास करूँ। 
इसीलिए तेरे हृदय में समा रहा हूँ 
सीधा तीर-सा, जो रुका हुआ लगता हो— 
कि जैसा ध्रुव नक्षत्र भी न लगे, 
एक एकनिष्ठ, स्थिर, कालोपरि 
भ...और पढ़ें
3 days ago
                                                                           द्रव्य नहीं कुछ मेरे पास 
फिर भी मैं करता हूँ प्यार 
रूप नहीं कुछ मेरे पास 
फिर भी मैं करता हूँ प्यार 
सांसारिक व्यवहार न ज्ञान 
फिर भी मैं करता हूँ प्यार 
शक्ति न यौवन पर अभिमान 
फिर भी मैं करता हूँ प...और पढ़ें
3 days ago
                                                                           मुझे विश्वास है
यह पृथ्वी रहेगी
यदि और कहीं नहीं तो मेरी हड्डियों में
यह रहेगी जैसे पेड़ के तने में
रहते हैं दीमक
जैसे दाने में रह लेता है घुन
यह रहेगी प्रलय के बाद भी मेरे अन्दर
यदि और कहीं नहीं तो मे...और पढ़ें
3 days ago
                                                                           सबकी बात न माना कर
खुद को भी पहचाना कर

दुनिया से लड़ना है तो
अपनी ओर निशाना कर

या तो मुझसे आकर मिल
या मुझको दीवाना कर

बारिश में औरों पर भी
अपनी छतरी ताना कर...और पढ़ें
4 days ago
                                                                           निराशा मृत्यु है जीवन नहीं है
दनुजता ध्वंस है, सर्जन नहीं है

बनो तो पात्र श्रद्धा के बनो तुम
दया तो दान है, वन्दन नहीं है

न हो आराध्य को यदि मन समर्पित
वो केवल ढोंग है, पूजन नहीं है

कि...और पढ़ें
4 days ago
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