ठंड-गरीबी और जब निराला ने अपना दुशाला एक बूढ़ी मां को ओढ़ा दिया...

निराला
                
                                                             
                            साहित्य में समाज के हर पहलुओं का साहित्यकारों ने संजीदगी वर्णन किया है। गरीबी समाज के लिए एक बड़ा अभिशाप है। अक्सर ठंड में गरीब लोगों की मौत हो जाती है। तब अखबार में सुर्खियां बनती हैं कि ठंड से फलां जगह इतने आदमियों की मौत हो गई। यह मौतें ठंड से तो होती हैं लेकिन इनके पीछे आदमी की गरीबी भी जिम्मेदार होती हैं। गरीबी को अभिशाप मानते हुए कवियों ने अपनी कविताओं में इस दंश पर करारे प्रहार किए हैं। शायरों ने अपनी शेरों में इसका मर्म स्पर्शी वर्णन किया है।
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                
                                                                
                                        
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निराला गरीबी को एक सामाजिक दंश मानते हैं...

7 months ago

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