अनामिका की कविताएं स्त्रियों की सशक्त आवाज़ हैं...

अनामिका की कविताएं स्त्रियों की सशक्त आवाज़ हैं...
                
                                                             
                            प्रसिद्ध कवियित्री अनामिका मानवीय संवेदनाओं को उकेरने में अग्रणी हैं। महिलाओं और बच्चों की मनोदशा का वास्तविक चित्रण उनकी कई कविताओं में सरल रूप में मिलता है। वे अपनी रचनाओं में दृश्य बुनती चलती हैं और एक तीखा व्यंग्य पाठक के अवचेतन पर दर्ज होता जाता है। उनकी कविताएं स्त्री पक्ष में कही गई सबसे सशक्त आवाज़ हैं। महिलाओं के बुनियादी अधिकारों और अस्तित्व के प्रश्न उनकी कविता की धुरी हैं।
                                                                     
                            

17 अगस्त 1961 को बिहार के मुजफ्फरपुर में जन्मी अनामिका और उनकी कविताएं किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। उन्हें हिंदी कविता में अपने विशिष्ट योगदान के कारण राजभाषा परिषद् पुरस्कार, साहित्य सम्मान, भारतभूषण अग्रवाल एवं केदार सम्मान पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। अनामिका को उनकी कविता संग्रह 'टोकरी में दिगन्त' के लिए पुरस्कार मिला है। वह मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर की हैं। वे दिल्ली यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी पढ़ाती हैं।  कविता संग्रह 'टोकरी में दिगन्त' 2014 में प्रकाशित हुआ था।  प्रस्तुत है अनामिका की कविता- नमक 

नमक दुख है धरती का और उसका स्वाद भी 
पृथ्वी का तीन भाग मनकीन पानी है 
और आदमी का दिल नमक का पहाड़ 
कमजोर है दिल नमक का 
कितनी जल्दी पसीज जाता है 
गड़ जाता है शर्म से 
जब फेंकी जाती हैं थालियां 
दाल में मनक कम या ज़रा तेज होने पर  आगे पढ़ें

1 month ago

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