मुग़ल सल्तनत के आख़िरी बादशाह ज़फ़र के कलाम...

Bahadur shah zafar and his poetry
                
                                                             
                            
ऐश से गुज़री कि ग़म के साथ अच्छी निभ गयी
निभ गयी जो उस सनम के साथ अच्छी निभ गयी


मुग़ल सल्तनत के आख़िरी बादशाह और कमाल के शायर बहादुरशाह ज़फ़र के कलामों में जितनी मुहब्बत है उतनी ही उदासी और शिकायतें भी हैं। मुग़लिया बादशाहों के कला प्रेम के उदाहरण तो जहाँ-तहाँ नज़र आ ही जाते हैं लेकिन ज़फ़र उनमें से विशेष हैं। उनकी शायरी में देश के लिए प्यार और उनके अंतर्मन की साफ़गोई नज़र आती है जो मुझे उनका मुरीद बनाती है।
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इतना न अपने जामे से...

3 years ago

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