केदारनाथ अग्रवाल: हे मेरी तुम सोई सरिता ! 

कविता
                
                                                             
                            हे मेरी तुम सोई सरिता !
                                                                     
                            
उठो,
         और लहरों-सी नाचो
तब तक, जब तक
आलिंगन में नहीं बाँध लूँ
              और चूम लूँ

                     तुमको !
मैं मिलने आया बादल हूँ !!
3 months ago

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