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आज का शब्द- 'कारवाँ' और आलोक धन्वा की कविता

आज का शब्द - कारवाँ
                
                                                                                 
                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- 'कारवाँ'। व्यक्तियों का समूह जो किसी यात्रा पर हो उसे कारवाँ कहते हैं। 'कारवाँ' का मतलब चलता हुआ काफ़िला भी होता है। प्रस्तुत है आलोक धन्वा की कविता- कारवाँ। 
                                                                                                



समुद्र और शहर
एक दूसरे की याद से भरे हुए हैं

बंदरगाह हैं इनके रास्ते
और मज़दूर हैं इनके कारवाँ

शाम के समय गहरे पानी में
जब जहाज़ी लंगर डालते हैं
शहर अपनी बत्तियाँ जलाता है
दरवाज़ों में खड़ी स्त्रियाँ दिखाई देती हैं
क्या है उनके मन में
कैसी ज़मीन
बालू के ऊपर भी पानी
और बालू के नीचे भी पानी आगे पढ़ें

1 year ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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