मेरे अल्फाज़

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                                                                           ओ मेरे यारा,
तु है दूनिया से प्यारा।
कमजोर हो जाऊं मैं,
तो बनता है सहारा।
डुब जाऊं बीच समुंदर में,
पहुुुंचाता है मुझे किनारा।
कठिनाई मेरा हो,
कहता है बुरा समय है हमारा।
मेरे दुख भरे जीवन में...और पढ़ें
19 minutes ago
                                                                           जीवन की इस यात्रा में
चल पड़ा
मैं मुसाफ़िर
बेघर - बंजारा |
कौन अपना है
कौन पराया
लगते सब अनजान हैं,
दो पल ठहरूँ
फिर चल दूँ
कहीं धूप
कहीं छाँव है,
कहीं सघन वन है
कहीं...और पढ़ें
39 minutes ago
                                                                           ये इश्क़ करने वाले बड़े अजीब होते हैं
अगर इश्क़ मौत से हो जाये
तो मरने के हजार बहाने हैं । - हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           कभी मंजर होता है,
कभी समन्दर होता है ।
डरने वाला न समन्दर होता है,
न ही सिकन्दर होता है।

- आर्यन प्रजापति कर्त्तव्यनिष्ठ
  - हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           सजल दृगों से देखता अपलक,
जाती मां सिर ईंट लादकर |
कोमल गात रो रो मुरझाया,
दे रोटी लाई जो मां बांधकर ||

बिलखती भूख मिट्टी पर बन आई,
इसका स्वाद कुछ पहले का जाना |
मां का दूध जब कम पड़ता था,
चाट म...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           खामोशियां और बेताबियां
खुशी और गम
प्यार और धोका
सख्ती और नरमी
राहत और आहत
सब खेल है इस जिंदगी का
  - हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           छोड़कर साथ गर हमसफ़र जाएगा।
जो भी जिंदा बचेगा वो मर जाएगा।।

ये जो तन्हा हुईं महफ़िलें शाम की।
दिल में धड़केंगी बस धड़कनें नाम की।
मौत उसके लिए गोद आराम की।
जिंदगी इक नदी विषभरे जाम की।

पार निकलेगा...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           हे! रवि जीवन तू
इस जहां की किरण तू।

हे !नभ अम्बर तू
इस लोक की चादर तू।
  - हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि य...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           दाता के दर आय के, 'नुदरत' करे पुकार।
थम जाय तूफ़ान यह, ठंडी चले बयार।।

© राकेश मल्होत्रा 'नुदरत'
  - हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           मेरे ख्वाबों की सायेदार डालियां बिखरी हैं पुर्ज़ा पुर्ज़ा जमीं पर
रात दिन मिटा रहे हैं एक दूसरे को अपनी परछाइयों के अंधेरों में
जिनकी घुटती सांसें तुम देख रहे हो आसमां में पिघलते हुए
काश उनको करीब से देखते, तो हर सांस में खुद को दे...और पढ़ें
2 hours ago
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