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आज का शब्द- 'छागल' और बुद्धिनाथ मिश्र का यह सुप्रसिद्ध गीत

आज का शब्द- 'छागल' और बुद्धिनाथ मिश्र का यह सुप्रसिद्ध गीत
                
                                                                                 
                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- 'छागल'। इस शब्द को कई अर्थों में प्रयुक्त किया जाता है। मसलन, पैरों में पहनने वाले विशेष आभूषण के अर्थ में और पानी भरने वाले मशक के अर्थ में। बंगाल में 'छागल' का अर्थ है बकरा। इस शब्द पर आज आपके लिए प्रस्तुत है हिंदी के सुप्रसिद्ध गीतकार बु्द्धिनाथ मिश्र की रचना- चांद। यह एक प्रेमगीत है और इस गीत में 'छागल' शब्द का प्रयोग पायल के अर्थ में किया गया है।  
                                                                                                


चाँद उगे चले आना
पिया, कोई जाने ना।
दूँगी तुझे नजराना
पिया, कोई जाने ना।
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1 year ago

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